प्रधानमंत्री आवास: आस बंधी हुई है लेकिन सात साल से वेबसाइट बंद

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वर्ष 2017 की सूची के मुताबिक आवास प्लस के तहत लक्ष्य पूरा, चुनावी साल में वेबसाइट खुलने की संभावना जता रहे हैं अफसर

अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास की वेबसाइट सात साल से बंद पड़ी है। जरूरतमंदों की पक्की छत की उम्मीदों पर भी ताला पड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन न कर पाने से याचकों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। चूंकि आवास के लिए अर्जी देने वालों का सत्यापन कराकर विभागीय अफसर उनकी सूची लगातार बना रहे हैं, इसलिए आस बंधी हुई है। ऐसे लोगों की अनुमानित संख्या तीन हजार से ज्यादा बताई जा रही है।

वर्ष 2011 में हुई सामाजिक, आर्थिक और जातिगत गणना के आधार पर बनी सूची के आधार पर आवासहीन लोगों को 2017 तक आवास दिए जाने थे। इस सूची में शामिल लोगों आवास देने का लक्ष्य पूरा होने के बाद आवास प्लस के तहत दूसरे लोगों का चयन करने के शासन के निर्देश थे। उसी के अनुसार सूची तैयार कर अब तक आवास दिए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 2017 के बाद से वित्तीय वर्ष 2023-24 तक 22 हजार 184 लाेगों को आवास दिए गए हैं लेकिन 2016-17 से भारत सरकार की वेबसाइट बंद होने से नए आवेदन करने वाले लोगों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं।

पिछले सात बरसों में आवास प्लस के तहत बनाई सूची में शामिल लोगों को ही हर साल शासन से जारी लक्ष्य के अनुसार आवास दिए जा रहे हैं, मगर कहा जा रहा है कि सूचीबद्ध आवेदकों को आवास देने का लक्ष्य अब पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि आवास मांग रहे लोगों का सत्यापन कराकर 2017 से अब तक सभी ब्लाॅकों से तीन हजार से ज्यादा लोग चिह्नित किए गए हैं। हर ब्लॉक में ढाई सौ से तीन सौ तक लोग इनमें शामिल हैं। प्रधानमंत्री आवास की वेबसाइट न खुलने का मामला शनिवार को विकास भवन में हुई दिशा की बैठक में भी उठा था। सीडीओ ने बताया था कि नए पात्रों की सूची तैयार कराई जा रही है। साइट खुलते ही आवेदनों को अपलोड कराकर लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।

डेढ़ हजार से ज्यादा अल्पसंख्यक अभी कतार में
आवास प्लस के तहत 2017 से अब तक 22 हजार 184 लोगों को आवास दिए गए हैं जिनमें अनुसुचित और सामान्य वर्ग के लोग शामिल हैं। सामान्य वर्ग की श्रेणी में ही अल्पसंख्यकों को भी आवास दिए जा रहे हैं, लेकिन 16 सौ से 17 सौ के बीच ऐसे अल्पसंख्यक अब भी आवासों से वंचित बताए जा रहे हैं। उनकी सूची तैयार है लेकिन शासन से लक्ष्य निर्धारित नहीं होने की वजह से आवास अटका हुआ है। आगे इन सभी को भी आवास दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

नए साल में पूरा होगा आवास का इंतजार
वर्ष 2017 के बाद आवास के लिए भटक रहे लोगों का इंतजार इस साल पूरा हो सकता है। 2017 में बनी सूची के मुताबिक लक्ष्य पूरा हो चुका है। अब संभावना जताई जा रही है कि चुनावी साल 2024 में भारत सरकार प्रधानमंत्री आवास की वेबसाइट खोल सकती है। अगर वेबसाइट खुली तो सूचीबद्ध हुए पात्रों के नाम ऑनलाइन अपलोड कर आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

आवास के लिए प्रार्थना करने वाले नए लोगों की पात्रता की जांच कराकर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। वेबसाइट खुलने पर ही ऑनलाइन आवेदन कराया जाएगा। एकाएक काफी संंख्या में आवेदन आने पर पात्रता तय करने में दिक्कत होती है, इसलिए पहले ही पात्रता का सत्यापन कर लिया गया है- तेजवंत सिंह, पीडी डीआरडीए। 

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