बरेली: अब जीएसटी विभाग के रडार पर भी बरातघर
बरेली, अमृत विचार। शहर में चल रहे बरातघर नगर निगम के बाद अब जीएसटी विभाग की रडार पर भी आ गए हैं। दरअसल बरातघरों का न तो जीएसटी पंजीकरण है, न उनकी ओर से कोई टैक्स भरा जा रहा है। विभाग ने अब बरातघर वालों की बैठक बुलाई है। इसमें उनसे बातचीत कर जीएसटी में पंजीकरण कराने के लिए मोहलत दी जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
जीएसटी में 20 लाख से अधिक का वार्षिक टर्न ओवर रखने वाले बरातघर और होटल कारोबार पर 18 प्रतिशत सर्विस टैक्स का प्रावधान है लेकिन बरेली जिले में बरातघरों की ओर से न पंजीकरण कराए गए हैं न टैक्स भरा जा रहा है। हाल ही में विभाग की ओर से इकट्ठी की गई सूचनाओं के मुताबिक जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे बरातघर हैं जिनका सालाना लेनदेन 20 लाख से ज्यादा है। इस वजह से विभाग को हर साल लाखों के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जीएसटी विभाग के अफसरों के मुताबिक विभाग में पंजीकरण कराने वाले बरातघरों से ज्यादा संख्या रिसॉर्ट की है। करीब 50 फीसदी रिसॉर्ट का पंजीकरण है और वे नियमित रूप से जीएसटी भी भर रहे हैं लेकिन बरातघरों के पंजीकरण की संख्या 10 फीसदी भी नहीं है। जीएसटी के आंकड़ों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा रिसॉर्ट पीलीभीत और मिनी बाईपास पर हैं। इनमें बुकिंग काफी महंगी है। अधिकारियों ने बताया कि बरातघर वालों के साथ जल्द ही बैठक करने की तैयारी है।
विभाग कई दिनों से हर क्षेत्र के व्यापारियों के साथ बैठक कर रहा है। हाल ही में जानकारी में आया है कि जिले में बड़े पैमाने पर बरातघर बगैर पंजीकरण कराए चल रहे हैं और जीएसटी भी नहीं भर रहे हैं। अब इन पर सख्ती करने की तैयारी है। विभाग के पोर्टल से सूचनाएं इकट्ठी कर ली गई हैं। दो-तीन दिन बरातघर वालों के साथ बैठक कर उन्हें एक मौका दिया जाएगा बाद में किसी भी गड़बड़ी पर कार्रवाई की जाएगी। -ओमप्रकाश चौबे, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1
सहालग में नगर निगम के बाद अब जीएसटी विभाग भी बरातघरों के पंजीकरण पर जोर दे रहा है। अफसरों का यह फैसला स्वीकार है, लेकिन 20 लाख तक के कारोबार पर जीएसटी में मिलने वाली छूट को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अगर किसी बरातघर ने पंजीकरण करा लिया तो उसे टैक्स देना ही पड़ेगा। 18 प्रतिशत का स्लैब कम कर पांच प्रतिशत करने की मांग की जा चुकी है। इस पर केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही है। गोपेश अग्रवाल, अध्यक्ष बैंक्वेट हाल एसोसिएशन
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