नगर निगम: खोखले वादों के साथ दिक्कतों के बीच छोड़ गया चुनावी साल
बरेली, अमृत विचार। टूटी-फूटी सड़कों और गंदगी से अटे शहर को जैसे का तैसा छोड़कर 2023 विदा होने की तैयारी में है। नगर निगम में यह चुनावी साल भी था, साल की शुरुआत से ही नेताओं के साथ अफसरों के दावों की भी गूंज तेज हो गई, जनता की आंखों में इंटरनेशनल सिटी का सपना बसा दिया गया लेकिन चुनाव का पर्दा हटते ही फिर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी कई अधूरी परियोजनाओं और ठेकेदारों के 60 करोड़ के बकाया के साथ फटेहाल नगर निगम फिर सामने आ गया।
बड़े बकायादारों से टैक्स वसूल कर खाली खजाने को भरने के दावे की भी हवा निकल गई। नगर निगम में बेलगाम व्यवस्था की एक और तस्वीर तब सामने आई, जब नगर आयुक्त को बार-बार निर्देश की अनदेखी के बाद सिल्ट से अटी नाली में खुद फावड़ा चलाना पड़ा। हालांकि ऐसा भी नहीं कि नगर निगम में कुछ नहीं हुआ। भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में सख्त कार्रवाई हुई, साथ ही शासनादेशों के पालन की अनिवार्यता लागू कर नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स मातहत अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों की भी आंखों की किरकिरी बन गई।
कंगाल से जूझा नगर निगम... परेशान रही जनता
वर्ष 2023 का ज्यादातर समय नगर निगम शहर में कोई काम नहीं करा सका। एक तरफ ठेकेदार 60 करोड़ से ज्यादा का बकाया होने की वजह से किसी काम का ठेका लेने को तैयार नहीं थे, दूसरी तरफ नगर निगम का खजाना खाली हो चुका था। अफसरों ने कई काम कर्ज लेकर करा डाले थे, उसकी वार्षिक बजट से भी ज्यादा की देनदारी नगर निगम के सिर खड़ी हो गई थी। साल के आखिरी दौर में शासन से कुछ मदों में पैसा मिला, तब कहीं छिटपुट काम शुरू हो पाए। कुछ पैसा ठेकेदारों को भी दिया गया।
चरम पर पहुंचा भ्रष्टाचार टेंडरों में भारी घपले, बगैर डिजाइन और एस्टीमेट के निर्माण कार्य, कमीशनखोरी भी रही बेलगाम
पूरे साल टेंडरों में किए गए भारी घपले सामने आते रहे। कुछ की जांच शुरू हुई तो उसे भी दबा दिया गया। ऐसे भी मामले हुए जब सड़क की मरम्मत का काम दिखाकर नई सड़क का टेंडर कर दिया गया। छह लाख के एस्टीमेट को नौ लाख में बदल दिया गया। मुंशीनगर से बिहारमान नगला तक बगैर डिजाइन तैयार किए नाले के निर्माण पर 10 लाख से ज्यादा की रकम फूंक दी गई। इस अपव्यय की वसूली अब तक नहीं हो पाई।
अवैध कॉलोनियों में सड़कें बनवाने और किराए के भवनों में चल रहे स्कूलों के कायाकल्प पर भी करोड़ों फूंके गए। डूडा के बजट से सड़कें बनाने के नाम पर भी करोड़ों उड़ा दिए गए। निर्माण विभाग में हद से ज्यादा कमीशनखोरी की मार ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ी। जांच में एक के बाद कई हैरतअंगेज मामले खुलकर सामने आए। निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार की वजह से शहर में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता शून्य हो गई। मढ़ीनाथ में 25 लाख की सड़क साल भर नहीं चल पाई।
भ्रष्टाचार की दौड़ में निर्माण विभाग से कभी पीछे तो कभी आगे निकला विभाग, अरबों का बकाया
भ्रष्टाचार का ऐसा ही स्तर टैक्स विभाग में भी रहा। असल में पूरे साल निर्माण और टैक्स विभाग में भ्रष्टाचार की दौड़ में आगे निकलने की होड़ चलती रही। बड़े बकायादारों का टैक्स कम कर दिया गया। आम लोगों के टैक्स बिलों में घपले कर उन्हें साल भर चक्कर कटवाए गए। अरबों रुपये का बकाया टैक्स को कम करने में दिलचस्पी नहीं ली गई।
मुट्ठी गर्म होते ही लाखों के बिलों को हजारों में बदल देने का ऐसा रिवाज चला कि नगर निगम की कमर ही टूट गई। शहर में लगभग डेढ़ लाख भवनों पर टैक्स लागू था लेकिन इनमें से सिर्फ 35 फीसदी से ही वसूली की जा रही थी। नियमों की भी लगातार धज्जियां उड़ाई जाती रहीं। जोनल अफसर ही कम या ज्यादा करने के लिए स्वयंभू अथॉरिटी बन गए। बड़े भवनों पर टैक्स नहीं लगाया गया।
भ्रष्टाचार से जूझती रहीं नगर आयुक्त
पूर्व नगर आयुक्त सैमुअल एन पॉल की तरह मौजूदा नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स को भी अपने ही आसपास फैले भ्रष्ट सिस्टम से जमकर जूझना पड़ा। उन्होंने कई सख्त निर्णय लागू किए तो नगर निगम में कई लोगों की आंखों की किरकिरी बन गईं। इस वजह से उन्हें असहयोग का भी जमकर सामना करना पड़ा।
- नगर आयुक्त की रिपोर्ट पर मई 2023 में भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप में मुख्य अभियंता बीके सिंह निलंबित हुए।
- टैक्स निर्धारण में लगातार घपलों के कारण नगर आयुक्त ने जोनल अफसरों को टैक्स के काम से ही अलग कर दिया।
- निर्माण विभाग और टैक्स विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ फाइलों में दबी जांच आगे बढ़ीं। दोषी साबित होने पर बर्खास्तगी और निलंबन की भी कार्रवाई हुई।
- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कर रही फर्म को गबन के बाद ब्लैकलिस्ट कर कूड़ा उठाने का काम अपने हाथ में ले लिया। कर्मचारियों ने बार-बार काम बंद किया।
- निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार रोकने के लिए टेंडरों में शासनादेश के पालन की अनिवार्यता लागू की। इनमें एक रॉयल्टी संबंधी महत्वपूर्ण आदेश था।
- ठेकेदारों को भुगतान करने और आगे भुगतान न रोके जाने के साथ भुगतान के बाद भी काम न करने वालों को डिबार और ब्लैकलिस्ट करने की व्यवस्था लागू की।
महत्वपूर्ण घटनाएं
उमेश गौतम इस साल हुए चुनाव के बाद भारी बहुमत से दोबारा मेयर निर्वाचित हुए।
चुने गए पार्षद इस साल भी नए भवन में बनने वाले अपने कक्ष में नहीं बैठ पाए।
घटिया निर्माण के विरोध पर रुकी संजयनगर रोड डेढ़ साल बाद बननी शुरू हुई।
दो करोड़ से खरीदी गई पैच मशीन से सड़कों के गड्डे भरने का काम शुरु हुआ।
नगर निगम की बड़ी नाकामियां
- सथरापुर में निर्माणाधीन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तमाम दावों के बावजूद इस साल भी नहीं चल पाया।
-स्वच्छ भारत मिशन के तहत सौ से ज्यादा लोगों के आयोजनों की नगर निगम को सूचना देने की व्यवस्था का पालन नहीं हो पाया।
-डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टेंडर इस साल भी नहीं हो पाए, इसकी वजह से शहर की जनता को दिक्कतें भी झेलनी पड़ीं।
- छुट्टा गोवंशीय पशु शहर के लिए संकट बने रहे। उधर, गोशाला में पशुओं के भूख और बीमारियों से मरने की भी बार-बार खबरें आती रहीं।
- कॉलोनियों से गाय का चारा लेने को नगर निगम की ओर वाहन भेजने की घोषित योजना पर भी क्रियान्वयन नहीं हो पाया।
- आवारा कुत्ते और बंदर भी लोगों के लिए बड़ा संकट बने रहे। कुत्तों के हमले से कई बच्चों की जान चली गई। फिर भी उन्हें नहीं पकड़ा गया।
- शहर की संपत्तियों का जीआईएस सर्वे पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। इससे जीआईएस के अनुसार नगर निगम में राजस्व नहीं आ पाया ।
- पूरे शहर में स्ट्रीट लाइटें लगाकर जगमग करने का वादा भी पूरा नहीं हो पाया। ऐसे रास्तों की भरमार है जो शाम होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं।
ये प्रमुख नए काम शुरू हुए
- एनकैप के तहत संजयनगर श्मशान भूमि पर ग्रीन क्रीमोटोरियम बना, जिसमें गोबर से शवदाह होने से प्रदूषण नही होगा ।
-स्वालेनगर में चार्जिंग स्टेशन के पास जोन- 2 कार्यालय का निर्माण।
- सुरेश शर्मा नगर में जोनल कार्यालय की ऊपरी मंजिल पर विस्तार के लिए निर्माण।
- सुभाषनगर में नगर वाटिकाओं में पौधरोपण।
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