बरेली: फरीदपुर कांड... शार्ट सर्किट के बाद अब अलाव के भी कमरे में नहीं मिले साक्ष्य
बरेली/ फरीदपुर, अमृत विचार। फरीदपुर के फर्रखपुर मोहल्ले में कमरे में आग से जलकर पांच लोगों की मौत के मामले में अब तक जो भी साक्ष्य मिले हैं, वह हादसा नहीं बल्कि हत्या की ओर ही इशारा कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि कमरे में अलाव जलने वाला कोई भी सामान नहीं मिला है। शार्ट सर्किट की बात विद्युत सुरक्षा टीम भी नकार चुकी है। हालांकि पांचवे दिन फायर विभाग की टीम ने दोबारा कमरे में जाकर जांच की।
फर्रखपुर मोहल्ले में अजय गुप्ता, उनकी पत्नी अनीता गुप्ता, दो बेटों और एक बेटी समेत पांच लोगों की 28 जनवरी को एक कमरे में जलकर मौत हो गई थी। इस घटना को पुलिस शुरू से ही हादसा बता रही है। हादसा की वजह बताने के लिए पुलिस के पास मात्र एक ही तर्क है कि कमरे में अंदर से बंद करने के लिए न तो कुंडी थी और न ही सिटकनी, इसलिए बाहर अजय या अनीता कमरे में बाहर से ताला डालकर सो जाते होंगे, जबकि अब तक मिले सभी साक्ष्य हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं।
बिजली विभाग की टीम ने शार्ट सर्किट से आग लगने की बात को नकार दिया है। टीम को मौके पर शार्ट सर्किट जैसा कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं अग्निशमन विभाग की टीम भी अब तक घटना स्थल पर आग लगने का कारण पता नहीं कर सकी है। घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले राजेन्द्र गुप्ता के अनुसार कमरे में अलाव के लिए न तो तसला था या न ही अंगीठी। पुलिस को भी अलाव जलने का कोई सुबूत नहीं मिला है।
दोबारा फायर टीम ने गहनता से की जांच
जांच के लिए घटना के पांचवे दिन दोबारा अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने कमरे का क्षेत्रफल, दरवाजों की लंबाई, चौड़ाईं, समेत पूरे घर का क्षेत्रफल की माप ली। सीएफओ चंद्रमोहन शर्मा ने बताया कि अभी वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। गुरुवार को टीम ने घर का नक्शा और मकान, कमरे और दरवाजों व खिड़कियों की लंबाई चौड़ाई की नापजोख की है। उन्होंने बताया कि पांच दिन के अंदर वह जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप देंगे। बताया कि इतनी जल्दी कुछ भी कहना सही नहीं होगा।
एक घंटे तक उठता रहा धुंआ चुप रहा पड़ोसी
राजेन्द्र ने बताया कि अजय गुप्ता जिस मकान में रहते थे, उसके पड़ोस में गुड्डूलाल का मकान है। अजय के मकान का दरवाजा न खुलने पर जब वह गुड्डू लाल के मकान में गए तो गुड्डू लाल की पत्नी ने उनसे कहा कि घर से करीब एक घंटे से धुंआ उठ रहा है।
डॉक्टरों ने भी मान लिया हादसा, सुरक्षित नहीं किया विसरा
पुलिस की जांच के आधार पर ही डॉक्टरों ने भी घटना को हादसा मान लिया और मृतकों का विसरा सुरक्षित नहीं किया। लोगों का कहना है कि हो सकता है कि घटना से पहले मृतकों को खाने में कुछ दे दिया गया हो। बेहोश होने के बाद कमरे में आग लगा दी गई हो, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मृतकों के पेट से कोई ऐसा तथ्य नहीं मिला, जिससे वे विसरा सुरक्षित करते।
प्रमाणित कर सकते हैं कि शार्ट सर्किट से नहीं लगी आग
विद्युत सुरक्षा अधिकारी एके चौधरी ने बताया कि घटना स्थल का मुआयना करने पर पता चला कि हादसा शार्ट सर्किट से नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि जब शार्ट सर्किट से आग लगती है तो तार चिपक जाते हैं और बेकार हो जाते हैं, जबकि बाहर से आग लगने पर प्लास्टिक पिघल जाती है। जांच में शार्ट सर्किट जैसे कोई निशान नहीं मिले। कमरे में कोई ब्लोअर भी नहीं मिला।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिजली विभाग ने तारों की जांच की है, जबकि अन्य बिजली उपकरणों की जांच नहीं की है। एके चौधरी ने बताया कि वह प्रमाणित कर सकते हैं कि किसी यंत्र या बिजली लाइन में शार्ट सर्किट नहीं हुआ है। कमरे के बाहर किसी तरह से ताला नहीं लगाया जा सकता है।
कई लोगों से की पूछताछ
फरीदपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को फर्रखपुर मोहल्ले में कई लोगों से पूछताछ की, हालांकि पुलिस को अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इंस्पेक्टर रामसेवक ने बताया कि वह संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। पता कर रहे हैं कि अजय के घर पर उनके साथ के कौन कौन लोग आते थे। जो लोग आते जाते थे, उनसे भी पूछताछ की जाएगी। उन्हें अब तक अनीता का नंबर नहीं मिला है, जबकि राजेन्द्र और अजय के परिजनों के अनुसार दो महीने से अजय का एक नंबर अनीता अपने मोबाइल में चला रही थी।
लखनऊ की फॉरेंसिक टीम करेगी जांच
बरेली पुलिस ने जांच के लिए घटना स्थल के वीडियो, फोटो समेत अन्य साक्ष्य लखनऊ और गाजियाबाद फोरेंसिक टीम को भेज दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि साक्ष्यों के अलावा अन्य जानकारी जुटानी होगी तो लखनऊ या फिर गाजियाबाद से फॉरेंसिक टीम यहां पहुंचकर मामले की जांच कर सकती है।
हादसा किन कारणों से हुआ है इसकी जानकारी की जा रही है। अग्निशमन विभाग की टीम भी दोबारा जांच के लिए घटना स्थल पर पहुंची। बिजली विभाग की टीम ने तारों की जांच की है लेकिन यंत्रों की जांच नहीं की है। जो भी साक्ष्य मिले हैं उन्हें फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक टीम लखनऊ से घटना स्थल पर आ सकती है।-घुले सुशील चंद्रभान, एसएसपी
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