अपर मुख्य सचिव का आदेश नहीं मान रहे डीआईओएस, भुखमरी के कगार पर तदर्थ शिक्षक, अब रोजगार का भी सकंट
अमृत विचार लखनऊ। यूपी में सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में तैनात रहे करीब 2200 शिक्षकों के आगे भरण पोषण का का संकट खड़ा हो गया है। इन शिक्षकों प्रदेश सरकार विनियमितीकरण पहले ही निरस्त कर चुकी है अब जो पूर्व में कार्य का बकाया वेतन है वह भी जिलों में बैठे जिला विद्यालय निरीक्षकों की मनमानी के चलते नहीं जारी हो पा रहा है। काफी संख्या में शिक्षक अब भुखमरी के कगार पर हैं कई शिक्षक प्रावइेट शिक्षण कार्य कर महज चार से आठ हजार रुपये में अपना काम चला रहे हैं।
जबकि इसी साल 2023 में 9 नवंबर को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक ने पत्र जारी कर सभी तदर्थ शिक्षकों का बकाया वेतन भुगतान करने का स्पष्ट रूप से आदेश दिया है लेकिन अभी तक जनपद लखनऊ बहराइच और जौनपुर सहित कई जिलों के डीआईओएस की मनमानी जारी है। बता दें कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त तदर्थ शिक्षकों ने याचिकाएं दाखिल कर प्रदेश सरकार द्वारा नौ नवंबर 2023 के शासनादेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी थी लेकिन आदेश शिक्षकों पक्ष में नहीं आया। दरअसल सरकार ने माना है कि तदर्थ शिक्षकों को धारा 33 जी के तहत विनीयमितीकरण नहीं किया जा सकता है, और उनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया।
मानसिक रूप से भी परेशान हो रहे शिक्षक
इस बारे में जानकारी देते हुए माध्यमिक तदर्थ शिक्षक संघर्ष समित के प्रदेश अध्यक्ष राजमणि ने बताया कि डीआईओएस तदर्थ शिक्षकों का वेतन नहीं निर्गत कर रहे हैं जिस की तदर्थ शिक्षक बहुत मानसिक रूप से परेशान हो रहा है और गंभीर बीमारियों से परेशान अपने मां-बाप की दवाइयां और बच्चों की फीस और परिवार की परवरिश ठीक से नहीं कर पा रहे हैं ऐसी स्थिति में भी लखनऊ बहराइच कर जौनपुर के डीआईओएस हमारे तदर्थ शिक्षकों को लगातार परेशान कर रहे हैं और वेतन निर्गत करने में हिलावली कर रहे हैं।
किसी शिक्षक के साथ कोई घटना हुई तो डीआईओएस होंगे जिम्मेदार
माध्यमिक तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज तदर्थ शिक्षक जिस दौर से गुज रहा है इस स्थिति में अगर कोई बात हो गई तो संपूर्ण जिम्मेदारी विभिन्न जनपदों के डीआईओएस की होगी। उन्होंने कहा कि डीआईओएस इसलिए वेतन नहीं निर्गत कर रहे हैं की इनको बेचारे तदर्थ शिक्षकों से सभी लोग सुविधा शुल्क चाह रहे है जबकि सभी तदर्थ भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके फिर भी सुविधा शुल्क चाह रहे है जब तक सुविधा शुल्क नही देगे शिक्षक साथी तब तक यह वेतन निर्गत करने को तैयार नहीं है जबकि इस आदेश के क्रम में लगभग दर्जनों जनपदों के इतिहास ने उन जनपदों में नियुक्त पदार्थ शिक्षकों का वेतन जारी कर दिया है आखिर इस पत्र के माध्यम से और जनपदों में वेतन जारी हो गया तो इन तीनों जनपदों में क्यों नहीं वेतन जारी किया जा रहा है।
उच्च अधिकारियों से दखल देने की मांग
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक दीपक कुमार, निदेशक डा. महेंद्र देव, एडी माध्यमिक सुरेंद्र तिवारी, जी से यह मांग की है कि तत्काल तदर्थ शिक्षकों का वेतन दिलाने की मांग गई है। वेतन न मिलने से कई शिक्षक गंभीर बीमारियों से ग्रस्त और चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुके हैं राजमणि सिंह ने मुख्यमंत्री योगी से मांग की है कि जनपदों में डीआईओएस के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और इसकी जांच कराई जाए कि यह वेतन अभी तक क्यों नहीं दिए जब एसीएस का पत्र जारी हुए 2 महीने हो गए और सब जनपदों में उसी पत्र के आधार पर महीनो पहले वेतन जारी हो गया है।
