गोंडा: अवैध अतिक्रमण से कराह रही नवीन मंडी, सुविधाओं का टोटा, आवंटित दुकानों से अलग चल रहा कारोबार
निजी लाभ के लिए बाहरी लोगों से दुकानों का संचालन करा रहे मंडी कर्मचारी, सरकार को लगा रहे चूना
रमेश पांडेय/ करनैलगंज/गोंडा, अमृत विचार। करनैलगंज की संयुक्त अनाज, सब्जी व फल मंडी अवैध अतिक्रमण से कराह रही है। दुकानों का आवंटन कहीं है और व्यापार दुकान कहीं और चला रहे है। मंडी में सुविधाओं का भी टोटा है और पेयजल व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं है। आवंटी इन दुकानों को किराए पर देकर खुद पटरियों पर अतिक्रमण कर व्यापार कर रहे हैं। यह पूरा खेल मंडी के कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है और मंडी के अधिकारी सबकुछ जानकर भी अंजान बने हुए है।

करनैलगंज की मशहूर गल्ला एवं सब्जी की मंडी प्रशासन की लापरवाही पूर्ण नीतियों के चलते अवैध दुकानदारों के अतिक्रमण का शिकार बन गई है। इस मंडी में अनाज एवं लकड़ी के 77 लाइसेंस धारी हैं। जबकि सब्जी व फल के व्यापार के लिए 108 लेगों को लाइसेंस मिला हुआ है।
कुछ व्यापारियों को छोड़कर अधिकतर लाइसेंसधारक आवंटित दुकानों में व्यापार न करके सड़क व फड़ पर दुकान लगा रहे हैं। जिससे मंडी में आने वाले किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उधर मंडी में शुद्ध पेयजल, शौचालय सहित मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। मंडी कर्मियों द्वारा व्यापारियों से सिर्फ शुल्क वसूला जा रहा है। उन्हें कोई भी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही है।

आढ़ती बोले- सुविधा के नाम पर सिर्फ शोषण
सब्जी व फल के आढ़तियों का कहना है कि मंडी की हालत बेहद खराब है। यहां सुविधा के नाम पर कुछ नही है। केवल व्यापारियों का शोषण होता है। यहां व्यापार न करें तो व्यापारी कहाँ जाएं। लाइसेंसधारी व्यापारियों से दुकान का किराया वसूला जाता है। उन्हें कोई भी सुविधा नही दी जा रही है। करनैलगंज मंडी में फल एवं सब्जी के 108 लाइसेंस धारी हैं।
इनमें 100 से अधिक व्यापारी आवंटित दुकानों में व्यापार न करके चबूतरे पर या मंडी के मार्ग पर अपनी दुकान चला रहे हैं।अधिकांश व्यापारी इस तरह है जो मंडी में व्यापार कर ही नहीं रहे हैं। उनकी जगह पर अवैध दुकानदारों द्वारा अपना व्यापार संचालित किया जा रहा है। जिससे मंडी समिति को होने वाला सरकारी लाभ नहीं मिल रहा है। बल्कि निजी लाभ के लिए मंडी कर्मचारियों द्वारा उनकी दुकानों का संचालन कराया जा रहा है।

पांच वर्ष पहले मंडी में करीब दो दर्जन नई दुकानें बनाई गईं। जिसका आवंटन भी हो चुका है मगर व्यापारी उस दुकान में व्यापार न करके खाली पड़ी जमीन पर टट्टर व छप्पर, टीनशेड के नीचे दुकान चला रहे हैं जिससे मंडी में चौतरफा अवैध तरीके से अतिक्रमण फैला हुआ है।
नहीं उठता मंडी सचिव का फोन
अमृत विचार: मंडी परिसर में फैली गंदगी अव्यवस्थाओं सहित किसी भी जानकारी के लिए यदि मंडी सचिव मुकेश जायसवाल से संपर्क करने का प्रयास किया जाए तो उनका फोन कभी रिसीव नहीं होता है। किसानों व व्यापारियों की समस्याओं से उनका कोई भी वास्ता नहीं है।
जिन व्यापारियों को दुकानों का लाइसेंस दिया गया है उन्हे ही दुकान लगाने का अधिकार है।आवंटित दुकानों में अगर कोई बाहरी दुकान कर रहा है तो इसकी जांच करायी जायेगी.., विशाल कुमार, एसडीएम/ अध्यक्ष मंडी परिषद।
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