सालों से बांस बल्लियों पर दौड़ रही जानलेवा विद्युत लाइन,अनहोनी को इंतजार कर रहा मध्याचल विद्युत वितरण निगम

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लखनऊ अमृत विचार । मध्याचल विद्युत वितरण निगम के तहत सेस-1 के लखनऊ के गहरु पावर हाउस से पोषित रसूलपुर फीडर के तहत भटगांव में करीब 300 मीटर विद्युत लाइन बांस बल्लियों के सहारे चल रही है जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है बावजूद विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगता है जानकार भी आंख मूंद कर हादसे का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर सरकार विद्युत व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने को लेकर प्रतिबद्ध है मुख्यमंत्री से लेकर ऊर्जा मंत्री तक आए दिन बिजली की समस्याओं के निराकरण के लिए बैठक कर अधिकारियों को दिशा निर्देशित करते हैं। समस्याओं के निराकरण के लिए मोटी रकम के खर्च का भी प्रावधान है बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में जो व्यवस्थाएं हैं जिसकी वजह से विद्युत आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न होती है।
 
ग्रामीणों को पर्याप्त समय तक बिजली नहीं मिलती किसानों को भी बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है किंतु विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता वह अपने मुनाफे की खातिर विद्युत लाइन को बांस बल्लियों पर भी दौड़ाने में परहेज नहीं करते जबकि इस प्रकार की लाइनों से करंट उतरने से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेने की पोल से 40 मीटर की दूरी निर्धारित की गई है इसके अलावा यदि दूरी ज्यादा है तो उपभोक्ता को स्वयं एस्टीमेट बनवाकर विभाग में जमा करना होता है तब जाकर उपभोक्ता का कनेक्शन विभाग द्वारा पास किया जाता है किंतु विभाग के बने इस नियम को विभाग के कर्मचारी ही पलीता लगाते हैं और खुद करीब 300 मी विभाग की विद्युत लाइन बस बलियो के सहारे दौड़ाने के अलावा उपभोक्ता से पैसे लेकर लाइन को बांस बल्लियों के सहारे दौड़ा रहें हैं भले ही बाद में इस लाइन से कोई बड़ा हादसा हो जाए इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।
साधारण उपभोक्ता जहां कनेक्शन के लिए दर-दर भटकता रहता है वहीं पैसे के दम पर कर्मचारियों से मिली भगत से कर्मचारी इस प्रकार बांस बल्लियों के सहारे लाइन दौड़ाने से परहेज नहीं करते हैं। साधारण उपभोक्ताओं को 40 मीटर का नियम विभाग द्वारा बताया जाता है परंतु विभाग के नाक के नीचे करीब 300 मीटर की बांस बल्लियों के सहारे दौड़ रही लाइन विभाग के आला अधिकारियों सहित कर्मचारियों को नहीं दिखाई पड़ती है या शायद वह अपनी जेब भरने के खातिर ग्रामीणों की जान जोखिम में में भी उनको कोई परहेज नहीं है।
 

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