बरेली: 17 मिनट... हलक में अटकी रहीं सांसें, आंखों के सामने नाचती रही मौत
बरेली, अमृत विचार। सुबह 8:48 से 9:05 बजे तक जिला महिला अस्पताल का एसएनसीयू का प्रवेश द्वार आग की लपटों से घिरा रहा। इन 17 मिनटों के दौरान एसएनसीयू में 11 नवजात शिशुओं के साथ कैद रही चार नर्सों और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आंखों के सामने मौत नाचती रही।
वायरिंग में लगी आग से लपटें उठने के साथ बार-बार धमाके हो रहे थे। आग से उठा धुआं यूनिट में भरा तो नवजात शिशु भी बेचैन होने लगे। बहुत बड़ी गनीमत रही कि आग गेट से अंदर की तरफ नहीं फैली, वर्ना शायद बहुत बड़ा हादसा हो जाता।
एसएनसीयू में मौजूद स्टाफ के मुताबिक सबकुछ इतनी तेजी से हुआ कि उन्हें बाहर निकलकर मदद मांगने तक का मौका नहीं मिला। फोन किया तो दूसरी तरफ कोई कॉल रिसीव करने वाला नहीं था। इस बीच आग की तेज होती लपटों के बीच जोर का धमाका हुआ तो उनकी सांसें अटकने लगीं।
प्रवेश द्वार के पास लगी आग का धुआं अंदर भरने लगा। यूनिट में मौजूद स्टाफ को कुछ और नहीं सूझा तो उन्होंने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। बाहर लोगों को पता लग गया कि आग लग गई है लेकिन गेट से न अंदर आना मुमकिन था न बाहर जाना।
करीब 17 मिनट बाद वार्ड ब्वाय अमित जैसे-तैसे मेन स्विच बंद किया तो आग शांत होनी शुरू हुई। इसके बाद कहीं सबकी जान में जान आई। स्टाफ के मुताबिक आग अगर यूनिट के अंदर पहुंच जाती तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। यूनिट के अंदर ऑक्सीजन के कई सिलिंडर रखे हुए थे। आग बुझाने के लिए फायर एस्टिंग्यूशर सिर्फ एक ही था। ऐसे में अंदर आग पहुंचने के बाद उस पर काबू पाना मुश्किल था।
छह साल से वायरिंग की जांच नहीं, सप्ताह भर पहले फाल्ट होने के बाद भी नहीं जागे
जिला महिला अस्पताल की एसएनसीयू में हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की भी कई परतें उधड़ गईं। यहां एमसीएच विंग जिसमें एसएनसीयू है, उसका निर्माण छह साल पहले हुआ था लेकिन इसके बाद एक बार भी वायरिंग की दुबारा जांच नहीं कराई गई।
शुरू में ही तत्कालीन सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के कार्यकाल में बिजली के तारों और उपकरणों की जांच हुई थी लेकिन उसके बाद किसी ने इसकी जरूरत महसूस नहीं की। स्टाफ के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले ट्रांसफार्मर से निकल रहे तारों पर बंदरों की उछलकूद से भी शॉर्ट सर्किट होने से सप्लाई भी बंद हो गई थी, फिर भी अस्पताल प्रशासन नहीं जागा। अगर तब भी जांच करा ली जाती तो शायद यह हादसा न होता।
एक घंटे पसरा रहा अंधेरा, नहीं हुए ऑपरेशन
जिला महिला अस्पताल में बिजली सप्लाई के लिए सीएमएस कार्यालय के ठीक बराबर एक अलग ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। आग लगने के फौरन बाद बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। इससे अस्पताल के सभी वार्डों में अंधेरा हो गया। ओपीडी में गंभीर मरीज परेशान हुए तो डॉक्टरों ने टॉर्च जलाकर उन्हें देखा। सुबह आठ से 12 बजे तक सिजेरियन ऑपरेशन भी नहीं हो पाए।
पांच बच्चे बदायूं भेजे, एक शाहजहांपुर बाकी को परिजन निजी अस्पताल ले गए
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं को दूसरे जिलों के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के रीजनल मैनेजर मनोज कुमार को सूचना दी।
कुछ ही देर में एंबुलेंस लेकर उनका स्टाफ महिला अस्पताल पहुंच गया। अलग-अलग एंबुलेंस से पांच बच्चों को बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज और एक को शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। पांच नवजात शिशुओं को उनके अभिभावक प्राइवेट अस्पतालों में ले गए। ईएमएलसी ट्रेनर रिजवान, क्वालिटी ऑडिटर संदीप कुमार, हेल्प डेस्क प्रभारी राम प्रकाश और स्वाति की तत्परता से यह कुछ ही देर में निपट गया।
जब हादसा हुआ तो मैं यूनिट के बाहर था। मेरे सामने ही शॉर्ट सर्किट होने के बाद धमाके होने लगे। ऐसा लगा कि बचना मुश्किल है। जैसे-तैसे होश काबू में किए और हिम्मत बांधकर एमसीवी पैनल के पास जाकर मेन स्विच ऑफ किया। सप्लाई बंद होने के बाद आग शांत हो गई। - अमित, एसएनसीयू स्टाफ
हादसे के दौरान मैं एसएनसीयू के ठीक बाहर सफाई कर रही थी। तेज धमाका होने के बाद पीछे मुड़कर देखा तो आग की लपटें आंखों के सामने नाच रही थीं। मेरा दिल दहल गया, जोर-जोर से शोर मचाने के अलावा कुछ भी नहीं सूझा। - रिंकी, एसएनसीयू स्टाफ
रात में ही बहेड़ी के अस्पताल में बहू का प्रसव हुआ था। डॉक्टर के कहने पर देर रात बच्चे को यहां भर्ती कराया था। सुबह हादसा हुआ तो सांसें अटक गईं। बच्चे को कुछ हो जाता तो बहू को क्या जवाब देते। चार घंटे हो चुके हैं, लेकिन अब भी बार-बार आग का नजारा जहन में आ रहा है। - शाबिया, बच्चे की परिजन
कब क्या हुआ...
- 8:48 बजे शॉर्ट सर्किट से लगी आग
- 9:05 बजे पर बंद किया मेन स्विच
- 9:15 बजे बच्चों को ले जाने पहुंचीं एंबुलेंस
- 10:15 बजे तक अस्पताल में रहा अंधेरा
- 11 बजे बिजली सप्लाई हो सकी सुचारू
- 12 बजे सभी 11 बच्चों को किया गया शिफ्ट
नवजात की मौत पर सीएमएस का अपना तर्क...कम वजन का था बच्चा
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन सिंह ने एसएनसीयू में हुए हादसे को बच्चे की मौत की वजह मानने से इन्कार किया है। सीएमएस के मुताबिक जिस बच्चे की मौत हुई है, उसे गंभीर हालत में निजी अस्पताल से रेफर कराकर लाया गया था। बच्चे का वजन कम था, बदायूं रेफर करने से पहले ही उसके परिजनों को उसके गंभीर होने की जानकारी दे दी गई थी।
एसएनसीयू के बाहर ओटी के पास शॉर्ट सर्किट हुआ था। इससे हल्की आग लगने के साथ धमाका भी हुआ। स्टाफ ने सूझबूझ दिखाकर फौरन आग पर काबू पा लिया। समय रहते यूनिट में भर्ती बच्चों को दूसरे जिलों के मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करा दिया गया। - डॉ. त्रिभुवन सिंह, सीएमएम जिला महिला अस्पताल
रात 10 बजे पहुंची प्रशासन की टीम ने की 45 मिनट तक जांच
बरेली, अमृत विचार। महिला अस्पताल में सुबह हुए हादसे के बाद एक नवजात की मौत हो जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से रात तक प्रशासन के अफसरों को घटना की जानकारी नहीं दी गई।
रात में प्रभारी जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी जग प्रवेश को इसका पता चला तो उन्होंने महिला अस्पताल के सीएमएस को फोन कर नाराजगी जताई। इसके साथ फौरन एडीएम सिटी सौरभ दुबे और सिटी मजिस्ट्रेट रेनू सिंह और सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह काे जांच करने महिला अस्पताल भेजा। करीब 10 बजे महिला अस्पताल पहुंचे तीनों अधिकारियों ने एसएनसीयू खुलवाकर करीब 45 मिनट तक जांच की।
इसके बाद लौटकर एडीएम ने सीडीओ को रिपोर्ट दी। सीडीओ ने बताया कि इस हादसे में जिस अधिकारी और कर्मचारी की लापरवाही सामने आएगी, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हादसे की विस्तृत जांच कमेटी से कराई जाएगी।
मैं शहर से बाहर थी। एसएनसीयू में आग लगना गंभीर घटना है। इसकी कमेटी गठित कर जांच कराई जाएगी। इसमें जिसकी भी लापरवाही उजागर होगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. पुष्पा पंत, एडी हेल्थ
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