Fatehpur News: सर्दी में दिल के मरीज दस फीसदी तक बढ़ गए... बेतहाशा सर्दी के चलते दिल के दौरे का खतरा बढ़ा
फतेहपुर में सर्दी में दिल के मरीज दस फीसदी तक बढ़ गए।
फतेहपुर में सर्दी में दिल के मरीज दस फीसदी तक बढ़ गए। बेतहाशा सर्दी के चलते दिल के दौरे का खतरा बढ़ा।हेल्दी डाइट व योगा प्राणायाम पर विशेषज्ञ अधिक जोर दे रहे।
फतेहपुर, अमृत विचार। ठंड बढ़ते ही दिल के दौरे का खतरा बढ़ गया है। ऐसे संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ गई है। चिकित्सक डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों के रोगियों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की संख्या दस फीसदी तक बढ़ गई है।
हदय रोग विशेषज्ञ ने बताया कि सर्दी के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। जिसकी वजह से दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। कोरोनरी हार्ट डिसीज़ के कारण एनजाइना या सीने में होने वाला दर्द भी सर्दियों में बढ़ सकता है, खास तौर पर तब जब कोरोनरी आर्टरीज सर्दी में सिकुड़ जाती हैं।
ठंड में हमारा ह्रदय स्वस्थ शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करता है। सर्दियों की हवा इस काम को और ज्यादा मुश्किल बना सकती है। शरीर का तापमान 95 डिग्री से कम हो जाता है तो हाइपोथर्मिया के कारण हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
सर्दी से बचने के लिए क्या क्या करें
- ठंड से बचने के लिए आप स्वेटर, टोपी, दस्ताने और मोज़े पहनें
- शराब के अधिक सेवन से बचे. इसका सेवन करने बाद महसूस होने वाली गर्मी
- ठंड में बाहर निकलने पर नुकसानदायक साबित हो सकती है
- हाथ बार-बार धोएं। सांस में संक्रमण से दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ता है
- दिल की बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।
अपने दिल का ऐसे रखें ख्याल
- हार्ट हेल्दी डाइट लें यानी ज्यादा तेल-मसालों के सेवन से बचें
- नियमित व्यायाम करें
- अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच कराएं
- तनाव को कम करने की कोशिश करें, योग और मेडिटेशन करें
- फुल बॉडी चेकअप कराते रहें
दिल के दौरे के लक्षण
- सीने में तेज दर्द दिल के दौरे का सबसे आम चेतावनी संकेत है
- उलटी होना और चक्कर आना
- सांस लेने में कठिनाई होना
- जबड़े, पीठ, गर्दन या कंधों में दर्द
- सुन्नता या झुनझुनी,पसीना आना
इस कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए हेल्दी डाइट लेते रहें। तेल मसालों से बचें। नियमित व्यायाम व जांच कराएं। योग व मेडिटेशन पर खास ध्यान दें।- डा. राजीव तिवारी, हदय रोग विशेषज्ञ
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