लखनऊ : पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस पर बोले डॉक्टर- दूरबीन तकनीक है कारगर
लखनऊ, अमृत विचार। कुछ बच्चों के दिमाग में पानी (तरल पदार्थ) भर जाता है। यह तब होता है जब दिमाग में भरे पानी का कंजप्शन बंद हो जाता है। इस बीमारी को हाइड्रोकिफैलस कहा जाता है। जिसकी वजह से पीड़ित बच्चे के जीवन पर खतरा भी होता है। ऐसे में दुरबीन तकनीक से आंतरिक सुराख कर इस बीमारी से बच्चे को बचाया जाता है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। इस बात की जानकारी बेंगलुरू के प्रसिद्व पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. एस. रमेश ने दी। वह शनिवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

केजीएमयू के ब्राउन हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि पहले के समय में हाइड्रोकिफैलस बीमारी से पीड़ित बच्चे के सिर से पेट में एक नली डाली जाती थी। जिससे उस बच्चे के जीवन की गुणवत्ता खराब होती थी और यह कोई पुख्ता इलाज भी नहीं था, लेकिन अब दुरबीन विधि से जब इलाज किया जा रहा है तो 24 घंटे के भीतर बच्चा अपने घर जा सकता है। इस विधि से इलाज के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि किसी बच्चे की सर्जरी करनी है तो पीडियाट्रिक सर्जन से ही इलाज कराना चाहिए। तभी बेहतर परिणाम सामने आयेंगे।
इस अवसर पर किंग जार्ज चिकित्सा विष्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.जेडी रावत ने बताया कि यह विभाग 1998 में जनरल सर्जरी से अलग हुआ था। विभाग में एमसीएच कोर्स का आरम्भ 2004 में हुआ था। अब तक विभाग से 34 छात्र एमसीएच का कोर्स कर चुके है और समारोह में विभाग के सभी पूर्व विद्यार्थी भी सम्मिलित हुए। विभागाध्यक्ष डॉ. जिलेदार रावत ने बताया कि यहॉ के सभी पूर्व विद्यार्थी पूरे भारत में विभाग का नाम ऊॅचा कर रहे हैं। समारोह की अघ्यक्षता कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने किया। साथ ही पूर्व कुलपति प्रो. सरोज चूडामणि गोपल व प्रो. डीके गुप्ता कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
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