69000 शिक्षक भर्ती: नहीं मिला नियुक्ति पत्र,आरक्षित वर्ग अभ्यर्थियों में आक्रोश, 580 दिन से धरने पर, 21 दिन से कर रहे क्रमिक भूख हड़ताल - Video
वीरेंद्र पांडेय / लखनऊ, अमृत विचार। 69000 शिक्षक भर्ती के तहत चयनित 6800 आरक्षित वर्ग के शिक्षक अभ्यर्थियों में नियुक्ति की मांग को लेकर आक्रोश है। यह अभ्यर्थी पिछले 580 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बार अभ्यर्थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित तमाम केंद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों के आवास का घेराव कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। नाराज अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक न्याय और नियुक्ति नहीं मिल जाती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा की 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण लागू करने में घोर अनियमितता बरती गई जिस कारण आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी से वंचित कर दिया गया। इस संबंध में कई बार आंदोलन के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया और विसंगति दूर करते हुए पीड़ित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश अधिकारियों को दिया था, जिसके आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विसंगति को सुधारने के उपरांत 6800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का वादा करते हुए एक सूची जारी की लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिल सका। हमारी मांग है की सरकार इस मामले का त्वरित समाधान निकाले और सभी 6800 चयनित पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों का हक अधिकार देते हुए उनकी नियुक्ति करें।
वर्ष 2018 में आयी थी भर्ती
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 69000 शिक्षक भर्ती का आयोजन वर्ष 2018 में किया गया। जिसकी परीक्षा के बाद 21 मई 2020 को भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया गया, बाद में 31 मई 2020 को 67867 अभ्यर्थियों की एक चयन सूची विभाग द्वारा प्रकाशित की गई। जिसमें आरक्षित वर्ग (दिव्यांग, दलित एवं पिछड़े) के अभ्यर्थियों ने पाया कि उनको मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया गया है। इसको लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा के अधिकारियों, तत्कालीन शिक्षा मंत्री, भाजपा संगठन एवं सरकार के तमाम वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपनी पीड़ा रखी लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट
आरक्षण से वंचित अभ्यर्थियों ने न्याय पाने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग में अपनी याचिका दाखिल की जिसमें लगभग 01 वर्ष तक सुनवाई के पश्चात राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 अप्रैल 2021 को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को दी जिसमें यह स्पष्ट किया कि 69000 शिक्षक भर्ती में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं मिला है। किन्तु बेसिक शिक्षा विभाग ने आयोग की रिपोर्ट को मानने से इन्कार कर दिया।

22 जून, 2021 में भी हुआ था धरना
22 जून, 2021 से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आयोग की, रिपोर्ट लागू कराने के लिए अनवरत धरना प्रदर्शन शुरू किया। 6 सितम्बर 2021 को हजारो की संख्या में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी, उनके अभिभावक लोग ईको गार्डन लखनऊ में एकत्र हुए और धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाई।
राजस्व परिषद के चेयरमैन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन
7 सितम्बर, 2021 को मुख्यमंत्री ने राजस्व परिषद के चेयरमैन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। तीन माह तक गहन अध्ययन के बाद जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को उपलब्ध करायी। जांच समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि 69000 शिक्षक भर्ती में दलित, पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया गया है। 23 सितम्बर, 2021 को मुख्यमंत्री ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मण्डल से मुलाकात की और बेसिक शिक्षा के अधिकारियों को आदेश दिया कि शीघ्र ही आरक्षण से वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाये। 24 सितम्बर 2021 को तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्रेस कान्फ्रेंस में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि आरक्षण से वंचित अभ्यर्थियों को 06 जनवरी 2022 को नियुक्ति पत्र वितरित किया जाएगा।
5 जनवरी 2022 को 6800 की आयी थी लिस्ट
05 जनवरी 2022 को 6800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की एक सूची बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गयी। 8 जनवरी, 2022 को विधानसभा चुनाव आचार संहिता लग जाने के कारण भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ चुनाव आयोग से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति भी प्राप्त कर ली।इसी बीच कुछ अभ्यर्थियों ने 6800 चयन सूची के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। जिस पर हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
हाई कोर्ट का फैसला
एक वर्ष से अधिक समय तक हाईकोर्ट में 69000 शिक्षक भर्ती के मामले की सुनवाई हुई और 13 मार्च 2023 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि विभाग द्वारा जारी 6800 चयन सूची को रद्द किया जाता है और अधिकारियों को आदेश दिया जाता है कि पूरी सूची यानी की 69000 की सूची को फिर से रिव्यू करने का आदेश दिया लेकिन अधिकारीयों ने यह भी नहीं किया।
पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर
5 जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की सूची आई थी तब से नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी आंदोलनरत हैं। लेकिन कभी भी किसी तरह के अपशब्द व कानून के दायरे को तोड़ने का प्रयास नहीं किया। अभ्यर्थी आए दिन किसी नेता या मंत्री के यहां पैदल चलकर जाते हैं और अपना निवेदन शालीनता से रखते हैं। अब उनका का कहना है कि यदि सरकार उनकी बातों पर ध्यान नहीं देती है उग्र रुख अख्तियार करेंगे।
इको गार्डन में बिताते है रात
शिक्षक बनने के सपने वैसे इन्हें सोने तो नहीं देते। इस कड़ाके की सर्द मौसम में यह अभ्यर्थी खुले आसमान के नीचे इको गार्डन में अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर यहाँ रहने को मजबूर हैं। दिनभर नेताओं के आवास का चक्कर लगाते हैं रात में खुले आसमान के नीचे सोते हैं, कुछ अभ्यर्थी हैं जो अपने परिचितों के यहां आश्रय लेते हैं या रैनबसेरे में चले जाते है।
आपस के सहयोग से बनाते हैं खाना, कभी-कभी एक टाइम ही मिलता है
सभी अभ्यर्थी आपस के सहयोग से यहां खाने की व्यवस्था करते हैं ज्यादातर खाने में तहरी ही बनता है कभी-कभी सब्जी और चावल बन जाता है। अमूमन दिन में खाना कम बनता है ऐसे में कुछ अभ्यर्थी एक ही टाइम खाना खा पाते हैं।
69000 शिक्षक भर्ती : आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों में आक्रोश, रात में बनाते हैं खाना-खाली पेट भी गुजारी रातें pic.twitter.com/PCdq1bejO4
— amrit vichar (@amritvicharlko) January 14, 2024
