मुरादाबाद : सरकारी पर भारी निजी एंबुलेंस चालक, रेफर होते ही मरीज हाईजैक
मनमानी : मंडलीय जिला अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस की भरमार, जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
जिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने खड़ीं प्राइवेट एंबुलेंस।
विष्णुदत्त पांडेय, अमृत विचार। मरीजों को अस्पताल तक ले आने व घर तक छोड़ने के लिए शासन की ओर से सरकारी एंबुलेंस की सुविधा दी गई है। जिला महिला अस्पताल समेत कुछ सरकारी अस्पताल परिसर में एंबुलेंस मौजूद रहती हैं। लेकिन, मंडलीय जिला चिकित्सालय में सरकारी एंबुलेंस नजर नहीं आतीं। इमरजेंसी के सामने ही निजी एंबुलेंस माफिया सक्रिय रहते हैं। जैसे ही किसी मरीज को रेफर किया गया तो वह सरकारी एंबुलेंस से कम समय में पहुंचाने का दावा करते हुए तीमारदार को झांसे में ले लेते हैं। तीमारदारों को एंबुलेंस पार्किंग में सरकारी एंबुलेंस दिखाई नहीं देने पर विवश होकर मरीज के तीमारदार को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय मंडलीय जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज उपचार को पहुंचते हैं। इनमें से 10 से 20 रोगियों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें रेफर किया जाता है। रेफर होने पर सरकारी एंबुलेंस नहीं मिलने पर तीमारदार आनन-फानन में मरीज को ले जाने की तैयारी में जुट जाता है। इसी बीच बिचौलिये महानगर के अच्छे अस्पताल का नाम बताते हुए कम समय में पहुंचाने का दावा कर तीमारदार को झांसे में ले लेते हैं।
तीमारदारों से ठगी के साथ मरीज की जान जोखिम में डालते हैं बिचौलिये
बिचौलिये तीमारदारों के साथ सिर्फ ठगी ही नहीं कर रहे हैं बल्कि, मरीजों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इनकी एंबुलेंस में ऑक्सीजन, पैरा मेडिकल स्टॉफ जैसी कोई सुविधा नहीं होती हैं। जिससे इमरजेंसी में मरीज की जान बचाई जा सके। ये सिर्फ एंबुलेंस सिर्फ सामान्य टैक्सी ही हैं। जिला अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल ले जाने के बीच मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे हो होती है। जाम के समय या रास्ते में इमरजेंसी हुई तो जान बचाने का एक भी उपकरण नहीं मिल पाएगा।
105 एंबुलेंस संचालकों को नोटिस
जिले में 305 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। जिसमें से 105 अनफिट हैं। जिसको संभागीय परिवहन विभाग की ओर से नोटिस दिया जा चुका है। यातायात माह में भी इनको रोककर चेक नहीं किया गया। सूत्रों की माने तो जिले में बिना पंजीकृत 1172 एंबुलेंस संचालित हैं।
होनी चाहिए ये सुविधाएं
एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरा-मेडिकल स्टाफ होना चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर और फिल्टर पानी व्यवस्था होनी चाहिए। इमरजेंसी के लिए जीवन रक्षक दवाएं होनी चाहिए। रॉयल्स ट्यूब होना चाहिए (इसका इस्तेमाल जहर निगलने के केस में पेट से निकालने के लिए होता है), स्टेथेस्कोप, बीपी मॉनीटर, फोल्डिंग मशीन और पावरफुल टॉर्च भी होना अनिवार्य है।
शासन के निर्देश का किया जा रहा उल्लंघन
सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि राजकीय चिकित्सा संस्थानों के परिसर के अंदर या ठीक उसके बाहर अवैध एंबुलेंस का संचालन न हो। निजी एंबुलेंस संचालकों द्वारा रोगियों को निजी चिकित्सालयों में ले जाने पर रोक लगाएं। बावजूद अस्पताल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
तीन बार एसएसपी को पत्र दिया गया है। निजी एंबुलेंस संचालकों के जिला अस्पताल परिसर में आने पर उनका चालान किया जाए।-डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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