बरेली: ... तो क्या तौकीर रजा खां ने फिर छोड़ा मजहब की कमान से सियासत का तीर

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Published By Om Parkash chaubey
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मोनिस खान, बरेली, अमृत विचार : इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां की सियासत एक जमाना पहले मजहबी जमीन पर शुरू हुई थी और कई उतार-चढ़ाव के बाद भी अब तक जहां की तहां टिकी हुई है। चुनावों से पहले मजहब की कमान से सियासत के तीर चलाना भी उनकी सियासत में पुराना सिलसिला हो चुका है। ज्ञानवापी के मुद्दे पर मुसलमानों के साथ सामूहिक गिरफ्तारी देने के उनके एलान को भी उनकी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मौलाना की राजनीति भाजपा से भी मेल खाती रही है। चुनावी मौकों पर उनके ज्यादातर विरोध प्रदर्शन उन्हीं मुद्दों पर होते रहे हैं जो भाजपा अपने चुनाव मैदान में लांच करती रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से ठीक पहले हरिद्वार में हुई धर्म संसद के खिलाफ भी मौलाना तौकीर ने भीड़ जुटाई थी। इसके बाद चुनाव में कांग्रेस से उन्होंने हाथ भी मिलाया था। इससे पहले भी चुनावी मौकों पर मौलाना की ओर से शक्ति प्रदर्शन किया जाता रहा है।

अब लोकसभा चुनाव से पहले ज्ञानवापी में पूजा की अनुमति देने के विरोध में मुद्दे पर भीड़ जुटाने की तैयारी है। हालांकि मौलाना तौकीर ने अभी लोकसभा चुनाव के बारे में कोई एलान नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि हमेशा की तरह चुनाव से पहले वह अपनी ताकत का एहसास प्रमुख राजनीतिक दलों को कराना चाहते हैं।

मौलाना या उनकी पार्टी का कोई पदाधिकारी लोकसभा चुनाव के बारे में अभी कुछ बोलने को भी तैयार नहीं है। आईएमसी मीडिया प्रभारी मुनीर इदरीसी का कहना है कि लोकसभा चुनाव पर अभी कोई रणनीति तैयार नहीं की गई है। पार्टी का पूरा फोकस शुक्रवार को होने वाले कार्यक्रम पर है। यह कार्यक्रम किसी भी तरह की राजनीति से प्रेरित नहीं है।

भाजपा भी कर सकती है मुस्लिम वोटों पर दावेदारी: पिछले साल हुए निकाय चुनाव के दौरान ही कुछ हद तक भाजपा साफ कर दिया था कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों पर वह भी दावेदारी करेगी। पूरे प्रदेश में निकाय चुनाव के दौरान पहली बार भाजपा ने बड़ी संख्या में 395 मुसलमानों को टिकट दिए थे।

बरेली में भी 2017 के निकाय चुनाव की तुलना में दुगनी संख्या में मुसलमानों को टिकट दिए गए थे। रविवार को ही ज्ञानवापी के मुद्दे पर मौलाना का बयान अखबारों में छपने से पहले ही जिस तरह भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया जताई गई, उसका इशारा भी इसी तरफ है।

कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा नहीं रहा तौकीर से हाथ मिलाना: विधानसभा चुनाव 2022 से पहले हरिद्वार धर्म संसद के मुद्दे पर सक्रिय होने के बाद मौलाना तौकीर रजा खां ने कांग्रेस से हाथ मिलाया था लेकिन कांग्रेस को इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

मौलाना ने जोरशोर से कांग्रेस के लिए प्रचार किया लेकिन पोलिंग बूथों पर इसका कोई असर नहीं दिखा। जिले की सभी नौ सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव हारे और उन्हें कुल मिलाकर 21259 वोट ही मिल पाए।

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