लखनऊ : प्रशासन ने ध्वस्त कर दिए गरीबों के आशियाने, पीड़ितों का आरोप अपील पर भी नहीं हुई सुनवाई
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी के पेपर मिल कालोनी के पास में बसे भीखमपुर गांव और शिवाजी नगरवासियों की मुख्यमंत्री और सांसद से की गई अपील काम नहीं आई। इतना ही स्थानीय लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि उनके घर न तोड़े जायें इसके लिए मण्डलायुक्त के यहां अपील दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई साल 2024 में 29 फरवरी को होनी थी, बाद में तारीख बदलकर 7 दिसम्बर कर दी गई,लेकिन सुनवाई होती उससे पहले ही उन्हें जबरन घर से बेदखल कर दिया गया।

स्थानीय निवासी अविनाश वर्मा ने बताया कि उनका मकान तो टूट ही रहा है, अब कुछ कहने से क्या फायदा, लेकिन हमारी बात किसी ने नहीं सुनी। जबकि हमारे परिवार के लोग यहां 60 साल से अधिक समय से रह रहे हैं। गांव के समस्त निवासी लगभग 50 वर्षों से बिजली,पानी और सीवर का बिल जैसे कई टैक्स सरकार को जमा कर रहे हैं। इस गांव के पास कुकरैल पर बांध साल 1971 के आसपास बनाया गया था। बांध बनने के समय गांव की स्थिति काफी ऊंचाई पर थी इसलिए बांध को गांव के बाहर तक ही बनाया गया था। बाद में गांव वालों को यह मौखिक आश्वासन दिया गया कि इससे आप गांव वालों का कोई अहित नहीं होगा। तब से आज साल 2023 तक गांव के लोग यहां रहते चले आ रहे हैं। परन्तु वर्तमान समय में कुकरैल सौंदर्यीकरण और बांध का हवाला देते जिला प्रशासन आज इस गांव के 75 से अधिक पक्के मकानों को तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है।

अविनाश शर्मा तो बानगी मात्र हैं। एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि मीडिया के जरिये हम लोगों को पता चला था कि यहां के लोगों को घर खाली करने के लिए दो दिन का समय दिया गया था,लेकिन मंगलवार से ही यहां तैनात फोर्स ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। पूरे दिन पुलिस की गश्त चलती रही। पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिये गये। आज जो महिलायें अपना दुख बयां कर रही थीं, उनके साथ गलत व्यवहार भी किया गया है।
इसके अलावा यहां के निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अभी कुछ दिन पहले मंडलायुक्त ने इलाके का दौरा किया था। तब भी हमलोगों को यह भरोसा दिया गया था कि यहां बने मकान नहीं टूटेंगे, लेकिन जब बुलडोजर चला, तो किसी की एक न सुनी गई।

बता दें कि कुकरैल नदी को प्रदूषण मुक्त कराने को लेकर मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सोमवार को बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने मातहतों को निर्देश दिए थे कि कुकरैल नदी के सौदर्गीकरण के काम में बाधक बन रहे अतिक्रमण को तत्काल हटाए जाएं। मुनादी कराकर अतिक्रमणकारियों को दो दिन का समय दिया जाए और सामान कहीं और ले जाने को कहा जाए। मंडलायुक्त ने कहा था कि अवैध अतिक्रमण कर रहे लोगों को विस्थापित किया जाये। उन्होंने इस दौरान संपत्तियों को ध्वस्त करने का आदेश भी दिया था।
वहीं मंडलायुक्त के यहां दायर अपील के मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि केवल अपील के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को नहीं रोका जा सकता है।
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