बरेली: नसबंदी में करवाने में जिले की महिलाओं के आगे फिसड्डी साबित हुए पुरुष

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। जिले में नसबंदी का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कड़ी मेहनत करता नजर आ रहा है इसके बावजूद भी इस साल का लक्ष्य जोकि पुरुषों का 40 नसबंदी और महिलओं की 4450 नसबंदी का है जो अब तक पूरा नहीं हुआ हैं। महिलाओं के दम पर ही जनसंख्या नियंत्रण का सहारा मिल रहा है, क्योंकि पुरुषों की जागरूकता में बड़ी कमी जिले में दिखाई दे रही है।

नसबंदी को लेकर पुरुष डर कर बेठा हुआ है, जबकि परिवार नियोजन में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे निकल रही हैं। जिले में अप्रैल से अब तक नसबंदी के मामले में पुरुषों का आंकड़ा केवल आठ है वहीं महिलाओं की अगर बात करें तो 1768 महिलाओं ने इस वर्षां नसबंदी करवाकर परिवार नियोजन में पुरुषों को  फिसड्डी साबित कर अपना योग दान दिया है जोकि बेहद सराहनीय काम हैं। 

स्वास्थ्य विभाग नसबंदी की जागरूकता से लेकर महिलाओं और पुरुषों की नसबंदी कराने के लिए मोटी रकम खर्च करता है। पुरुष को नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपए तो वहीं महिलाओं को दो हजार रुपए नसबंदी कराने पर सम्मान के तौर पर दिए जाते है।

नसबंदी के लिए विभागीय अधिकारी महिलाओं को आगे लाने में कामयाब हो रहे हैं, लेकिन पुरुषों की नसबंदी कराने में लक्ष्य के आधा आंकड़ा भी नहीं छू पा रहे। नसबंदी कराने वाले पुरुष और महिलाओं का इस साल का आंकड़ा जनसंख्या नियोजन में महिलाओं के आगे रहने और पुरुषों के फिसड्डी रहने की हकीकत बयां करता है। इसके साथ विभागीय अधिकारियों की पुरुषों की नसबंदी कराने के लिए होने वाली दिलचस्पी की भी पोल खोलती है।

परिवार नियोजन विशेषज्ञ डॉ अरुण पांडे ने बताया कि पुरुष नसबंदी करवाने में महिलाओं से पिछे है क्योंकि अधिकतर पुरुषों के मन में यह डर है कि नसबंदी करवाने के बाद वह फिजिकल रिलेशन नहीं बना पाएगें जैसे बिना नसबंदी के बना सकते है पर यह डर बिल्कुल गलत है ऐसा नहीं होता है वह केवल एक साधारण प्रक्रिया है उससे पुरुषों को किसी भी तरह की समस्या नहीं होती है। पुरुषों की नसबंदी महिलाओं की नसबंदी से कम समय पर भी हो जाती है जबकी महिलाओं की नसबंदी में बेहद समय लगता हैं।

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