Kanpur News: बदलते मौसम में चना फसल को कीट से बचाएं... CSA विश्वविद्यालय ने चेतावनी की जारी

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कानपुर में बदलते मौसम में चना फसल को कीट से बचाएं

कानपुर, अमृत विचार। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के विशेषज्ञों ने चने की फसल के लिए चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान के अचानक बढ़ने पर फली छेदक कीट के लगने की आशंका प्रबल हो जाती है। इस कीट के हमले से 50 से 60 फीसदी तक फसल को नुकसान पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों ने फसल में एनपीबी 250 एलई के छिड़काव की सलाह दी है। 

वैज्ञानिकों ने बताया कि कानपुर और उसके आस-पास के क्षेत्र में चने की फसल की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इनमें कानपुर नगर, अकबरपुर, जालौन, हमीरपुर, ललितपुर, महोबा, चित्रकूद व बांदा शामिल हैं। यदि पूरे प्रदेश की बात की जाए तो चने का क्षेत्रफल लगभग 627 हजार हेक्टेयर है। चने की फसल में कीट लगने से पैदावार लगभग आधी हो जाती है। 

इस फसल की बुआई अक्टूबर से नवंबर के बीच होती है। बुआई के दो महीने के बाद जब फसल में फल आने शुरू हो जाते हैं, मौसम में अचानक तापमान में अधिकता होने पर कीट लगने की आशंका तीस फीसदी बढ़ जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह कीड़ा इतनी तेजी से काम करता है कि पत्तियों के साथ फल को भी नष्ट कर देता है। इसलिए किसानों को इस कीट के असर से बचाव करना चाहिए। 

इस तरह करता है हमला

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि चने का फली छेदक कीट शुरुआत में पत्तियों को खाता है। इसके बाद फली लगने पर उसमें छेद कर दानों को खोखला कर देता है। इससे दाना नहीं बन पाता और फसल खराब हो जाती है। 

यह करें उपाय

डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि फसल के बचाव के लिए किसानों को फरवरी महीने में 5 से 6 फेरोमेन ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगा देना चाहिए। चना फसल में 50 फीसदी फूल आने पर एनपीबी 250 एलईएक मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। इसके 15 दिन बाद बीटी 750 मिली लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।  

50 फीसदी फूल आने पर 700 मिलीलीटर नीम का तेल प्रति हेक्टेयर घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 14.3 एससी एक मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर या इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। 

बड़े काम का है चना 

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि चना दलहनी फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें कैल्शियम, आयरन, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। शरीर में होने वाली रक्त की कमी, कब्ज, मधुमेह और पीलिया जैसे रोगों में चना बहुत असरदार साबित होता है।

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