शाहजहांपुर: जिले में 9 हजार बिजली मीटर खराब, विभाग को लगी लाखों की चपत
शाहजहांपुर, अमृत विचार: जिले में नौ हजार बिजली रीडिंग मीटर खराब होने के चलते विभाग को लाखों रुपये की चपत लगी है। गड़बड़ी सामने आने पर मामले की जांच शुरू करा दी गई है। बिजली विभाग के इस गड़बड़झाले में कुछ अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। जबकि कुछ कर्मचारियों की लापरवाही मानी जा रही है। मीटरों की नियमित जांच न होने के चलते बिजली विभाग को राजस्व का नुकसान हुआ है।
बीते एक माह से बिजली विभाग में मीटरों को लेकर जांच चल रही थी। अब जांच के बाद खुलासा हुआ है कि लगभग नौ हजार मीटर वर्तमान में खराब हैं। यह मीटर देहात के साथ-साथ शहर के सीमावर्ती गांवों और शहर के कुछ हिस्सों में भी लगे हैं। इनमें ज्यादातर मीटर तीन साल से पुराने हैं। अब इनके खराब होने की जानकारी आई है। हालांकि अभी तक कई राज से पर्दा उठना बाकी है, लेकिन फिर भी कई स्तर पर बातें छनकर बाहर आने लगी हैं।
बताया जा रहा है कि बिजली विभाग में अधिकारियों की मनमानी हावी है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सब अपना हित साधने में लगे हैं। भले ही विभाग का नुकसान हो जाए। वर्तमान में लगभग नौ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर खराब हैं। इसके बाद भी वह बिजली का उपयोग मनमाने तरीके से कर रहे हैं। जिसका सीधे तौर पर विभाग के राजस्व पर असर पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता मीटर के निलंबन के बाद मीटर के नाम पर हो रहे खेल की परत
दर परत खुलना शुरू हो गई है। अधीक्षण अभियंता जेपी वर्मा ने सभी मीटर बदलने के लिए 29 फरवरी तक का अल्टीमेटम अधीनस्थों को दिया है। जिसके बाद कर्मचारियों में खलबली मच गई।
सरकार राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही हैं तो वहीं कुछ विभागीय अधिकारी हैं, जो निजी स्वार्थ के चलते उपभोक्ताओं की समस्या का निस्तारण करना तो दूर उन्हें विभाग का नुकसान करने का खुलेआम अवसर दे रहे हैं। मीटर रीडरों के बिलिंग के दौरान ऐसे एक-दो नहीं बल्कि नौ हजार से अधिक मामले सामने आ गए।
जिसमे अधिकांश उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके दो वर्ष पहले न मीटर खराब हो गए थे, लेकिन उन्हें बदलने के बजाय कर्मचारियों ने अपनी सुविधानुसार बिल जमा कराना शुरू कर दिया। जबकि उपभोक्ताओं ने मीटर बदलने के लिए संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को पत्र भी दिया, लेकिन उन्हें किसी न किसी माध्यम से समझा दिया गया।
जिन उपभोक्ताओं के बिल अधिक बताए गए तो उनके संशोधन के नाम पर उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। बरेली के मुख्य अभियंता की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद जब मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी तक मामला पहुंचा तो अधिशासी अभियंता पर कार्रवाई की गई। हालांकि ठीक से यदि जांच हो जाए तो अभी और खेल सामने आ सकते हैं।
बताया जाता है कि जो मीटर खराब मिले हैं उनमें सबसे ज्यादा बड़े बकायेदार शामिल हैं। जिनकी रीडिंग के बजाय माह के न्यूनतम बिल के आधार पर बकाया जमा करवा दिए गए। मामला जब अधीक्षण अभियंता तक पहुंचा तो उन्होंने गोपनीय जांच भी शुरू कर दी है। ऐसे में जल्द कई अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
दो अधिशासी अभियंता हो चुके हैं निलंबित
31 जनवरी को काम में लापरवाही के चलते दो अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया था। दरअसल बिजली विभाग का जिले में पौने छह अरब रुपया बकाया है, जिसमें से एकमुश्त समाधान योजना में 80 करोड़ रुपया ही जमा हुआ था। तिलहर खंड की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी।
यहां एक अरब से अधिक बकाया होने के बावजूद सिर्फ दस करोड़ रुपये ही जमा कराए जा सके थे। इसे लापरवाही मानते हुए यहां के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया था। मीटर विभाग के अधिशासी अभियंता कर्म सिंह पर भी कार्रवाई की गई थी। मीटर खराब होने व उन्हें बदलवाने में हो रही देरी की शिकायतें अधिक आ रही थीं, लेकिन निस्तारण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के कारण कर्म सिंह को निलंबित कर दिया गया।
जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगभग नौ हजार मीटर खराब हैं। कार्रवाई चल रही है। जिम्मेदारी तय की जा रही है--- जेपी वर्मा, अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग।
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