Special: कैंडी का विकल्प बनी रेवड़ी; पहुंची सात समंदर पार; शहर की कंपनी कर रही यूरोपीय देशों को निर्यात...
शहर से रेवड़ी का निर्यात यूरोप में किया जाएगा।
कभी रेवड़ी लखनऊ की शान हुआ करती थी, लेकिन अब चर्म उत्पादों के लिए जाने जाने वाले शहर कानपुर की रेवड़ी यूरोपीय देशों में लोगों का स्वाद बढ़ाएगी। यहां से बेल्जियस, फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों को रेवड़ी का निर्यात होगा।
कानपुर, राजीव त्रिवेदी। कभी रेवड़ी लखनऊ की शान हुआ करती थी, लेकिन अब चर्म उत्पादों के लिए जाने जाने वाले शहर कानपुर की रेवड़ी यूरोपीय देशों में लोगों का स्वाद बढ़ाएगी। यहां से बेल्जियस, फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों को रेवड़ी का निर्यात होगा। रेवड़ी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलने से शहर के उत्पादकों का मानना है कि जल्द ही शहर को मिठाई से जुड़े ऑर्डर भी मिल सकते हैं।
परंपरागत मिठाई में शुमार तिल से तैयार होने वाली शहर की रेवड़ी जल्दी ही चार देशों में अपने स्वाद का जलवा बिखेरेगी। निर्यातकों की माने तो तिल, चीनी और गुड़ से बनी रेवड़ी को सबसे ज्यादा बेल्जियम और फ्रांस में पसंद किया जा रहा है। हालांकि निर्यात में गुड़ की बनी रेवड़ी का हिस्सा लगभग 80 फीसदी है।
निर्यातकों के अनुसार पूरे साल इन देशों में रेवड़ी का निर्यात करने का करार हुआ है। ऑर्डर की मात्रा मांग के अनुसार और अधिक बढ़ सकती है। शहर से रेवड़ी का निर्यात शुरू करने वाले बडी ओवरसीज के निदेशक कमलदीप सिंह ने बताया कि यह पहला मौका है जब शहर से किसी मिठाई का निर्यात शुरू हुआ है।
पूरी तरह हाथ से उत्पादन 1.37 करोड़ का है ऑर्डर
बडी ओवरसीज को 1.37 करोड़ रुपये की रेवड़ी का ऑर्डर दो माह पहले मिला था। उत्पाद तैयार करके अब निर्यात किया जाना शुरू किया जा चुका है। शहर से जाने वाली रेवड़ी पूरी तरह हाथ से बनी हुई है। इसे बनाने में किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं हुआ है। मिठाई बनाने के काम में 60 महिला कामगारों का सहयोग लिया जा रहा है।
कैंडी का बन रही विकल्प
निर्यातकों ने बताया कि विदेश में भारतीय मिठाइयों का क्रेज बढ़ने से रेवड़ी जैसी लंबे समय तक सुरिक्षत रहने वाली मिठाई का चलन बढ़ा है। रेवड़ी को कैंडी के विकल्प के रूप में लोग उपयोग कर रहे हैं। विदेशों में कोरोनाकाल के बाद लोग प्राकृतिक चीजों की ओर मुड़े हैं। टॉफी की जगह रेवड़ी भी इसी का स्वरूप है।
इस तरह रेवड़ी होती तैयार
गुड़ की रेवड़ी बनाने के लिए पहले गुड़ को भट्टी पर तेज आंच में पकाकर चासनी बनाई जाती है। इस दौरान उसमें घी भी मिलाया जाता है। चासनी को ठंडा करके खींचकर मथने का काम किया जाता है। चासनी को जितना मथा जाता है, रेवड़ी का स्वाद उतना ही बढ़ता है। ठंडी चासनी रबड़ की तरह खिंचती है।
इसके बाद रोल बनाकर छोटे-छोटे टुकड़े काटे जाते हैं। इन टुकड़ों को हल्की आंच में गरम तिलों में मिलाया जाता है। कढ़ाई के अंदर हल्की आंच पर गरम हो रहे तिलों के साथ गुड़ के इन छोटे-छोटे टुकड़ों को तब तक मिलाया जाता है जब तक पूरी तरह मिल नहीं जाएं।
