Kanpur News: GSVM मेडिकल कॉलेज में 21.17 करोड़ से बनेगा मानसिक रोग विभाग का भवन, पहली बार मिली इतनी बड़ी धनराशि
कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 21.17 करोड़ से मानसिक रोग विभाग का भवन बनेगा।
कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 21.17 करोड़ से मानसिक रोग विभाग का भवन बनेगा। पहली बार किसी मेडिकल कालेज को मानसिक रोगों के इलाज को इतनी बड़ी धनराशि।
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग का विस्तार और कायाकल्प होगा। आजादी के बाद पहली बार प्रदेश के किसी शासकीय मेडिकल कालेज को मानसिक रोगों का इलाज सुलभ कराने के लिए 21.17 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इस रकम से बालरोग विभाग के सामने खाली पड़ी जमीन पर बेसमेंट के साथ तीन मंजिला भवन बनाया जाएगा, जिसमें मानसिक रोगियों के इलाज के साथ पीजी और एमडी की पढ़ाई भी होगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध हैलट अस्पताल में मानसिक रोगियों के इलाज की सुविधा नगण्य जैसी है। वर्ष 2011 में मानसिक रोग विभाग तो खोला गया, लेकिन वार्ड या आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसे में मानसिक रोग विभाग सिर्फ ओपीडी के सहारे संचालित है। इसके चलते मानासिक रोगियों को अगर जनरल वार्ड में रखा जाता है तो अन्य मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
अभी मानसिक रोग विभाग में केवल एक प्रोफेसर व एक एसआर है, इनके हवाले ओपीडी और हैलट इमरजेंसी में औसतन रोज आने वाले सौ मरीजों की जिम्मेदारी रहती है। अब विभाग में छह फैकल्टी होंगी। पांच एसआर, 35 नर्स, दो साइक्रेट्रिक सोशल वर्कर, व्यवसायिक थेरेपिस्ट, रिकार्ड कीपर व स्टोर लिपिक होंगे।
तीन साल पहले भेजा गया था प्रस्ताव
मेडिकल कालेज ने वर्ष 2021 में 20 बेड का मानसिक रोग वार्ड और 10 बेड का आधुनिक नशा मुक्ति वार्ड तथा एमडी कोर्स शुरू कराए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब शासन ने विभाग के निर्माण के लिए 21.17 करोड़ रुपये स्वीकृत कर पहली किस्त के रूप में 5.29 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि सी एंड डीएस कंपनी को दो वर्ष में निर्माण कार्य पूरा करना है।
चार साल में बढ़े 14 प्रतिशत रोगी
भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रतिस्पर्धा व सोशल नेटवर्किंग के कारण लोगों की मनोदशा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन कारणों से तनाव, अवसाद, चिंता व अनिद्रा की समस्या बढ़ रही है। मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार 35 से 44 वर्ष के युवाओं में मानसिक रोगों का प्रतिशत वर्ष 2019 में 31 प्रतिशत था, जो वर्ष 2023 में 14 फीसदी से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गया है।
अत्याधुनिक इलाज के साथ मिलेगा परामर्श व थेरेपी भी
मानसिक रोग भवन में बाल एवं किशोरावस्था मानसिक क्लीनिक, वृद्धावस्था क्लीनिक, साइकोसेक्सुअल क्लीनिक, कीटमीन थेरेपी, बायो केमेस्ट्री लैब, लिथियम जांच, थीन लेयर क्रोमेटोग्राफी, साइकोलॉजिकल, आईक्यू और डिप्रेशन की जांच होगी। छात्र-छात्राओं के लिए कांफ्रेंस रूम, सेमिनार हाल ,कंसल्टेंट्स चेंबर्स, इमरजेंसी कक्ष, ईसीटी कक्ष, बायोफीडबैक कक्ष, म्यूजिक थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, रेक्रीएशनल थेरेपी की भी सुविधा होगी।
वर्ष 1954 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद अब मानसिक रोग विभाग का निर्माण किया जाएगा। इस विभाग का भवन बाल रोग अस्पताल के बगल में बनेगा। मानसिक रोग विभाग बनने से करीब 18 जिलों के रोगियों को लाभ मिलेगा।- प्रो.संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।
ये भी पढ़ें- Budget 2024: बजट से महंगाई घटे, रोजगार और बचत बढ़े तो बात बने, मध्यम वर्गीय लोगों को ये है आस
