उपेक्षित हिन्दू जन-मानस में उत्साह, प्रशंसा, गौरव एवं पुनर्जागरण का अनूठा भाव है : हरीश चन्द्र शुक्ल

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हरदोई, अमृत विचार। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की  इकाई की तरफ से डॉ नरेश चन्द्र शुक्ल के नघेटा रोड स्थित 'पारिजात भवन' पर रामोत्सव' श्रृंखला के अन्तर्गत प्रभु श्रीराम के निहितार्थ' विषय पर व्यापक विचार-विमर्श के साथ ही श्री रामोत्सव काव्याञ्जलि का बृहद आयोजन किया गया। विषय पर भावमय उदगार व्यक्त करते हुए, हरीश चन्द्र शुक्न ने कहा कि शताब्दियों से उपेक्षित हिन्दू जन-मानस में उत्साह, प्रशंसा, गौरव एवं पुनर्जागरण का अनूठा भाव है। 

डॉ नरेश चन्द्र शुक्ल ने राम-मन्दिर-निर्माण एवं प्राण-प्रतिष्ठा को "को हिन्दुओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं राजनीतिक उत्थान का मजबूत आधार- स्तम्भ बताया। गिरीश चन्द्र बाजपेयी ने श्रीराम के इस आयोजन को भारत के हिन्दू राष्ट्र बनने तथा समान नागरिक संहिता लागू होने की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। डॉ. शीला पाण्डेय ने कहा यह महान कार्य हिन्दू-धुरी पर अवलम्बित राजनीति एवं शासन व्यवस्था का नव-सूत्रपात होगा। 

डॉ. बह्मस्वररूप पाण्डेय ने कहा कि विरोधियों का सनातन धर्म-विरोधी प्रचार-प्रसार उन्हें अन राजनैतिक व सामाजिक दृष्टि से अत्यन्त घाटे का सौदा लगने लगा है। वस्तुतः सनातन धर्मक पुनरुत्थान का यह सुखद प्रारम्भ है। डॉ. ईश्वर चन्द वर्मा ने कहा कि मुगलों के आक्रमण, अंग्रेजी शासन के अत्याचार से उपजी हिन्दुओं की द्वितीयक मानसिकता से छुटकारा दिलाने की दिशा में यह एक मजबूत कदम है। काँग्रेस सरकारों की तुष्टीकरण नीति से उत्पन्न हिन्दुओं के आक्रोश का शमन होगा। श्रीराम पर कवि अभिनव दीक्षित की रचना- 'आज अयोध्या राम आगमन का जब हर्ष मनायेगी, कविता, तथा सुशील कुमार वर्मा की कविता - 'राम-नाम की आड़ ले किया पाप इक आध... बहुत सराही गयी।

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