बरेली: आपके वोटों का ये हश्र... पार्षदों को मिलेंगे 5 जी मोबाइल
बरेली, अमृत विचार। वोटों को जनता का कर्ज बताने का दौर गुजर चुका है। गली-मोहल्लों की जनता के नेता भी अपने सिर पर वोटों के कर्ज का बोझ रखने के बजाय उन्हें झटक लेने की कला सीख चुके हैं।
नगर निगम में परेशानहाल जनता की तरफ से आंखें फेरकर पार्षदों को 5जी मोबाइल फोन देने के लिए शुरू की गई कवायद यही बता रही है। ये मोबाइल फोन सभी 80 पार्षदों को दिए जाएंगे और एक भी पार्षद ने फोन लेने से यह कहकर इन्कार नहीं किया है कि उसे फोन देने से पहले जनता से किए उनके वादे पूरे कराए जाएं।
पार्षदों को मोबाइल फोन देने का प्रस्ताव बजट बैठक में पारित किया गया था। अब बोर्ड बैठक होने वाली है और इस बैठक से पहले नगर निगम फंड से मोबाइल सेट खरीदने की कवायद शुरू हो गई है। इस पर करीब 18 लाख रुपये की धनराशि खर्च होगी।
अफसरों का तर्क है कि एक मोबाइल सेट की मियाद तीन साल ही होती है। आजकल कंपनियां इतने अपडेट देती हैं कि इसके बाद मोबाइल फोन आउटडेटेड हो जाते हैं। पार्षदों के लिए जो मोबाइल फोन खरीदे जा रहे हैं, वे अपडेट वर्जन के होंगे। तीन साल बाद उन्हें इसलिए भी नहीं रखा जा सकता क्योंकि इनसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक किरणें निकलने लगती हैं।
पार्षदों को नगर निगम की ओर से महंगे मोबाइल फोन देने की तैयारी उस वक्त हो रही है, जब जनता के लिए घोषित तमाम काम शुरू न करा पाने के लिए बजट न होने काे कारण बताया जा रहा है। हालत यह है कि कुछ दिन पहले तक नाली, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसे मामूली कामों की फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों से उल्टा सवाल पूछा जा रहा था कि उनके इलाके में लोगों ने नगर निगम में कितना टैक्स जमा किया है।
कई पार्षद खुद करोड़पति लेकिन मुफ्त का मोबाइल फिर भी चाहिए
सेवा का माध्यम बताई जाने वाली राजनीति का एक रूप यह है भी कि नगर निगम के उन पार्षदों ने भी मुफ्त का मोबाइल फोन लेने से इन्कार नहीं किया है जिनकी खुद की हैसियत करोड़पति की है। बता दें कि शहर के 80 पार्षदों में से सिर्फ एक ही ऐसे हैं जिनका पेशा मजदूरी था। मजदूरी करते हुए वह चुनाव प्रचार करते रहे और जनता ने भाजपा प्रत्याशी को करारी चोट देकर निर्दलीय होते हुए भी उन्हें चुनाव जिताया। बाकी 79 पार्षदों में सभी की आर्थिक स्थिति ठीकठाक है। फिर भी किसी ने मुफ्त का मोबाइल लेने से इन्कार नहीं किया है।
निगम एक्ट में दोनों का प्रावधान नहीं, मगर पार्षदों को मोबाइल मिलेंगे, ठिठुरते गरीबों को कंबल नहीं
कड़ाके की सर्दी में शहर में हजारों बेसहारा लोगों के लिए रात काटना मुश्किल है लेकिन इन्हें कंबल देने के सवाल पर अफसरों का तर्क है कि नगर निगम एक्ट में इसकी इजाजत नहीं है।
उनका यह भी कहना है कि शासन ने वैसे भी गरीबों को कंबल बांटने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दे रखी है, इसलिए नगर निगम की ओर से कंबल देने का कोई औचित्य नहीं है। क्या नगर निगम एक्ट में पार्षदों को मुफ्त मोबाइल फोन या कोई भी उपहार बांटने का प्रावधान है, इस सवाल पर अफसरों का कोई जवाब नहीं मिला।
ठेकेदार बोले- पहले हमारा बकाया तो चुका दें
पार्षदों को मुफ्त मोबाइल देने पर नगर निगम के ठेकेदार भी खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि नगर निगम उनके करोड़ों के बकाया का भुगतान नहीं कर रहा है। नगर निगम निधि से कराए गए कामों का कई बरसों से भुकतान नहीं किया गया है। तमाम ठेकेदारों का 2019 तक का भुगतान लटका हुआ है। अफसरों ने उनका बकाया देने की तो सुध नहीं ली, लेकिन अब नगर निगम निधि से ही पार्षदों के लिए मोबाइल सेट खरीदने की तैयारी की जा रही है।
हाल ही में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले कर्मचारी अक्टूबर के बाद वेतन न मिलने की वजह से दो दिन काम का बहिष्कार कर चुके हैं। ठेकेदारों का भी करीब 50 करोड़ का बकाया नगर निगम के सिर पर लदा हुआ है।
नगर निगम अधिनियम के जानकार पूर्व पार्षद राजेश तिवारी ने बताया कि नगर निगम एक्ट की धारा 30 में स्पष्ट लिखा है कि पार्षदों को जो भत्ते या सुविधाएं दी जाएंगी, उसके लिए नियम बनाकर शासन को भेजा जाएगा। शासन के अनुमोदन के बाद ही पार्षदों को कुछ दिया जा सकता है।
ये भी पढे़ं- बरेली: दो दिन कोहरा छाने के साथ और बढ़ेगी ठंड
