बरेली: शहर की सड़कें ही नहीं... ट्रैफिक पुलिस का सिस्टम भी जाम

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार।  शहर में लोगों को सिर्फ जाम दिखता है लेकिन इस जाम के पीछे कितनी लंबी कहानी है, ये ट्रैफिक पुलिस वाले ही बेहतर जानते हैं। लोग मानते हैं कि ट्रैफिक पुलिस कुछ नहीं करती, इसलिए जाम लगता है, लेकिन ऐसा नहीं है।

बहुत कुछ होता है, तब जाम लगता है। एक जाम पूरे सिस्टम में लगा हुआ है जिसमें एडीजी ट्रैफिक के निर्देश भी बरेली पहुंचने से पहले ही फंस जाते हैं। विभाग में जिले के अफसरों के बनाए ट्रांसफर-पोस्टिंग के रास्ते पर इन नियमों का कोई सिग्नल काम नहीं करता। मुख्यमंत्री के साथ प्रशासनिक अफसरों के आदेश पर भी बत्ती बुझी ही रहती है।

हाल ही में जिले में नए एसपी ट्रैफिक आए हैं लेकिन फिर भी शहर की अस्तव्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था को नए सिरे से संभालने की रणनीति के बजाय मंथन कुछ और विभागीय मुद्दों पर चल रहा है। तैनाती और ड्यूटी लगाने के लिए कर्मचारियों की ''क्षमता'' परखी जा रही है। इस परीक्षा में कामयाब हुए कई टीएसआई (ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर) को नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर टीआई यानी ट्रैफिक इंस्पेक्टर का चार्ज दे दिया गया है। नियम है कि टीएसआई की तैनाती भी विशेष प्रशिक्षण के बाद की जाएगी लेकिन इन तैनातियों में इसे भी नजरंदाज कर दिया गया है।

दिलचस्प यह है कि आठ जनवरी को ही एडीजी ट्रैफिक बीडी पॉल्सन की ओर से पत्र जारी कर इस तरह की तैनातियों पर नाराजगी जताई थी, यह भी साफ किया था कि टीएसआई समेत सभी पदों पर निदेशालय से ही तैनाती की जाएगी लेकिन बरेली में इस आदेश को भी नजर अंदाज कर दिया गया।

अफसरों की मेहरबानी हेड कांस्टेबल से सीधे इंस्पेक्टर, वह भी बिना ट्रेनिंग के
ट्रैफिक पुलिस में बतौर हेड कांस्टेबल तैनात केशव दत्त, नंद किशोर और बालेंद्र सिंह का कुछ समय पहले सब इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन हुआ था। विभागीय नियमों के मुताबिक टीएसआई को सीतापुर में एपीटीसी (प्रशिक्षण) कोर्स कराने के बाद यातायात निदेशालय के स्तर से नियुक्ति देने दी जाती है, लेकिन जिले के अफसरों ने तीनों को बगैर प्रशिक्षण के ही तैनाती दे दी, वह भी सीधे टीआई के पदों पर।

वैसे, प्रमोद सिंह, कलुआ खान, खिलेंदर सिंह, राजेंद्र पाल सिंह और दुष्यंत सिंह समेत पांच और हेड कांस्टेबल पदोन्नत होकर सब इंस्पेक्टर बने हैं और बगैर प्रशिक्षण के ही ट्रैफिक संभाल रहे हैं। इन सभी को पांच साल के लिए ट्रैफिक पुलिस में रहना था और सब इंस्पेक्टर बनने के बाद सिविल पुलिस में वापस भेजा जाना था लेकिन अफसरों की कृपा से यह भी नहीं हो पाया।

जिम्मेदारी के हिसाब से भी टीआई पर भारी अप्रशिक्षित टीएसआई
ट्रैफिक पुलिस के कुल चार जोन हैं। शहर में जाम और महत्वपूर्ण लोगों की बहुलता दोनों ही हिसाब से कोतवाली और प्रेमनगर का इलाका सबसे चुनौतीपूर्ण है लेकिन इस जोन का इंचार्ज केशव दत्त शर्मा को बनाया गया है जो हेड कांस्टेबल से पदोन्नत हुए अप्रशिक्षित टीएसआई हैं।

उन्हें इसके साथ इंटिग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर के काम संभालने भी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वीवीआईपी ड्यूटी, सेफ सिटी प्रोजेक्ट और ई चालान कोर्ट को भेजने जैसी कई और बड़ी जिम्मेदारियां उनके पास हैं। किला और सुभाषनगर का इलाका भी अप्रशिक्षित टीएसआई नंद किशोर के पास है।

इस जोन में जाम के लिहाज से चौपुला जैसा सबसे मुश्किल चौराहा है। साथ ही बदायूं रोड पर डग्गामार गाड़ियों और बसों के कई अवैध अड्डे भी हैं। ट्रैफिक पुलिस के एकमात्र इंस्पेक्टर थाना बारादरी और कैंट का इलाका है। कैंट में ट्रैफिक की कोई खास समस्या नहीं रहती। बारादरी इलाके में भी सिर्फ सेटेलाइट तिराहा और पीलीभीत रोड पर जाम लगता है।

चर्चा में रहते हैं ये कारनामे नहीं हटे अवैध स्टैंड
मुख्यमंत्री ने कई बार आदेश दिया कि कहीं भी डग्गामार गाड़ियों के अवैध स्टैंड न चलने दिए जाएं। आदेश जारी होने के बाद कुछ दिन तक अवैध स्टैंड चलाने वालों पर कार्रवाई का दिखावा किया गया लेकिन फिर जो स्टैंड जहां था, वहीं फिर शुरू हो गया। अब भी शहर की सबसे व्यस्त सड़कों पर जहां-तहां अवैध स्टैंड चल रहे हैं। डग्गामार गाड़ियों की भीड़ की वजह से जाम लगा रहता है।

शहर में देहात के टेंपो
आरटीए की बैठक में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और उनसे पहले कमिश्नर रहीं संयुक्ता समद्दार ने शहर में देहात परमिट के टेंपो न चलने देने का आदेश जारी किया। ई रिक्शा के लिए भी रूट निर्धारित कराए गए लेकिन इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस ने इस आदेश की अनदेखी कर दी। अवैध टेंपो और ई रिक्शा की भरमार ने शहर में ट्रैफिक व्यवस्था का सत्यानाश कर रखा है।

चकरोडों पर भी चालान
कुछ समय पहले ट्रैफिक पुलिस के जवान चालान काटने के लिए गांव-देहात तक जाने लगे थे। चकरोडों पर मोटर साइकिलों से गुजरते किसानों के भी चालान काटे गए तो विरोध शुरू हो गया। इसके अलावा शहर के बाहरी हिस्सों में भी ट्रैफिक पुलिस की टीमों का जमावड़ा रहता है। पूरा जोर चालान काटने पर रहता है। इस बीच वसूली करने के भी आरोप लगते हैं लेकिन अफसरों पर फर्क नहीं पड़ता।

ई चालान सिस्टम फेल
निवर्तमान एसपी ट्रैफिक राममोहन सिंह का यहां से ट्रांसफर होने से पहले ई चालान व्यवस्था को भी फेल कर देने का कारनामा पकड़ा गया था। एक समीक्षा में कमिश्नर ने पाया था कि आई ट्रिपल सी के सिस्टम से जो ई चालान कट रहे हैं, उनमें से पांच प्रतिशत भी ट्रैफिक पुलिस के स्तर पर आगे नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। तत्कालीन एसपी ट्रैफिक इस मनमानी पर कोई जवाब नहीं दे पाए थे।

ज्यादातर टीएसआई ने प्रशिक्षण का कोर्स किया हुआ है, कुछ ही टीएसआई अप्रशिक्षित हैं। जिले में अभी एक ही स्थाई टीआई की तैनाती है जिसकी वजह से टीएसआई को टीआई का चार्ज दिया गया है। पहले से यही व्यवस्था चली आ रही है। ट्रैफिक में फोर्स की भी कमी है।
- शिवराज, एसपी ट्रैफिक

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