बरेली: ट्रकों के पहिये थमे, पेट्रोल-डीजल की किल्लत, करोड़ों का कारोबार प्रभावित

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Edited By Amrit Vichar
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किल्लत और महंगाई का पहिया घूमना शुरू

बरेली, अमृत विचार। हिट एंड रन के नए कानून के खिलाफ ट्रकों का चक्का जाम हुआ तो किल्लत के साथ महंगाई के पहिए ने भी रफ्तार पकड़ ली। महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, बिहार समेत देश के तमाम राज्यों में ट्रकों की हड़ताल के दूसरे ही दिन जिले भर में रोजमर्रा की जरूरत की चीजों का संकट खड़ा होना शुरू हो गया। कई पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल का स्टॉक खत्म होने के साथ आलू-प्याज और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों के भाव चढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। कई इलाकों में दूध और गैस सिलिंडरों की किल्लत से भी लोगों को जूझना पड़ा।

खत्म होने लगा डीजल-पेट्रोल का स्टॉक, पेट्रोल पंपों पर टूटी भीड़, कई पर किलोमीटरों तक गाड़ियों की कतार

जमकर मारामारी, एसोसिएशन ने कहा- दो दिन और रही हड़ताल तो सारे पंप हो जाएंगे खाली
बरेली, अमृत विचार : दो दिन से ट्रकों के न चलने का सबसे ज्यादा असर पेट्रोल पंपों पर दिखा। मंगलवार को कई पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल का स्टॉक खत्म हुआ तो दूसरे पेट्रोल पंपों पर भीड़ टूट गई। उनके बाहर किलोमीटरों तक वाहनों की कतार लग गई। लोगों को लाइन में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ा, तब कहीं गाड़ी में पेट्रोल और डीजल भरवाने में कामयाब हो पाए।

शहर के कई पेट्रोल पंपों पर सुबह ही पेट्रोल का स्टॉक खत्म होने की सूचनाएं मशीनों पर लगा दी गईं। इसी के साथ कई दूसरे राज्यों में पेट्रोल-डीजल संकट खड़ा होने की खबरें आईं तो लोग पेट्रोल पंपों पर टूट पड़े। कारों के साथ बाइकों की भी लंबी लाइन लग गई। सिविल लाइंस में प्रभा टॉकीज के सामने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पेट्रोल पंप के बाहर लगी कतार चौकी चौराहे तक पहुंच गई तो सड़क पर ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। इसी तरह का हाल संजयनगर तिराहे समेत कई दूसरे पेट्रोल पंपों पर रहा। शहर के पेट्रोल पंपों पर तेल मिलना मुश्किल हुआ तो लोग आसपास हाईवे पर भी पेट्रोल भरवाने दौड़े।

पेट्रोल पंपों के बाहर लगी लाइनें इतनी लंबी थीं कि बाइक वालों को भी घंटा-घंटा भर इंतजार करना पड़ा। पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि हड़ताल की वजह से पेट्रोल और डीजल के टैंकर दो दिन से नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह से पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होना शुरू हो गया है। मंगलवार टैंकर न पहुंचने से संकट और बढ़ गया। भारी वाहनों और चार पहिया वाहनों के लिए ज्यादा दिक्कत हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल एक-दो दिन ओर खिंची तो सारे पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म हो जाएगा।

एलपीजी सिलिंडरों का भी संकट बढ़ा
चक्का जाम हड़ताल की वजह से परसाखेड़ा के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से ट्रक दूसरे दिन भी रवाना नहीं हो सके जिसकी वजह से डिस्ट्रीब्यूटरों को सिलिंडरों की सप्लाई ठप रही। आल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन बरेली शाखा की जिलाध्यक्ष अंजू सिंह ने बताया कि जिले में हर दिन तीन लाख से ज्यादा सिलिंडरों की खपत होती है। सिलिंडरों का स्टॉक कम रह गया है। हड़ताल जारी रही तो गोदामों में जो स्टॉक है, वह भी खत्म हो जाएगा और घरों में खाना बनना मुश्किल हो जाएगा।

दूसरे राज्यों में फंसे बरेली के 800 से ज्यादा ट्रक, ट्रांसपोर्ट कारोबार को सौ करोड़ का झटका
दो ही दिन की हड़ताल में जिले में सौ करोड़ से ज्यादा का ट्रांसपोर्ट प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। किला ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश विग के मुताबिक चालकों की हड़ताल की वजह से जिले के आठ सौ से ज्यादा ट्रक दूसरे राज्यों में फंस गए हैं। इस वजह से बाजारों में परचून, खाद्यान्न और कई दूसरे जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित है। रेत-बजरी के साथ भवन निर्माण के दूसरे सामान की भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि हड़ताल से शहर में पहले दिन करीब 40 करोड़ और दूसरे दिन 60 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।

दूध-ब्रेड की आपूर्ति ठप, रोज आती हैं 12 गाड़ियां, तीन ही पहुंचीं
दूध और ब्रेड जैसी चीजों जिनकी घरों में हर सुबह जरूरत पड़ती है, उनकी सप्लाई पर भी हड़ताल का असर पड़ा है। मंगलवार को पैकेट दूध की 20 फीसदी भी आपूर्ति नहीं हो सकी है। शहर में मदर डेयरी, अमूल, शुद्ध और आनंदा समेत दर्जन भर दूध कंपनियों की गाड़ियां आती हैं, मंगलवार को तीन गाड़ियां ही पहुंचीं। इसके साथ दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से आने वाले ब्रेड की सप्लाई भी ठप रही। अमूल दूध के एक प्रतिनिधि के मुताबिक जिले में अमूल की पांच गाड़ियां रोज आती हैं लेकिन मंगलवार को एक ही पहुंची। बाहर से दूध का टैंकर नहीं आ सका है।

गन्ना पेराई पर संकट, क्षमता के अनुसार नहीं चल पा रहीं मिलें
ट्रक चालकों की हड़ताल के कारण गन्ना लोडिंग बंद हो गई है और क्रय केंद्रों पर गन्ने का उठान बंद हो गया है। इस वजह से जिले की सभी चीनी मिलें क्षमता से कम गन्ने की ही पेराई कर पा रही हैं। अफसरों का कहना है कि चीनी मिलों को लगातार चलाने के लिए गन्ना खरीद के नियमों में ढील देकर किसानों के लिए पर्चियां और इंडेंट बढ़ाकर चीनी मिल के गेट पर ही गन्ना खरीद के लिए मंजूरी दे दी गई है।

जिले में डीजल और पेट्रोल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा रही हैं। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। लोग किसी अफवाह पर ध्यान न दें।- नीरज सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी

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