अयोध्या: जब कुरमौली के जंगल में छिपे थे कारसेवक, बच्चे पहुंचाते थे भोजन
तब 14 साल के थे नेतृत्व करने वाले रविंद्र, वर्तमान में निजी बैंक में हैं वित्तीय सलाहकार
अयोध्या। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को केवल आठ दिवस शेष बचे हैं। ऐसे में मंदिर आन्दोलन की स्मृतियां पुन: स्मरण हो रहीं हैं। इन्हीं स्मृतियों में गोसाईगंज क्षेत्र का कुरमौली जंगल भी शामिल है जब वहां हजारों कारसेवक अयोध्या कूच करने के लिए छिपे हुए थे। उस समय बड़े तो सेवा भाव से जुटे ही थे बच्चों में भी गजब का एक जुनून था। बताते हैं कि कुछ बच्चे टोलियां बना कर कारसेवकों को छिपते - छिपाते भोजन सामग्री पहुंचाते थे। अब आज वही बड़े होकर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का पूजित अक्षत उल्लास के साथ घर-घर पहुंचा रहे हैं।

बच्चों की उस टोली के नायक रहे रविंद्र तिवारी वर्तमान में आईसीआईआई बैंक गाजियाबाद में वित्तीय सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। प्राण प्रतिष्ठा को अब गाजियाबाद में ही साथियों के साथ पूजित अक्षत वितरण कर रहे हैं। वह बताते हैं कि तब आयु करीब 14 वर्ष रही होगी।'अमृत विचार' से मोबाइल से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर से निकल कर कक्षा नौ में प्रवेश लिया था। तब मंदिर आन्दोलन चरम पर था और रोजाना गांव से सैकड़ों कारसेवकों का जत्था गुजरता था। तत्कालीन सरकार द्वारा सख्ती के कारण एक हजार से अधिक कारसेवकों का जत्था कुरमौली जंगल में छिपा था।
उम्र छोटी थी लेकिन राम मंदिर और कारसेवकों के प्रति आस्था कहीं बड़ी थी। उस दौरान छोटे बच्चों की टोलियां बना कर गन्ने के खेतों में लुकते हुए खाना, पानी और चना चबैना पहुंचाते थे। बोले 90 और 92 का दशक मंदिर निर्माण के लिए उन्माद का था तो 2023 और 2024 उल्लास एवं उत्सव का है। बताया 92 में जब ढांचा गिरा तो वह भी साथियों के साथ ढांचे की एक ईट सरयू में प्रवाहित कर आए थे।
साथियों के साथ पूजित अक्षत वितरण कर रहे रविंद्र
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के गाजियाबाद में ही रविंद्र तिवारी साथियों के साथ आजकल पूजित अक्षत वितरण कर रहे। उनके साथ सखा संतोष तिवारी, संजय महाजन, लव प्रकाश, विक्रांत सिंह, अंकित गुप्ता, नीरज शुक्ला, आशीष तिवारी आदि रोजाना प्रातः निकल पड़ते हैं और जय श्रीराम के उद्घघोष के साथ अक्षत वितरण करते हैं। बताया प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्शन के लिए अयोध्या जाएंगे।

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