बरेली: डोर टू डोर : निगोशिएशन की फाइल पर दोबारा टेंडर का आदेश... यानी ठेका उसी को जिसे अफसर चाहें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

चार लाख की रिश्वत मांगने के आरोप के बाद नगर निगम के अफसर फिर घिरे, ठेकेदारों ने कहा- वित्तीय बिड खोलने के बाद टेंडर रद्द कर भंग कर दी फर्मों की गोपनीयता

बरेली, अमृत विचार : डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के टेंडरों पर खड़ा हुआ विवाद शांत नहीं हो पा रहा है। दो दिन पहले एक अधिकारी पर ठेकेदार से चार लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, अब नियम-कायदों की अनदेखी कर दोबारा टेंडरिंग के आदेश पर बवाल मचा हुआ है। आरोप है कि टेंडर डालने वाली फर्मों से निगोशिएशन करने की फाइल पर दोबारा टेंडर का आदेश कर दिया गया है।

टेंडर डालने वाली फर्मों को इसकी जानकारी दिए बगैर उनके रेट भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं। ठेकेदारों ने मनमाफिक फर्म को ठेका देने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत करने की चेतावनी दी है। नगर निगम की ओर से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ठेका लेने के लिए आरुषि, आकांक्षा, पीपीपी सिक्योरिटीज, पाथया और श्री श्याम एसोसिएट की ओर से टेंडर डाले गए थे।

इनमें दो फर्म के तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने के बाद टेंडर कमेटी ने उनकी वित्तीय बिड खोली। दोनों फर्म के रेट कुछ ज्यादा मानते हुए टेंडर कमेटी ने उनसे निगोशिएशन यानी मोलभाव करने की अनुमति के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा गया, लेकिन इसी पत्र पर नगर आयुक्त से दोबारा टेंडर का आदेश करा लिया गया।

इस आदेश पर न टेंडर कमेटी के बाकी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं कराए गए और न ही उन फर्मों को इसकी जानकारी दी गई जिनके टेँडर खोले गए थे।दोबारा टेंडर के आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है। अफसरों पर सीधा आरोप है कि जब सिर्फ दो ही फर्म के टेंडर खुले तो उन्हें कैसे पता चला कि दूसरे टेंडरों की तुलना में रेट ज्यादा हैं।

यह भी तर्क दिया जा रहा है कि टेंडर में सबसे कम रेट आने पर ही मोलभाव हो सकता था लेकिन पूरी प्रक्रिया को ही रद्द दिया गया। दोनों फर्म की ओर से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि दोबारा टेडरिंग की नोटिंग गई ही नहीं तो फाइल पर री-टेडरिंग कैसे लिख दिया गया। उस फाइल पर टेंडर कमेटी के और सदस्यों के हस्ताक्षर भी नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक री-टेडरिंग की फाइल पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु, अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह और पर्यावरण अभियंता राजीव राठी के ही हस्ताक्षर हैं। इस कमेटी में लेखाधिकारी और मुख्य नगर लेखा परीक्षक भी हैं लेकिन उनके हस्ताक्षर नहीं है। अधिकारिक सूत्रों का यह भी कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया की संस्तुति पर री-टेंडर हो सकता है।

डॉ. भानु नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया हैं और उन्होंने संस्तुति की होगी तभी री-टेंडर हुआ होगा। यह भी कहा जा रहा है कि वित्तीय बिड खुलने के बाद टेंडर रद्द नहीं हो सकता लेकिन फिर भी डोर टू डोर का री- टेंडर कर वित्तीय बिड की गोपनीयता भंग कर दी गई है। अब रेट सार्वजनिक हो गए हैं।

ट्रिपल पी सिक्योरटीज के मोहम्मद यूनुस ने बताया कि नगर आयुक्त को अंधेरे में रखकर दोबारा टेंडर का आदेश कराया गया है। टेंडर रद्द होने की उन्हें सूचना तक नहीं दी गई। अब यह नगर आयुक्त को ही बताना चाहिए किस नियम के तहत टेंडर रद्द किए गए हैं।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने री-टेंडर की संस्तुति की थी। विभागाध्यक्ष ऐसा कर सकता है। ठेकेदार मिलकर बात कहना चाहते हैं तो आ सकते हैं। - निधि गुप्ता वत्स , नगर आयुक्त

ये भी पढ़ें - बरेली: डिप्टी सीएम भी मना कर गए, फिर भी डॉक्टर बाहर की लिख रहे दवाएं

संबंधित समाचार