बरेली: जेब ठंडी..! कड़ाके की सर्दी के बावजूद आधी भी नहीं हुई गर्म कपड़ों की सेल
कारोबारियों को 20 दिन पहले ही शुरू करनी पड़ी डिस्काउंट सेल, फिर भी दुकानों पर नहीं खींच पा रहे ग्राहक
महिपाल गंगवार/बरेली, अमृत विचार। मौसम विभाग का पैमाना तो कह रहा है कि सर्दी ने इस बार पिछले कई बरसों का रिकॉर्ड तोड़ दिया लेकिन शहर में गर्म कपड़ों के कारोबारियों को इस सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है कि इतनी सर्दी के बावजूद उनका कारोबार आधा ही क्यों रह गया। ज्यादातर कारोबारियों का दावा है कि पिछले बरसों की तुलना में इस बार गर्म कपड़ों की सेल 40 से 50 फीसदी ही हुई है। इस वजह से हर बार की तरह दिसंबर में उन्हें नया माल मंगाने तक की जरूरत नहीं पड़ी। उल्टे सीजन में 20 दिन पहले ही डिस्काउंट सेल शुरू कर देनी पड़ी।
बरेली में कड़ाके की सर्दी अब तक है। बर्फीली हवा की वजह से सड़क और फुटपाथ पर बेसहारा लोगों को रात में ही नहीं, दिन में भी अलाव की जरूरत पड़ रही है लेकिन फिर भी गर्म कपड़ों की दुकानों पर हर साल की तरह ग्राहक नहीं हैं। कारोबारियों के मुताबिक सर्दी का पूरा सीजन इस बार ग्राहकों का इंतजार करते गुजर गया। अब कुछ दिन बाद मौसम साफ होने का पूर्वानुमान उन्हें और डराने लगा है। कहने को सभी कारोबारी खरीदारी घटने को लेकर तमाम कयास लगा रहे हैं लेकिन कोई भी सही कारण बता पा रहा है। अलग-अलग तरह के कई कयासों में कारोबार के लिए एक अशुभ सा संकेत यह भी माना जा रहा है कि लोग अपनी क्षमता घटने से यथासंभव खरीदारी करने से बच रहे हैं।
कारोबारी दूसरा प्रमुख कारण सर्दी देर से शुरू होने को बता रहे हैं। उनका कहना है कि सीजन की शुरुआत में कोई खास सर्दी न होने से सेल न के बराबर हुई। दिसंबर के शुरुआती तीन सप्ताह लगभग ऐसे ही बीत गए। जनवरी में ठंड बढ़ने के बाद उम्मीद बंधी कि गर्म कपड़ों की मांग बढ़ेगी, लेकिन फिर भी ऐसा नहीं हुआ। कारोबारियों के मुताबिक मकर संक्रांति नजदीक आने पर मौसम बदलने के साथ स्टॉक डंप होने की आशंका पैदा होने लगी तो समय से पहले डिस्काउंट सेल शुरू हो गई। अब जैसा कि पूर्वानुमान है कि जल्द मौसम साफ होना शुरू हो जाएगा, ऐसा हुआ तो उनके लिए अपना पुराना स्टॉक निकालना भी मुश्किल पड़ जाएगा।
निम्न मध्यवर्ग की भीड़ से अटे रहने वाले मिशन मार्केट में भी सन्नाटा
सिविल लाइंस का मिशन मार्केट निम्न मध्यवर्ग के लोगों के लिए खरीदारी करने का सबसे प्रमुख बाजार है। इस मार्केट में अपेक्षाकृत सामान्य कीमत में गर्म शर्ट से लेकर स्वेटर,जैकेट और लोअर जैसे कपड़े मिल जाते हैं। अच्छी क्वालिटी और ब्रांडेड कपड़ों की भी रेंज मिल जाती है। इसी कारण हर साल सर्दियों में इस मार्केट में खरीदारों की सबसे ज्यादा भीड़ रहती है लेकिन इस बार यहां भी दुकानों में भी गिनेचुने ग्राहक नजर आ रहे हैं जिसकी वजह से इस मार्केट में भी सन्नाटा छाया हुआ है। दुकानदार कौशल अरोरा के मुताबिक इस बार ग्राहक ही नहीं आ रहे हैं। पिछले साल का सीजन काफी अच्छा रहा था मगर इस साल बुरी तरह पिट गया। मकर संक्रांति तक उनका करीब 70 प्रतिशत माल बिक जाता था लेकिन इस बार मुश्किल से 40 प्रतिशत स्टॉक की ही सेल हो पाई है।
पुराना स्टॉक ही नहीं निकाल पाए, नया मंगाने की नौबत नहीं आई, मार्केट में आया था करीब 20 करोड़ का स्टॉक
बरेली में गर्म कपड़ों के कारोबार से करीब डेढ़ हजार छोटे-बड़े कारोबारी जुड़े हैं। थोक कारोबारियों के मुताबिक हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने कलकत्ता, कानपुर लुधियाना और दिल्ली से अगस्त और सितंबर में स्टॉक मंगाना शुरू कर दिया था। मोटे अनुमान के मुताबिक बरेली के कारोबारियों ने 20 करोड़ से ज्यादा कीमत का स्टॉक मंगाया है। बड़े शोरूम पर तो करीब 50ृ-50 लाख तक का माल मंगाया गया लेकिन ग्राहकों के न आने से सभी की हालत पतली हो गई है।
कारोबारियों के मुताबिक सेल अच्छी होने पर वे लोग आमतौर पर दिसंबर में भी माल मंगाते हैं लेकिन इस बार पुराना स्टॉक ही पूरा नहीं निकाल पाए। कोतवाली रोड पर कपड़ा व्यापारी दर्शनलाल भाटिया के मुताबिक इस बार ठंड दिसंबर के अंत से शुरू हुई। पिछले साल नवंबर में ही शुरुआत हो गई थी। अनुमान है कि इसी वजह से लोग यह मानकर गर्म कपड़ों की खरीदारी से बच रहे हैं कि सर्दी अब थोड़े दिनों के लिए रह गई है। उन्होंने बताया कि सर्दी के सीजन में हर साल दो बार गर्म कपड़ों का ऑर्डर दिया जाता था लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं आई। उनके यहां भी इस बार बमुश्किल 50 प्रतिशत सेल हो पाई है।
फड़ और ठेले वाले भी मायूस
जिला अस्पताल रोड पर फड़ और ठेले लगाकर गर्म कपड़े बेचने वालों की हालत भी इतनी सर्दी के बावजूद खराब है। जिला अस्पताल के बराबर में फड़ लगाने वाले तौसीफ ने बताया कि इस कड़ाके की ठंड में जिस तरह से गर्म कपड़े बिकने चाहिए, वैसे नहीं बिक रहे हैं। उनका मानना है कि फड़ और ठेलों पर ज्यादातर मध्यम वर्ग की महिलाएं खरीदारी करती हैं, इस बार सुबह और शाम ज्यादा ठंड की वजह से वे घरों से नहीं निकल पा रही हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग का भी दिख रहा प्रभाव
कपड़ों के थोक कारोबारी राजू ने बताया कि पिछले दिनों शादियों का सीजन बंद चल रहा था। इसलिए कपड़ों की ग्राहकी पर फर्क पड़ा, अब कड़ाके की ठंड के बीच पिछले दिनों शादियों का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन इसमें ऑनलाइन शॉपिंग की वजह से भी खासा असर पड़ा है। ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर सेल और ऑफर्स ने दुकानदारों को खस्ताहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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