पंजाब-हरियाणा में सड़कों पर किसान, रेलवे ट्रैक जाम, परीक्षाएं टलीं
चंडीगढ़। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित तीन कृषि विधेेयकों के विरोध में किसान संगठनों के भारत बंद के आहवान पर कृषि प्रधान पंजाब-हरियाणा राज्यों में आज बड़ी संख्या में किसान और आढ़तिये सड़कों पर उतर आये। इन्हाेंने अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल रूट को जाम कर दिया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी …
चंडीगढ़। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित तीन कृषि विधेेयकों के विरोध में किसान संगठनों के भारत बंद के आहवान पर कृषि प्रधान पंजाब-हरियाणा राज्यों में आज बड़ी संख्या में किसान और आढ़तिये सड़कों पर उतर आये। इन्हाेंने अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल रूट को जाम कर दिया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर संसद में पारित कृषि विधेयक वापिस लेने की मांग की।
किसानों के आंदोलन के मद्देनज़र अनेक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की इन राज्यों में आज होने वाली परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। किसानों के इस आंदोलन को दोनों राज्यों में कांग्रेस समेत अनेक विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। पंजाब में आम आदमी पार्टी(आप) और शिरोमणि अकाली दल(शिअद) तथा हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो), आढ़ती संगठनों तथा हरियाणा सर्व कर्मचारी संगठन का भी समर्थन मिल रहा है। कई पंजाबी गायक भी किसान आंदोलन के समर्थन में आ गये हैं।
पंजाब में चौदह पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. मनमोहन सिंह, डॉ. हरकेश सिंह सिद्धू, मनजीत सिंह नारंग, कुलबीर सिंह सिद्धू, गुरनिहाल सिंह पीरजादा, सुरिंदरजीत सिंह सिद्धू, सुखजीत सिंह बैंस, पीरथी चंद, कैप्टन नरिंदर सिंह, तेजिंदर सिंह धालीवाल, डॉ. करमजीत सिंह सरां, रमिंदर सिंह, उजागर सिंह और प्रभजीत सिंह मंड भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
वहीं बंद के दौरान दोनों राज्यों में आज मंडियां और बाजार बंद रहे। हालांकि अस्पताल, नर्सिंग होम, दवा की दुकानों, करियाना दुकानों, बैंक आदि आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है लेकिन बाजारों में अजीब का सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
पुलिस बल बाजाराें, राष्ट्रीय और रागमार्गों पर गश्त करते नजर आये। वहीं दोनों राज्यों में किसान आंदोलन के दौरान कोविड नियमाें की जम कर धज्जियां उड़ीं। सड़कों पर उतरे किसानों ने न तो मास्क पहने और न ही सामाजिक दूरी का पालन किया गया। ऐसे में इन धरना प्रदर्शनाें में कोरोना संक्रमित किसी व्यक्ति के शामिल होने से बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। पहले से ही इन राज्यों में हर रोज बड़ी संख्या में कोरोना के मामले आ रहे हैं और धरना प्रदर्शनों में लोगों की बचाव के प्रति लापरवाही कोरोना बड़ा बिस्फोट साबित हो सकती है।
पंजाब में हालांकि किसानों ने वीरवार से ही अपना आंदोलन शुरू दिया था और वे राज्य के गुजरने वाली अनेक रेल लाईनों पर अनिश्चितकालीन धरनों पर बैठ गये। पंजाब में अमृतसर, फिरोजपुर और नाभा में किसान रेल लाईनों पर बैठ गये हैं। अमृतसर के जंडियाला के देवीदासपुर गांव के निकट अमृतसर-दिल्ली रेल ट्रैक पर तथा फिरोजपुर छावनी स्टेशन के निकट बस्ती टैंकवाली और नाभा स्टेशन के निकट टेंट लगाकर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरना स्थलों पर किसानों के खाने पीने की व्यवस्था के लिये लंगर भी शुरू किये गये हैं।
वहीं रेलवे ने दोनों राज्यों से गुजरने वाली 20 से ज्यादा रेलगाड़ियों का आवागमन शनिवार तक रद्द कर दिया गया है। अमृतसर से चलने वाली 12 गाड़ियां रद्द कर दी गईं और अमृतसर पहुंचने वाली ट्रेनों को अम्बाला में ही रोक दिया गया है। कुछ गाड़ियों के रूट में परिवर्तन किया गया है। दोनों राज्यों में रेल लाईनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और वहां पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ) और सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं। दोनाें राज्यों में बंद के दौरान कानून व्यवस्था बनाये रखने तथा संवेदनशील स्थलों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं।
किसान संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने ये विधेयक वापिस नहीं लिये तो 26 सितम्बर से आंदोलन की रूपरेखा में बदलाव किया जाएगा। इन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद से इन विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने की भी अपील की है। किसानों ने कहा कि कृषि ही उनके जीवन का मुख्य आधार है तथा दावा किया कि पारित कृषि विधेयकों से वे बरबाद हो जाएंगे। उनकी जमीनें छीन ली जाएंगी। खेती पर निजी कम्पनियों का कब्जा हो जाएगा। मंडियां और न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि विधेयकों से किसान हित प्रभावित नहीं हाेंगे। इन विधेयकों में किसानों को अपनी उपज मंडी से बाहर बेहतर दाम मिलने की स्थिति में बगैर कर चुकाये बेचने का विकल्प दिया गया है। सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि देशभर की मंडियों में एमएसपी पर फसल खरीद प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी और इसका प्रमाण यह है कि केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों का एमएसपी इनकी बिजाई से पहले ही घोषित कर दिया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसान हितों की रक्षा के लिये संकल्पबद्ध है। कोरोनाकाल में उसने किसानों की आर्थिक मदद करते हुये उनके खातों में छह-छह हजार रूपये की राशि स्थानांतरित की है। उसने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे झूठ के सहारे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिये किसानों को इस्तेमाल कर रहे हैं। उसने किसानों से इन दलों के बहकावे में न आने की अपील की है।
पंजाब और हरियाणा में किसानों के पंजाब बंद को देखते हुए दोनों राज्यों की सरकारों ने जिला उपायुक्तों, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस प्रमुखों, रेलवे पुलिस, खुफिया एजेंसियों तथा सम्बंधित अधिकारियों से स्थिति पर नज़र रखने तथा आपसी तालमेल से कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिये हैं। अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवा, डॉक्टरों और अर्द्ध चिकित्साकर्मियों को ड्यूटी पर रखने को कहा गया है ताकि प्रदर्शनों के दौरान किसी भी अप्रिय घटना में घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सके।
दोनों राज्यों में किसान आंदोलन के दौरान रिकॉर्ड के तौर पर रेल लाइनों, रेलवे स्टेशनों और राजमार्ग पर प्रदर्शनों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। दोनों राज्यों में निषेधाज्ञा लागू की गई है तथा लोगों से हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
वहीं किसान आंदोलन के चलते पंजाबी विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी हैं। यह परीक्षा 14 अक्तूबर को पहले तय समय अनुसार होगी। अन्य परीक्षाओं की तिथियां भी अब बाद में जारी की जाएंगी। विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की वेबसाईट को चैक करते रहने को कहा गया है।
