कानपुर हादसा: अभिभावकों मे रोष, बोले- वैन स्कूल में हो बैन, तीन सदस्यीय पैनल करेगा जांच
कानपुर में अरौल में हुए हादसे की तीन सदस्यीय पैनल करेगा हादसे की जांच
कानपुर में अरौल में हुए हादसे की तीन सदस्यीय पैनल हादसे की जांच करेगा। उधर, घटना को लेकर अभिभावओं में रोष व्यापत है।
कानपुर, अमृत विचार। अरौल हादसे के बाद जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह अन्य अधिकारियों के साथ हैलट अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी बिल्हौर रश्मि लांबा व परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल है।
इसके साथ ही विद्यालय में चल रहे अनबनों की जांच के लिए भी पैनल को निर्देश दिए गए हैं। यातायात व परिवहन विभाग को ग्रामीण इलाकों के स्कूली वाहनों की जांच के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मानक विहीन वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यदि स्कूली वाहनों की जांच की प्रक्रिया पहले कर ली गई होती तो शायद यह नौबत नहीं आती।
प्राचार्य व एसआईसी ने संभाली व्यवस्था
बिल्हौर में हुए हादसे की सूचना मिलते ही जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला व प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह हैलट इमरजेंसी पहुंचे। प्राचार्य और एसआईसी ने जूनियर डॉक्टरों व एसआर को हादसे की जानकारी देने के बाद इमरजेंसी में मौजूद कुछ मरीजों को दूसरे कक्ष में शिफ्ट कराया और बेड खाली कराये।
घायल बच्चे हैलट इमरजेंसी में आने पर प्राचार्य व एसआईसी ने उनका तत्काल इलाज शुरू कराया। इमरजेंसी में आए पांचों बच्चों को दोनों अधिकारियों ने देखा। सीएमओ डॉ आलोक रंजन व एसीएमओ डॉ आरपी मिश्रा ने भी बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। पोर्टेबल मशीन से बच्चों की जांच की गई। सीटी स्कैन आदि की जांच के लिए उनके साथ डॉक्टर भी भेजे गए।

अभिभावकों मे रोष, बोले वैन स्कूल में हो बैन
घटना के बाद सोशल मीडिया पर अभिभावकों में नाराजगी दिखी। स्कूल प्रबंध तंत्र व प्रशासन के विरुद्ध रोष जताया गया। लोगों का कहना है कि ज्यादातर वैन ही स्कूलों मे संचालित हो रही हैं। जिनमें सुरक्षा और सुविधाएं शून्य हैं। सोशल मीडिया पर अभिभावकों ने स्कूल संचालकों को खरी खोटी सुनाई। कई अभिभावकों ने प्रशासन से उचित कदम उठाए जाने की मांग की है। उपजिलाधिकारी रश्मि लांबा ने बताया कि तहसील में अभियान चलाकर सभी विद्यालय के वाहनों की चेकिंग की जाएगी।
इससे पहले भी हुए हादसे
वर्ष 2017 में 28 फरवरी को कस्बे के मिंटो पब्लिक स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी है। हादसे में 26 बच्चे बाल-बाल बच गए थे। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी। मामले में स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध फिर भी एफआईआर दर्ज की गई थी लेकिन उसके बाद भी कभी जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने स्कूली वाहनों की चेकिंग करने की जरूरत नहीं उठाई।
कुछ दिन पहले एक स्कूली बस में आग लग गई थी। लगातार स्कूल प्रबंधनों की ओर से स्कूली वाहनों के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है लेकिन हर बार हादसे के बाद दिशा-निर्देश देकर संबंधित अधिकारी चुप बैठ जाते हैं। इन पर लगाम नहीं लगाई जा सकी।
वाहन चालकों के लिए ये है जरूरी :
-संबंधित श्रेणी के वाहन चलाने का पांच वर्ष का अनुभव हो।
-चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होना चाहिए।
-वाहन चालक नाम पट्टिका के साथ स्लेटी शर्ट व पैंट पहनेंगे।
बसों और वैन के लिए नियम :
-स्कूली वाहनों की डीजल चलित गाड़ियों की आयु सीमा दस वर्ष होगी।
-सीएनजी चलित वाहनों के लिए पंद्रह साल समय सीमा।
-स्कूल वाहन के लिए परमिट अनिवार्य ।
-गति सीमा निर्धारण के लिए वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाना जरूरी।
-लोकेशन ट्रैकिंग के लिए जीपीएस प्रणाली अनिवार्य।
-बसों में सीसीटीवी कैमरा होना जरूरी।
-वाहनों में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एंड बॉक्स का होना जरूरी।
-बच्चों के बैग रखने के लिए रैक की व्यवस्था।
-स्कूली वाहन पीले रंग का होगा, बसों में बड़े पैराबालिक रियर व्यू दर्पण जिससे वाहन के अंदर का दृश्य स्पष्ट रूप से देख सकें, जरूरी है।
-सीएनजी वाहनों में सिलेंडर के ऊपर सीट का निर्माण नहीं होगा।
-स्कूली वाहन में बैठने की क्षमता एवं ले आउट में अतिरिक्त बदलाव की गुंजाइश नहीं।
-वाहनों में किसी भी तरह की अस्थाई व्यवस्था मान्य नहीं होगी।
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