प्रयागराज: केस लिस्टिंग के लिए हाईकोर्ट ने नोडल अधिकारी किए नियुक्त, नए विकसित सॉफ्टवेयर के जरिये करेंगे काम

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमों की लिस्टिंग का काम अब खुद संभाल लिया है। कॉजलिस्ट तैयार करने के लिए एक नया सॉफ्टवेयर कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीसीएमएस) 2 जनवरी 2024 से लागू किया गया है। उपरोक्त सॉफ्टवेयर के सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ ही अधिवक्ताओं को हो रही असुविधा से बचाने के लिए योगेश दूबे, संयुक्त निबंधक (न्यायिक) को नोडल अधिकारी के रूप में इसके लिए नामित किया गया है, जो कंप्यूटर सेंटर, स्टांप रिपोर्टिंग, फ्रेश फाइलिंग, लिस्टिंग अनुभाग और अन्य न्यायिक/गैर न्यायिक अनुभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कार्य करेंगे।

उक्त सॉफ्टवेयर में सुचारू परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार नोडल अधिकारी की सहायता करने के लिए अभिषेक शर्मा न्यायिक अधिकारी, दुर्गा प्रसाद जायसवाल अनुभाग अधिकारी, अभिषेक सिंह समीक्षा अधिकारी (तकनीकी) नियुक्त किए गए हैं। उपरोक्त अधिकारी सीसीएमएस हेल्प डेस्क का भी गठन करेंगे। हालांकि 5 दिन बाद भी लिस्टिंग की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने बार एसोसिएशन के अनुरोध पर किसी पक्ष की गैर मौजूदगी में एक पक्षीय प्रतिकूल आदेश (नो एडवर्स) पारित न किए जाने की स्वीकृति दी है। मालूम हो कि पहले तीन दिन की केस लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड की जाती थी। केस मैसेज मोबाइल फोन पर भेजा जाता था‌। केस स्टेटस पर भी केस पता किया जा सकता था। एडवोकेट रोल से भी देखा जा सकता था। अब यह सभी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। देर रात अपलोड होने वाली पूरी लिस्ट देखना अनिवार्य हो रहा है। ऐसे में अधिवक्ताओं को केस खारिज होने की आशंका विचलित कर रही है।

यहां तक कि जवाबी हलफनामा या अर्जियां भी दाखिल होने के बाद वेबसाइट पर अपलोड होने में समस्या हो रही है। नेशनल इनफार्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) से केस लिस्टिंग का काम छीनने का फैसला कॉज लिस्ट में आ रही शिकायतों और लेट-लतीफी के कारण लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम को नए साल में लागू कर दिया गया है। एनआईसी को लिस्टिंग का काम वर्ष 2017 से सौंपा गया था, लेकिन मुकदमों की लिस्टिंग को लेकर आए दिन समस्याएं हो रही थीं, इसे लेकर अधिवक्ताओं ने कई बार मुख्य न्यायाधीश को और बार एसोसिएशन में प्रत्यावेदन दिया। जानकारी के अनुसार कोर्ट के आदेशों का भी अनुपालन न करके एनआईसी कर्मचारी मुकदमों की लिस्टिंग करने में मनमानी करते थे। कई केस ऐसे भी सामने आए जो कोर्ट से निस्तारित या रद्द कर दिए गए थे, लेकिन उन्हें फिर से सूचीबद्ध कर दिया गया। कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच के आदेश दिए हैं। अब हाई कोर्ट के कर्मचारी लिस्टिंग का काम करेंगे।

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