लखनऊ: आंसू, दुख और टूटता घरौंदा, एक दिन में बदल गई भीखमपुर की तस्वीर

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। महज दो दिन में सालों की गृहस्थी बरबाद हो गई। जैसा हमारे साथ हुआ है वह किसी के साथ न हो। अपने हाथों से बनाये घरौंदे को छोड़ना पड़ रहा है। यह बातें बुधवार को भीखमपुर के लोगों की जुबां पर आम थी। कोई किसी से लिपट कर रो रहा था, तो कोई अकेले में अपने आंसू छिपा रहा था। बुजुर्गों की हालत और भी खराब थी। लोग अपनी गाढ़ी कमाई को समेटने में लगे हुये थे। जहां दो दिन पहले तक सुन्दर आशियाने हुआ करते थे, वह जगह आज खंडहर उजाड़ हो रही थी।

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दरअसल, राजधानी स्थित भीखमपुर में प्रशासन के दबाव का असर बुधवार को सुबह से ही दिखने लगा। स्थानीय निवासी अपनी सालों पुरानी गृहस्थी छोड़कर यहां से मायूस होकर जाने लगे है।

स्थानीय निवासी अविनाश की माने तो मंगलवार की अपेक्षा बुधवार को भारी तादात में पुलिस व पीएसी बल के साथ पूर्व सैनिक बल के लोग यहां पहुंच गए। इस दौरान जिला प्रशासन, लखनऊ विकास प्राधिकरण समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद थे। इतना ही नहीं लोगों के घरों के मुहाने पर बुलडोजर लाकर खड़ा कर दिया गया।

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ऐसे में जिन मकानों को जिला प्रशासन की तरफ से अवैध घोषित किया गया था, उन रहवासियों पास मकान खाली करने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचा। थकहार कर लोगों ने अपना सामान अपने घरों से निकालना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं बहुत से लोगों ने अपने हाथों से अपने घरौंदों पर हथौड़ा भी चलाया। जिससे गाढ़ी कमाई का थोड़ा ही सही, लेकिन कुछ हिस्सा अपने साथ ले जा सकें। इस दौरान कुछ मकानों पर एलडीए का बुलडोजर भी चला है।

बता दें कि कुकरैल नदी को प्रदूषण मुक्त कराने को लेकर यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि जिन मकानों को तोड़ा गया है। वह अवैध रूप से बने थे। यह मकान कुकरैल नदी के सौदर्गीकरण के काम में बाधक बन रहे थे। मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने यहां के अतिक्रमण को तत्काल हटाए जाने के निर्देश सोमवार को ही दे दिये थे। साथ ही कहा था कि मुनादी कराकर अतिक्रमणकारियों को दो दिन का समय दिया जाए और सामान कहीं और ले जाने को कहा जाए।

साथ ही अवैध अतिक्रमण कर रहे लोगों को विस्थापित करने का आदेश भी दिया था। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो करीब 29 लोगों को मकान आवंटित कर दिया गया है। बाकी बचे हुये लोगों के लिए भी आवास की व्यवस्था की जायेगी।

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