'एक्स-रे रेडिएशन से ना घबराएं, हो चुके हैं कई शोध, अमेरिकी विशेषज्ञ ने KGMU की कार्यशाला में बताई बड़े काम की बात!

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KGMU में 'MRI और सीटी स्कैन में नई सीमाओं की खोज' कार्यशाला का हुआ आयोजन

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम महेश ने आनलाइन दी अहम सलाह

लखनऊ, अमृत विचार। एक्स-रे करते समय रेडिएशन को लेकर घबराना नहीं चाहिए। इसको लेकर शोध हो चुके हैं। जिसमें पेल्विस और एब्डोमिनल को छोड़कर अन्य अंगों में होने वाले एक्स- रे से रेडिएशन का दूरगामी दुष्परिणाम नहीं होता है। यह कहना है अमेरिका स्थित जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम महेश का। उन्होंने यह बात केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल में शनिवार को एमआरआई और सीटी स्कैन में नई सीमाओं की खोज विषय पर आयोजित कार्यशाला को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेडियोडायग्नोसिस विभाग और आईएसआरटी की तरफ से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रोफेसर दुर्गेश द्विवेदी ने बताया कि प्रोफेसर महेश ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे, उन्होंने एक्सरे से संबंधित कई भ्रांतियां को दूर किया है। साथ ही नई तकनीक के बारे में भी जानकारी साझा की।

डॉ. दुर्गेश की माने तो प्रोफेसर एम महेश ने एक्स-रे के दौरान उत्पन्न होने वाले रेडिएशन को लेकर कई स्टडी की है जिसमें यह बताया गया है कि चेस्ट एक्स-रे के दौरान बहुत नॉर्मल रेडिएशन होता है, जिससे किसी प्रकार की जेनेटिक बीमारी नहीं होती है और ना ही इसका दूरगामी दुष्परिणाम होता है। इस दौरान उन्होंने कहा की कई बार रेडियो डायग्नोसिस के क्षेत्र में काम करने वाली महिला कर्मचारी यदि गर्भवती हैं तो वह एक्स-रे का कार्य नहीं करती, उन्हें डर लगता है कि इससे होने वाले बच्चे पर दुष्प्रभाव पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं है।

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उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में ऐसी मशीन बन रही हैं। जिसमें रेडिएशन सेफ्टी रहती है। साथ ही अन्य कई तकनीक है जिसके चलते रेडिएशन से बचा जा सकता है।

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