अमेठी : डेढ़ वर्ष से मनरेगा के तहत हो रहा कोरांव तालाब का सौंदर्यीकरण, नहीं पकड़ रही रफ्तार
अब तक लगभग दो हजार श्रमिक कर चुके है काम, लक्ष्य के सापेक्ष एक चौथाई भी नहीं हुआ काम
अमेठी, अमृत विचार। पानी के संचयन को लेकर गांव में मनरेगा योजना के तहत तालाबों की साफ-सफाई और खुदाई का काम करवाया गया, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कागजों में आदर्श जलाशय बनाकर कार्य की पूर्ति कर दी गई, लेकिन तालाब की स्थिति सुधर नहीं सकी है। जल संचयन के लिए लाखों रुपये पानी की तरह खर्च किए गए, लेकिन स्थिति यह है कि तालाबों में एक बूंद भी पानी नहीं दिख रहा है।
विकास खंड बहादुरपुर की ग्राम पंचायत बोझी भूलामऊ के गांव पूरे भसई के बगल कोरांव तालाब का मनरेगा योजना के तहत पिछले डेढ़ वर्ष से सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। अब तक कोरांव तालाब के सौन्दर्यीकरण में लगभग दो हजार श्रमिक काम कर चुके है। लेकिन एक चौथाई भी काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस योजना के तहत तालाबों की खुदाई कर चारों ओर पौधरोपण कर इसकी स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रति तालाब लाखों रुपये खर्च कर दिए गए हैं। इसके बावजूद किसी भी जलाशय पर न तो एक पेड़ दिखाई दे रहा है और न ही तालाब में पानी दिख रहा है। बहादुरपुर विकास खंड में सौ से अधिक तालाबों का सौंदर्यीकरण करवाया गया, लेकिन एक भी तालाब योजना के अनुरूप खरे नहीं दिखाई दे रहे हैं।
यही हाल बोझी भूलामऊ के गांव ममहा और पूरे लाला के बीच बने तालाब का है, तालाब में जहां मनरेगा योजना के तहत तालाब की खुदाई तो करवाई गई, लेकिन इन जलाशयों में पानी नहीं दिखाई दिया। उल्टा जिम्मेदारों की मिली भगत से उस तालाब की मिट्टी जेसीबी लगाकर ट्रैक्टर ट्राली से मिट्टी जरूर बेंच ली गई। कहीं भी तालाब आदर्श नहीं दिख रहे हैं। मानक के अनुरूप न तो तालाबों की खुदाई कराई गई और न ही अन्य औपचारिकताएं भली भांति पूरी हुई। दूसरों की प्यास बुझाने के लिए खोदे गए तालाब हकीकत में खुद प्यासे दिख रहे हैं।
मनरेगा में भ्रष्टाचार का बोलबाला
नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों का कहा है कि मनरेगा के तहत बनवाए गए तालाबों की देखरेख प्रशासनिक स्तर पर सही ढंग से किया जाता तो यह तालाब बदहाल न होते। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। ग्राम प्रधान और अधिकारी मिलकर धन का बंदरबाट कर रहे हैं। नाम मात्र का काम करवाकर कार्य को पूर्ण दिखाकर दिखा कर पैसा निकाल लिया जाता है। एक ग्रामीण ने तो कहा कि तालाब की स्थिति सुधारने के लिए सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सिमटी हुई है। इस बात को अन्य ग्रामीण भी मानते हैं कि मनरेगा स्कीम प्रशासनिक उदासीनता के चलते जमीनी स्तर पर सिमट कर रह जा रही है और जिम्मेदार लोग गलत तरीके से इसका इस्तेमाल कर लाभ उठा रहे।
वर्जन-
कोरांव तालाब के सौंदर्यीकरण का काम डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुआ था, प्रधान की उदासीनता के चलते सौंदर्यीकरण का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है, श्रमिको की जितनी डिमांड है, उस पर प्रधान खरे नहीं उतर पा रहे है, अब तक करीब दो हजार श्रमिक काम कर चुके है।
-संजीव भास्कर अवर अभियंता
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