बिजनौर: कार सेवकों की टोली में महिलाओं ने भी निभाई थी भागीदारी, जानिए चुनिया सैनी की जुवानी
नहटौर। राम मंदिर निर्माण को लेकर कार सेवकों की टोली में महिलाओं ने भी भागीदारी निभाई थी। नहटौर की 92 वर्षीय चुनिया सैनी कार सेवकों की टोली में शामिल होकर अयोध्या पहुंची थी। उस समय का अयोध्या का वाकया सुनाते हुए आज भी चुनिया सैनी की आंखे नम हो जाती है। लेकिन राम मंदिर का निर्माण पूरा होने पर आज वह खुश हैं और एक बार फिर से अयोध्या जाने की तमन्ना उनके मन में है।
नहटौर के मोहल्ला बागवान नकटा की रहने वाली 92 वर्षीय चुनिया सैनी ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए 1990 में कार सेवकों की टोली के रूप में जिले से काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया था। नहटौर से कार सेवकों की टोली में उन्होंने भी भाग लिया था। नहटौर से स्वर्गीय विश्वास मित्रा उनकी पत्नी शंकुतला देवी उनका 8 वर्षीय पुत्र चुनमुन के अलावा कई लोग शामिल हुए थे।
धामपुर से ट्रेन के द्वारा अयोध्या के लिए निकली थी। अयोध्या जाने के दौरान कार सेवकों की टोली लखनऊ में उतरी तो लखनऊ में उनके सिर पर एक पट्टी बांधी गई वह एक तरीके से कफन था। उस कफन को बांधकर वह मुश्किल अयोध्या पहुंची। अयोध्या में कई स्थानो पर पुलिस ने उन्हें रोका तो उनकी टोली बचते बचाते अयोध्या में पहुंचने के बाद उस जुलूस में शामिल हो गई। जो जुलूस राम मंदिर की ओर जा रहा था।
वह जुलूस में शामिल हुई और वह राम मंदिर तक पहुंची थी। भारी संख्या में पुलिस मौजूद थी और वह वहां से मुश्किल से निकलकर अयोध्या रेलवे स्टेशन तक पहुंची। अयोध्या का वाकया आज भी उनकी आंखों के सामने आ जाता है तो वह सिहर उठती हैं। अयोध्या से निकलने के लिए उन्हें टोली के साथ बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कई किलोमीटर तक भूखे प्यासे पैदल चलना पड़ा। कुछ गांव के लोगों ने उन्हें खाना खिलाकर मदद भी की। कई दिनों के बाद वह किसी तरह से अपने घर पहुंची। राम मंदिर निर्माण को लेकर कार सेवकों की मेहनत और बलिदान आज रंग लाई है। उन्हें खुशी है कि 500 सालों तक किया गया संघर्ष कामयाब हुआ और मंदिर निर्माण का सपना पूरा हुआ।अब मंदिर निर्माण पूरा हो गया है।वह एक बार फिर से अयोध्या जाकर राम मंदिर का दर्शन करेंगी।
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