क्राइस्ट्स और मास दो शब्दों के मेल से बना क्रिसमस : पादरी

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Edited By Amrit Vichar
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सेंटा क्लॉज को याद करने का चलन चौथी शताब्दी से शुरु हुआ, युवाओं ने प्रभु यीशु की प्रशंसा में गाये कैरोल गीत, व्हाइट गिफ्ट कार्यक्रम में गरीबों को बांटे उपहार

रामपुर, अमृत विचार। क्रिसमस पर्व पर मैथोडिस्ट चर्च में व्हाइट गिफ्ट प्रोग्राम में गरीब लोगों को उपहार वितरित किए गए। चर्च में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं ने कैरोल गीत गाए गए। इस अवसर पर पादरी नितिन कुमार ने कहा कि क्रिसमस ईसाई धर्म का सबसे अह्म और विश्व का सबसे लोकप्रिय त्योहार है। हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आज हर जाति और धर्म में समान लोकप्रियता हासिल कर चुका है।  

हाईवे स्थित चर्च में पादरी नितिन ने कहा कि क्रिसमस  प्रभु यीशु के जन्मदिवस के रुप में मनाया जाता है। क्रिसमस शब्द  क्राइस्ट्स और मास  दो शब्दों के मेल से बना है।  जो मध्य काल के अंग्रेजी शब्द  क्रिस्टेमसे  और पुरानी अंग्रेजी शब्द  क्रिस्टेसमैसे  से नकल किया गया है। 1038 ई. से इसे  क्रिसमस कहा जाने लगा।  इसमें क्रिस का अर्थ ईसा मसीह और मस का अर्थ ईसाइयों का प्रार्थनामय समूह या मास है। कहा कि  प्रभु ने मैरी के पास गैब्रियल नामक देवदूत भेजा। गैब्रियल ने मैरी को बताया कि वह प्रभु के पुत्र को जन्‍म देंगी और बच्‍चे का नाम यीशु रखा जाएगा। व‍ह बड़ा होकर राजा बनेगा और उसके राज्‍य की कोई सीमाएं नहीं होंगी। 

क्रिसमस पर सेंटा क्लाज बच्चों को बांटते हैं उपहार
पादरी महबूब मसीह ने बताया कि यीशु के जन्म और सेंटा क्लॉज का आपस में कोई खास संबंध नही है। सेंटा क्लॉज को याद करने का चलन चौथी शताब्दी से शुरु हुआ था। संत निकोलस जो तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिशप थे। सेंटा क्लाज लाल व सफेद ड्रेस पहने हुए, एक वृद्ध मोटा पौराणिक चरित्र है जोकि, बच्‍चों के लिए एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह बच्‍चों को प्‍यार करता है तथा उनके लिए चाकलेट, उपहार व अन्‍य वांछित वस्‍तुएं लाता है। जिन्‍हें वह संभवत: रात के समय उनके जुराबों में रख देता है।

प्रभु यीशु की प्रशंसा में गाए जाते हैं कैरोल गीत
क्रिसमस के दौरान प्रभु की प्रशंसा में लोग कैरोल गाते हैं। वे प्‍यार व भाईचारे का संदेश देते हुए घर-घर जाते हैं। क्रिसमस ट्री अपने वैभव के लिए पूरे विश्‍व में लोकप्रिय है। लोग अपने घरों को पेड़ों से सजाते हैं। लोग मित्रवत रूप से एक दूसरे के घर जाते हैं और दावत करते हैं और वे शांति व भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।

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