इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुख्तार के बेटे उमर अंसारी को लगा झटका, जमानत याचिका हुई खारिज

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने पारित किया है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव रैली के बाद अंसारी बंधुओं ने अधिकारियों को रोककर उनके खिलाफ विवादित बयान दिया था कि 'राज्य में सरकार बनने के बाद शुरुआती 6 माह तक किसी भी सरकारी अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा, क्योंकि पहले हिसाब- किताब होगा।'

इसके बाद पुलिस उपनिरीक्षक गंगाराम ने कोतवाली थाना, मऊ में आईपीसी के विभिन्न धाराओं के तहत अब्बास अंसारी के साथ-साथ उसके भाई उमर अंसारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। हाईकोर्ट ने उमर अंसारी की पहली अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

हालांकि दूसरी याचिका का समर्थन करते हुए याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामले में याची मुख्य आरोपी नहीं था। उसने कानून के प्रतिकूल कोई भाषण भी नहीं दिया जबकि सरकारी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि आपत्तिजनक बयान न केवल सरकारी तंत्र के खिलाफ था बल्कि यह कानून का पालन करने वाले और शांतिप्रिय नागरिकों के खिलाफ भी था जो तत्कालीन सरकार के तहत सुरक्षित महसूस कर रहे थे।

इसके साथ ही कोर्ट को यह भी बताया गया कि याची को इस बात का यकीन था कि  समाजवादी पार्टी भविष्य में उत्तर प्रदेश राज्य में सत्ता पर काबिज होगी, इसलिए उसने धमकी भरा बयान दिया और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगड़ने की कोशिश की।

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