केजीएमयू : पैथालॉजी विभाग के 111 वें स्थापना दिवस पर बोले डॉ.यूएस सिंह- टेली पैथालॉजी से हर जगह मिलेगी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में ह्युमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) लैब का ब्लू प्रिंट बनकर तैयार है। यह एक एडवांस टाइप की पैथालॉजी होगी। आने वाले समय में इस लैब की स्थापना की जानी है। केजीएमयू में इस लैब की स्थापना हो जाने से अंग प्रत्यारोपण के कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है। यह कहना है केजीएमयू में पैथालॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.यूएस सिंह का। वह बुधवार को पैथालॉजी विभाग के 111 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डिजिटल और टेली पैथालॉजी को चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी जरूरत बताया है। इससे दूर दराज के क्षेत्र में भी गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने की संभावना बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि अंग प्रत्यारोपण में ह्युमन ल्यूकोसाइट एंटीजन की अहम भूमिका होती है। लाल रक्त कणिकाओं में प्रतिरक्षा प्रणाली को बताती है। अंग प्रत्यारोपण की सफलता दर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक यह जांच आउटसोर्सिंग के तहत की जा रही है। इसके अलावा उन्होंने टेली पैथालॉजी और डिजिटल माइक्रोस्कोपी के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टेली पैथालॉजी चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव है। अब एक्स-रे फिल्म की जरूरत नहीं है, कंप्यूटर के जरिये अमेरिका में भी इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है। इसी तरह का कार्य डिजिटल माइक्रोस्कोपी भी है। जो टेली मेडिसिन के क्षेत्र में बड़ी क्रांति कही जाये तो गलत न होगी।

इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में पैथालॉजी विषय अति महत्वपूर्ण है। इसके बिना कोई इलाज होना संभव नहीं है। इतना ही नहीं बच्चे के जन्म के पहले से लेकर मृत्यु तक पैथालॉजी विषय की जरूरत पड़ती है। 

विश्व स्तरीय मानकों वाला विभाग

उन्होंने कहा कि पैथोलॉजी विभाग नवाचार, अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के मिशन के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर चिकित्सा समुदाय और समाज की सेवा करने की अपनी विरासत को जारी रखने के लिए तत्पर है।

इस अवसर पर मेदांता लैब की निदेशक डॉ. मधुमती गोयल ने "समय के चक्र में बदलाव की जरूरत है" विषय पर व्याख्यान दिया, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सटीक चिकित्सा का युग है और आणविक स्तर पर आधुनिक जांच के उपयोग को रोग निदान का एक एकीकृत पहलू बनाना चाहिए। आरएमएल पैथोलॉजी की सीईओ और निदेशक डॉ. बंदना मेहरोत्रा ​​ने डिजिटल पैथोलॉजी के वर्तमान परिप्रेक्ष्य और भविष्य की भूमिका पर चर्चा की। 

इस अवसर पर केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. वाहिद अली ने बताया कि क्लिनिकल पैथालॉजी के क्षेत्र में विभाग बेहतर कार्य कर रहा है। इसी के तहत सरोजनी नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्लिनिकल पैथालॉजी की शुरूआत की गई थी। जिसके बेहतर परिणाम मिले हैं। इसी तरह की और सेंटर खुलने चाहिए। जिससे लोगों को गुणवत्तापूर्ण जांच की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। इस अवसर पर डॉ. मिली जैन, डॉ. चंचल राणा समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे।

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