Kanpur: एलिवेटेड रोड की DPR के इंतजार में बीता पूरा साल, विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था शिलान्यास अब लोकसभा चुनाव नजदीक

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कानपुर में एलिवेटेड रोड की डीपीआर के इंतजार में पूरा साल बीता है।

कानपुर में एलिवेटेड रोड की डीपीआर के इंतजार में पूरा साल बीता है। विधानसभा चुनाव से पहले शिलान्यास हुआ था, अब लोकसभा चुनाव आने तक नहीं हुआ।

कानपुर, अमृत विचार। नौ दिल चले अढ़ाई कोस यह मुहावरा रामादेवी से गोल चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड और अनवरगंज से आईआईटी तक प्रस्तावित एलिवेटेड ट्रैक के प्रोजेक्ट पर सटीक बैठती है। विधानसभा चुनाव से पहले बाबूपुरवा में आयोजित समारोह में एलिवेटेड रोड के प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया था।

लेकिन अभी तक प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना तो दूर पूरा साल बीतेने के बावजूद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तक तैयार नहीं हो पाई है। एलिवेटेड ट्रैक का प्रोजेक्ट तैयार तो हो गया पर रेलवे मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली। ऐसे में यह सोचना कि नए साल में इन प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा गलत होगा। 

जीटी रोड पर जाम बड़ी मुसीबत

गोल चौराहा से रामादेवी तक 10.85 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाई जानी है। गोल चौराहा से अनवरगंज के बीच पांच रेलवे क्रासिंग हैं। इनमें से चार के फाटक जब बंद होते हैं तो जीटी रोड पर भीषण जाम लगता है। इस समस्या के समाधान के लिए ही एलिवेटेड रोड बनाने की योजना बनीथी। लोकसभा चुनाव के दौरान चाहे सत्यदेव पचौरी रहे हों या फिर दूसरे दलों के उम्मीदवार सबने दावा किया था कि प्रोजेक्ट जल्द मूर्त रूप लेगा, लेकिन दावा हकीकत में नहीं बदला। बड़ी मुश्किल से हैदराबाद की हेक्सा कंपनी को कंसलटेंट चयनित किया गया है, जो डीपीआर बनाएगी।

अनवरगंज-फर्रूखाबाद रेल रूट रोजाना 50 से अधिक ट्रेने गुजरती हैं। इससे जाम लगता है। इससे जीटी रोड का यातायात प्रभावित होता है। एलिवेटेड रोड बन जाने के बाद ऐसे वाहन जो कल्याणपुर की ओर से आ रहे हैं या रामादेवी की तरफ से कल्याणपुर की ओर जाने वाले होंगे उन्हें इन क्रासिंगों पर फंसना नहीं पड़ता।

लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का ही परिणाम है कि शिलान्यास के एक साल से अधिक समय के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। अभी यही तय नहीं है कि कहां-कहां रैंप बनेगा, एलिवेटेड रोड कितनी ऊंचाई होगी। छह लेन की बनाया जाए या फोरलेन से ही काम चल जाएगा। सीवर लाइन, पेयजल लाइन  की शिफ्टिंग करने की आवश्यकता पड़ेगी या नहीं। बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर व अन्य जनसुविधाओं की शिफ्टिंग में कुल कितनी राशि खर्च होगी और कितने बजट में एलिवेटेड रोड तैयार होगी। 

पहले एक हजार करोड़ लागत का था अनुमान

इस प्रोजेक्ट की आधारशिला भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 2022 में रखी थी। तब इसके निर्माण में एक हजार करोड़ रुपये बजट खर्च होने का अनुमान था। बाद में बजट बढ़ गया।

सिंगल पिलर पर बनाई जानी है रोड 

एलिवेटेड रोड पिलर पर बननी है। एनएच पीडब्ल्यूडी के प्राथमिक एस्टीमेट को देखें तो छह लेन बनाने में करीब 37 सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे जबकि फोरलेन बनाने पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसे सिंगल पिलर पर बनाने की योजना है। मेट्रो की तरह ही डिवाइडर के ऊपर पिलर बनाए जाएंगे। इससे यातायात कम से कम रुकेगा और जाम की समस्या भी नहीं आएगी। झकरकटी और सीओडी पुल के पहले एलीवेटेड रोड से उतरने व चढ़ने के लिए रैंप का निर्माण होगा। फिलहाल इस मार्ग पर यात्री कार इकाई ( पीसीयू) प्रतिदिन 60 हजार आंकी गई है। 

पहले आईआईटी से रामादेवी तक बनना था

सबसे पहले 2011 में आईआईटी से रामादेवी तक एलिवेटेड रोड बनाने की योजना बनी थी। इसका प्रस्ताव तैयार कर एनएच पीडब्ल्यूडी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा था पर मंजूरी नहीं मिल पायी। इसे मंजूरी दिलाने को मंडलायुक्त जो भी रहा उसने प्रयास किया पर बात नहीं बनी। बाद में जब मेट्रो प्रोजेक्ट आईआईटी से गोल चौराहा होते हुए घंटाघर के रास्ते नौबस्ता के लिए मंजूर हुआ तो कहा गया कि अब कल्याणपुर से निर्माण नहीं हो सकता। ऐसे में दोबारा गोल चौराहा से रामादेवी तक के लिए प्रस्ताव भेजा गया। 

एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के सपने को अभी मंजूरी का ही इंतजार

शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली अनवरगंज- फर्रुखाबाद रेलवे लाइन यातायात और कारोबार के लिए नासूर जैसी है। आईआईटी से अनवरगंज तक इस रेलवे ट्रैक पर 16 रेलवे क्रासिंग हैं। जिनके बंद होने पर जीटी रोड की रफ्तार थम जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए पिछले 15 सालों में प्लान तो खूब बने पर परवान एक भी नहीं चढ़े।

पहले इस क्रासिंग को मंधना से मोड़कर पनकी के पास दिल्ली- हावड़ा रूट से जोड़ने की योजना बनी। सर्वे हुआ लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हुआ। वर्षों फाइल बंद रही। बाद में तीन विकल्प तलाशे गए। अंतिम विकल्प एलिवेटेड ट्रैक के रूप में सामने आया पर वह भी अभी मंजूर नहीं हुआ है। पूर्वोत्तर रेलवे ने इस प्रोजेक्ट की डिजाइन 

पहले अनवरगंज से मंधना तक तैयार की थी। लागत 1972 करोड़ रुपये में आई तो इसे जरीब चौकी से आईआईटी तक कर दिया गया और आठ सौ करोड़ रुपये बजट कम किया गया। इस तरह 1200 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान निकालते हुए प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड भेजा गया पर वह भी अभी मंजूर नहीं हुआ। 

जरीब चौकी क्रासिंग को लेकर फंस रहा पेंच

जरीब चौकी क्रासिंग इस एलिवेटेड ट्रैक की राह में सबसे बड़ी बाधा है। पहले यहां मल्टीडायमेंशन पुल बनाने की बात हुई। इसकी डिजाइन और एस्टीमेट तैयार हो गया। बाद में कहा गया कि मल्टीडायमेंशन पुल बनेगा तो एलिवेटेड ट्रैक को अनवरगंज स्टेशन के पार सेंट्रल स्टेशन की ओर से शुरू करना पड़ेगा जो संभव नहीं है। बाद में कहा गया कि इसे जरीब चौकी क्रासिंग के बाद गुमटी क्रासिंग की ओर से बनाया जाएगा। अब तय हो गया है कि पुल की जगह वहां अंडरपास बनेगा। ऐसे में अब एलिवेटेड ट्रैक तेजाब मिल क्रासिंग और अनवरगंज क्रासिंग के बीच से बनाया जाएगा। 

खत्म होना है कल्याणपुर व रावतपुर स्टेशन

रावतपुर और कल्याणपुर स्टेशन को खत्म करने की योजना है। इसके बदले में दलहन अनुसंधान संस्थान की भूमि पर सीएसजेएयू विवि के सामने एक स्टेशन बनाया जाना है। इसके लिए दलहन अनुसंधान संस्थान से भूमि मिलनी है।

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