Allahabad highcourt : सरकार कर वसूली मामले में मधुमक्खियों से लें प्रेरणा
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर चोरी के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा है कि सरकारों को कर इस तरह वसूलना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूल की पंखुड़ियों को छेड़े बिना उससे शहद इकट्ठा करती है। कर चोरी का इरादा उन मामलों में माना जा सकता है, जहां नियमों की पूरी तरह से अवहेलना हुई हो। सामान्य लिपिकीय त्रुटि को कर चोरी का आधार नहीं माना जा सकता है। तकनीकी त्रुटि के कारण याची पर कठोर जुर्माना लगाना नीति विरुद्ध है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति शेखर बी सर्राफ की पीठ ने मेजर्स हॉकिंस कुकर्स लिमिटेड की याचिका को स्वीकार कर आक्षेपित आदेशों को रद्द करते हुए किया। दरअसल याची प्रेशर कुकर के निर्माण और बिक्री के व्यवसाय में है। याची का मुख्य व्यावसायिक स्थान कानपुर है और फैक्ट्री जौनपुर में स्थित है।
सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि निर्माण के लिए जौनपुर स्थित कारखाने में कच्चे माल की आवश्यकता होती है, जिसके लिए कंपनी अलग-अलग स्थानों से स्टॉक खरीदती है। ऐसे ही एक स्टॉक के साथ संबंधित चालान, बिल्टी दस्तावेज और ई-वे बिल मौजूद थे। आठ ई-वे बिलों में से केवल चार में गलत पता होने के कारण विभाग द्वारा याची पर टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि कर चोरी का इरादा वर्तमान मामले में नहीं बनता है क्योंकि यहां नियमों की पूरी तरह से अवहेलना नहीं हुई है बल्कि केवल तकनीकी त्रुटि के कारण चार बिलों में गलत पता अंकित हो गया था। अतः इसे कर चोरी का मामला नहीं माना जा सकता है।
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