बदायूं: राम मंदिर निर्माण की उम्मीद में जेल में बिताये थे 23 दिन, कार सेवकों को 22 जनवरी का बेसब्री से इंतजार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

ऋषि देव गंगवार, बिल्सी: 1990 के दशक का सितंबर अक्टूबर के वो महीना जब राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन चरम पर चल रहा था, इस आंदोलन के चलते उस समय की सरकार भारी परेशानी में थी। आंदोलन को कुचलने के लिये सरकार ने फैसला किया कि आरएसएस व उससे जुड़े सभी संगठनों के पदाधिकारियों को जेल में डाल देने से आंदोलन की हवा को रोका जा सकता है। इसी के चलते सभी ज़िलों की पुलिस को आदेश था जो मिले उसे जेलों में डाल दो।

76454

उस समय के दौर में बिल्सी नगर के मोहल्ला नम्बर 5 में दो परिवार संघ से जुड़े हुए थे, इन परिवारों पर संग़ठन के दायित्व भी हुआ करते थे। डॉ. मदन मुरारी लाल राठी का परिवार जो आरएसएस से जुड़ा हुआ था, उनके परिवार के एक बेटे विवेक राठी पर उस समय बजरंग दल के अध्यक्ष की जिम्मेदारी थी। वहीं दूसरा परिवार कन्हैया लाल माहेश्वरी का था। जिनके बेटे ओमबाबू माहेश्वरी पर मंडल महामंत्री भाजपा और आरएसएस का नगर व्यवस्था प्रमुख की जिम्मेदारी थी।

जब संघ से जुड़े पदाधिकारियों को जेल भेजने का आदेश पुलिस को मिला, तो बिल्सी पुलिस भी इन दो परिवारों के पीछे पड़ गई, दिन रात दबिश देकर गिरफ्तारी का दबाब बनना शुरू हुआ तो दोनों परिवार के लड़के भूमिगत होकर राममंदिर आंदोलन को धार देने में लगे रहे।

उधर इन परिवारों के लड़कों को गिरफ्तार करने के लिये पुलिस पर भारी दबाव था। जिसके चलते ओमबाबू माहेश्वरी को पहले गिरफ्तार कर लिया गया, इनको 23 दिन पीलीभीत जेल में रहना पड़ा। वहीं राठी परिवार से भी उनके बेटे मुकेश राठी को गिरफ़्तार कर लिया गया। उन्होंने भी 18 दिन पीलीभीत जेल में बिताये। उस समय इन सभी ने दीपावली भी जेल में ही मनाई थी।

जहां राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए नगर से मुकेश राठी व ओमबाबू माहेश्वरी जेल गए, बहीं इनके साथ पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेम स्वरूप पाठक, रामसेवक सिंह पटेल, अवनीश कुमार उर्फ पप्पू भैया भी पीलीभीत जेल में साथ रहे। उस समय जेल में भी प्रतिदिन शाखा लगती थी। पूरी जेल कारसेवकों से भरी हुई थी।

उस समय के आंदोलन से जुड़ी यादें ताज़ा करते हुए दोनों लोगों का कहना है कि उस समय एक ही नारा जो हर तरफ गूंजता था *सौगंध राम की खाते हैं मन्दिर वहीं वनायेगे। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है और 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा होकर मंदिर मे बिराजन होने के साथ ही हम सभी का 3 दशक पूर्व लिया गया संकल्प पूरा हो जाएगा। यह आंदोलन भी सफल हुआ । दोनों ने कहा कि हम लोग वास्तव में बहुत भाग्यशाली हैं जो अपनी आंखों से भगवान राम को अपने घर में देखेंगे।

यह भी पढ़ें- बदायूं: हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज के उर्स पर सजी महफिल ए जिक्र

संबंधित समाचार