बहराइच: पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है कतर्नियाघाट की सुरम्यता, बाघ, तेंदुआ और हाथी बने आकर्षण
बहराइच, अमृत विचार। जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग प्रदेश ही नहीं देश के पर्यटकों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है। इसका मुख्य कारण जंगल में विभिन्न जंगली जीवों की चहल कदमी के साथ नदियों में जलीय जीवों की उछल कूद उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती है। यही कारण है कि क्रिसमस डी पर जहां सभी थारूहट खोल रहे वही नव वर्ष और 26 जनवरी पर भी बुकिंग फुल हो गई है।

बहराइच जिले के दक्षिणी दिशा में कतर्नियाघाट सेंचुरी क्षेत्र स्थित है। यह जंगल 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। क्षेत्र की दृष्टि से जंगल को सात रेजो में बांटा गया है। जंगल में विलुप्तप्राय बेसकीमती पेड़ जहां देखने को मिल रहे हैं। वही जंगली जीव का विचरण करना लोगों को जंगल की ओर आने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

सेंचुरी क्षेत्र इस समय पर्यटकों के लिए खुला हुआ है। ठंड के मौसम में सड़क पर विचरण करते बाघ और पेड़ पर चढ़कर लोगों को देखते तेंदुआ पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। सोमवार को क्रिसमस का अवकाश था। अवकाश के दिन काफी मात्रा में पर्यटक जंगल भ्रमण के लिए गए। जिप्सी पर सवार पर्यटक जंगल भ्रमण करते समय कहीं बाघ तो कहीं तेंदुआ को देखकर रोमांचित हो उठे।
यही कारण है कि सेंचुरी क्षेत्र में बने सभी थारू है पर्यटकों से फुल चल रहे हैं। प्रभारी डीएफओ रमेश चौहान ने बताया कि क्रिसमस पर सभी थारुहट फुल थे। नव वर्ष और 26 जनवरी को लेकर थारूहट फुल चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार जंगल भ्रमण का किराया भी काम कर दिया गया है जिसके चलते पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। बिना प्रचार प्रसार के ही पर्यटक सरकार के साथ वन विभाग को राजस्व दे रहे हैं।

रास्ते में दिख रहे बाघ और तेंदुआ
कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग में बाघों की संख्या दो गुना हो गई है। कुछ यही हाल तेंदुए की भी है। जिसके चलते सड़क से गुजरने वाले पर्यटकों के दल के सामने कहीं बात तो कहीं तेंदुआ दिख जाता है।
जलीय जीव भी बढ़ा रहे शोभा
प्रभारी डीएफओ रमेश चौहान ने बताया कि कटनिया घाट सेंचुरी क्षेत्र के बीच से ही कौडियाला और गेरुआ नदी निकलती है। इन नदियों में मगरमच्छ, घड़ियाल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा नदी में उछल कूद करती डॉल्फिन लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है।
हाथी भी बढ़ा रहे रोमांच
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाव में एक दशक पहले एक भी हाथी नहीं थे। लेकिन नेपाल के रॉयल बर्दिया जंगल के हाथी बहराइच में आने लगे यहां की आबोहवा उन्हें रास आगे और वह यही के होकर रह गए। इस समय लगभग 25 से 30 की संख्या में हाथी भी जंगल में मौजूद है जो कहीं भी रास्ते में आकर खड़े हो जाते हैं और पर्यटकों में रोमांच के साथ डर भी उत्पन्न करते हैं।
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