Year Ender 2023: सोनिया गांधी का होता रहा इंतजार, कांग्रेस ने पालिका पर जमाया कब्जा

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Edited By Amrit Vichar
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निकाय चुनाव को छोड़ जिले के राजनीतिक गलियारों में रहा सन्नाटा, निकाय चुनाव में कांग्रेस और निर्दलियों ने भाजपा को चौंकाया

रायबरेली, अमृत विचार। वर्ष 2023 राजनीति के लिहाज से रायबरेली में खास हलचल नहीं दिखी। निकाय चुनाव को छोड़ दिया जाए तो पूरे साल जन सरोकार को लेकर जन प्रतिनिधि दूर ही रहे। सोनिया गांधी के आने का इंतजार होता रहा लेकिन वह नहीं आईं। वहीं जिसकी उम्मीद भाजपा और सपा को नहीं थी वह कांग्रेस ने कर दिखाया।

नगर पालिका रायबरेली की प्रतिष्ठित चेयरमैन की सीट पर पार्टी के शत्रोहन सोनकर जीत गए। पूरे प्रदेश में यह ऐसी सीट थी जिस पर भाजपा हाईकमान ने सबसे अधिक ताकत लगाई थी। मुख्यमंत्री के साथ कई बड़े नेताओं ने चुनाव में जीत के लिए जनसभाएं की लेकिन बाजी कांग्रेस ने जीत ली। इसी तरह अन्य नगर पंचायतों में निर्दलियों ने सत्तारूढ़ दल को खासा चौंकाया।

वर्ष 2023 राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जिले में शांत रहा। जन प्रतिनिधियों ने किसी बड़े मुद्दे को लेकर कोई आवाज नहीं उठायी। पार्टी स्तर पर जब किसी विरोध प्रदर्शन का निर्देश दिया गया तो किया गया लेकिन रायबरेली के आम लोगों की समस्या को लेकर कोई बड़ा कदम और घेराबंदी नहीं दिखी। राजनीतिक गलियारों में निकाय चुनाव को लेकर खासी हलचल रही। अप्रैल से लेकर मई तक पूरे जिले में चुनाव का शोर रहा।

सांसद सोनिया गांधी को लेकर राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कई बार मंच से उनके गायब रहने की बात की। इसके बाद सांसद सोनिया गांधी के  भुएमऊ गेस्ट हाउस के सामने ब्लॉक प्रमुख और उनके समर्थकों द्वारा लालटेन दिखाने का प्रदर्शन किया गया था। वहीं निकाय चुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत लगाई थी लेकिन नतीजा उस हिसाब से नहीं आया जिसकी उम्मीद पार्टी को थी। सबसे बड़ा उलटफेर नगर पालिका रायबरेली के चेयरमैन पद को लेकर सामने आया।

कांग्रेस जिसके खाते में जिले की एक भी विधानसभा सीट नहीं और कांग्रेस प्रत्याशी शत्रोहन सोनकर ने चुनाव में भाजपा की शालिनी कनौजिया को हरा दिया। शत्रोहन सोनकर को 43404 मत मिले तो वहीं शालिनी कनौजिया को  25629 मत मिले। इस तरह एक बड़े अंतर से शत्रोहन ने चुनाव जीता। जबकि नगर पालिका सीट को जीतने के लिए भाजपा ने जमकर प्रचार के साथ हाईटेक प्रचार किया था। मुख्यमंत्री सहित डिप्टी सीएम और कई बड़े नेताओं ने जनसभा की थी। इसी तरह नगर पंचायत लालगंज चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सरिता  गुप्ता चुनाव जीतीं।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी उमा पांडे को 1257 वोटों से हराया। जबकि राजनीतिक लिहाज से लालगंज भाजपा का गढ़ है लेकिन निकाय चुनाव में कांग्रेस ने सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए और सीट जीत ली। यह परिणाम भी खासा चौंकना वाला रहा था। कांग्रेस के लिए यह नगर पंचायत जीतना भी बहुत महत्वपूर्ण था।

इसी तरह सलोन में निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रशेखर रस्तोगी ने 4695 मत पाकर नगर पंचायत सलोन की सीट पर कब्जा किया था। जबकि सपा के उम्मीदवार अली अहमद 2728 मत पाकर दूसरे नम्बर पर रहे।निर्दलीय इरफान सिद्दीकी 2169 मतों से तीसरा स्थान पाने में कामयाब रहे।जबकि सबसे खराब स्थित में बीजेपी से परमेश पटेल की रहे। परमेश पटेल को कुल 2011 मत प्राप्त हुए।

चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक तरफ केंद्रीय तरफ और अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने अपील की थी।वहीं क्षेत्रीय विधायक अशोक कोरी ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी। नगर निकाय चुनाव में सलोन, नसीराबाद और परशदेपुर तीनों सीट पर बीजेपी खाता तक नहीं खोल सकी। परशेदपुर में निर्दलीय विनोद कौशल को 2667 मत मिले थे तथा सपा के मोहम्मद इस्लाम को  2539 मत मिले थे और इस तरह विनोद कौशल ने चुनाव जीता था। नसीराबाद में निर्दलीय मो अली को 3172 मत मिले थे तथा भाजपा की अनीसा बानो को 2651 मिले थे लेकिन जीत मो. अली को मिली थी।

खास बात यह थी कि भाजपा ने पहली बार किसी मुस्लिम प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा था। भाजपा ने समीकरण बनाने की कोशिश की थी लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल सकी। इस तरह रायबरेली के नगर निकाय के चुनाव में कांग्रेस और निर्दलियों ने भाजपा को पांच सीटों पर चौंका दिया था। जबकि भाजपा के खाते में महराजगंज, डलमऊ, ऊंचाहार, बछरावां और शिवगढ़ की कुर्सी गई। शिवगढ़ पहली बार नगर पंचायत बनी और उसमें भाजपा ने बाजी मारी। चुनाव में भाजपा की सुमन को 6158 मत तथा अर्चना को  2655 मत मिले थे। सपा की गीता को 1948 मत, कांग्रेस की सुमन को 180 मत मिले थे। इस सीट पर सबसे बुरा हाल कांग्रेस का रहा था। 

ऊंचाहार विधायक ने बिजली की समस्या को लेकर किया प्रदर्शन 
ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने ऊंचाहार में बिजली की समस्या को प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन दिया। साथ ही बिजली के बिल में जिस तरह की मनमानी हो रही है उस पर आक्रोश जाहिर किया था। इसी तरह सपा द्वारा शहर में भी बिजली, पानी, सड़क, महंगाई और संसद से सांसदों के निष्कासन को लेकर प्रदर्शन किया गया। 

भाजपा ने बु्द्धीलाल पासी को बनाया अध्यक्ष 
लोकसभा चुनाव से पहले रायबरेली में जातीय समीकरण को सही करने के साथ कील-कांटे दुरुस्त करने को लेकर भाजपा ने बुद्धीलाल पासी को जिलाध्यक्ष बनाया। साथ ही पीयूष मिश्रा को प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। इस तरह भाजपा राजनीतिक समीकरणों को संभालती दिखी। अब इस परिवर्तन का लोकसभा चुनाव में क्या असर होगा यह समय तय करेगा। 

सोनिया गांधी की प्रत्याशिता की तस्वीर नहीं हो सकी साफ 
ऐसा पहली बार हो रहा है कि कांग्रेस के भीतर से रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी के चुनाव लड़ने की कोई साफ तस्वीर सामने नहीं आ सकी। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने जब अक्टूबर में जिले का दौरा किया था तो कहा कि सोनिया गांधी ही चुनाव लड़ेंगी लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर कोई बात खुलकर नहीं की गई। पूरे साल जिले के लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर रहीं कि सांसद क्या चुनाव लड़ेंगी या नहीं। इसी के साथ बीच में जब प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश प्रभारी की पद राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरफ से दोबारा नहीं दिया गया तो अटकलें तेज हो गईं कि प्रियंका गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं लेकिन कौन चुनाव लडे़गा यह लाख टके का सवाल है।

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