अयोध्या: राम के नाम लुटा गए प्राण, ये उनकी प्राण प्रतिष्ठा है..., रामोत्सव में बही कविता की बयार
अयोध्या, अमृत विचार। अयोध्या धाम बस अड्डा स्थित श्रीराम सांस्कृतिक संकुल मंच पर रामोत्सव के तहत बुधवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन राम आराधना का आयोजन किया गया। सर्वेश अस्थाना के संचालन में डॉ. सोनरूपा विशाल की सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुए कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. शिव ओम अंबर ने की। गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने- स्वागत है प्रभु राम... सुनाकर प्रभु के आगमन का दृश्य जीवंत कर दिया।
बस्ती से आए गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने- सद्गुणों राम बनकर विराजो यहाँ, अब हृदय हर किसी का अवधपुर बने...सुनाकर माहौल को राममय बना दिया। बदायूं से आई कवयित्री डॉ. सोनरूपा विशाल ने सुनाया- मानस की ध्वनि कण- कण में गुंजित हैं, क्षिति जल धरा सभी आनंदित है, स्वागत है श्री राम, स्वागत है श्री राम...।
बुलंदशहर से आए ओजस्वी कवि डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने सुनाया- सौगंध राम की खाई थी लो पूरा वचन निभाया है, जन्मभूमि जो राघव की है मंदिर वहीं बनाया है। जबलपुर से आए कवि सुदीप भोला ने- समय की कड़ी कसौटी पर खरी उतरी जो निष्ठा है, राम के नाम लुटा गए प्राण ये उनकी प्राण प्रतिष्ठा है.. सुनाकर तालियां बटोरी।
बाराबंकी के कवि गजेंद्र प्रियांशु ने अपनी पंक्तियों- सो गई है मुग़ली दुनिया अब जाग उठी जग में हिन्दुवानी, जा कह दो यदुवंश कुमार करें मथुरा में मेरी अगवानी.. सुनाकर श्रोताओं में उत्साह का संचार किया।अयोध्या के वरिष्ठ रचनाकार जमुना प्रसाद उपाध्याय ने- भरा तीर्थों से है यह देश अपना,अलग उसमें सबसे हमारी अयोध्या... सुनाकर अयोध्या की गरिमा का गुणगान किया।
मंच संचालक सर्वेश अस्थाना-राम मैं तुम पर कुछ नहीं कह पा रहा हूं ... सुनाकर कवि सम्मेलन को गंभीर बना दिया। छतरपुर से पधारे पद्मश्री अवध किशोर जड़िया ने बुंदेली बोली में राम स्तुति की पंक्तियाँ सुनाकर सभी के हृदय में भक्ति भावना का रस घोल दिया। बंदौ रज ओरछा महल की,उनके चरण कमल की....चरण रज वंदना सुनाकर पद्मश्री जड़िया ने सबका मन जीत लिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे डॉ. शिवओम अंबर ने अपने तेवर की पंक्तियां सुनाकर- राष्ट्र राम है,राम राष्ट्र हैं" का मूल मंत्र दिया। माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट करते हुए कवियों का स्वागत धारावाहिक रामायण में हनुमान की भूमिका निभाने वाले दारा सिंह के पुत्र बिंदु दारा सिंह, कथावाचक चंद्रांशु महाराज एवं संत कबीर एकेडमी के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने किया।
