फरीदपुर कांड: हत्या की ओर से इशारा कर रहे साक्ष्य, पुलिस की फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस बंद करने की तैयारी
बरेली, अमृत विचार: फरीदपुर में अपने कमरे में सो रहे पांच लोगों की आग से जलकर मौत की घटना में पुलिस की तफ्तीश कोई स्पष्ट प्रमाण न होने के बावजूद घटना को हादसा बताने की ओर बढ़ रही है। उन सभी साक्ष्यों को नजरंदाज कर दिया गया है जो हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। संभावना है कि इसी सप्ताह पुलिस अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट में बताए संभावित और अज्ञात कारणों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर इस मामले को बंद कर देगी।
फरीदपुर के फर्रखपुर मोहल्ले में अजय गुप्ता का एक कमरे का मकान था जिसके बाहर किचन, शौचालय और बड़ा बरामदा था। इसी कमरे में लगी आग में अजय, उनकी पत्नी अनीता और तीन बच्चों की 28 जनवरी की रात जलकर मौत हो गई थी। हत्या की ओर इशारा करने वाला सबसे बड़ा साक्ष्य यह था कि कमरे के दरवाजे पर बाहर से ताला लगा पाया गया था। बरामदे में खड़ी तीन मोटर साइकिलों के पेट्रोल सप्लाई के पाइप भी कटे हुए थे और उनके टैंक से सारा तेल निकाल लिया गया था।
इसके बावजूद घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचे उच्चाधिकारियों ने हादसा होने का शक जताया तो पुलिस ने भी यही लीक पकड़ ली। घटनास्थल पर हत्या के स्पष्ट साक्ष्य न मिलने से पुलिस के लिए हादसे की थ्योरी पर बढ़ना आसान भी हो गया। अजय और उनके परिवार की बदकिस्मती से आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगा था, लिहाजा यह भी पता नहीं चल पाया कि हत्या के लिए कोई उनके घर में घुसा था या नहीं।
बताया जा रहा है कि अग्निशमन विभाग के अपनी रिपोर्ट में बताए गए संभावित और अज्ञात कारणों को केस बंद करने को पुलिस आधार बनाने जा रही है। अग्निशमन विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में आग लगने के पांच कारण बताए थे। इनमें से तीन संभावित हैं और दो अज्ञात। एक संभावित कारण शॉर्ट सर्किट, दूसरा ब्लोअर या हीटर की तपिश से आग लगना और तीसरा अलाव से आग लगना बताया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों कारणों की पुष्टि न होने के बावजूद इनकी संभावना से आग लगने का दावा किया गया है। इसके अलावा दो अज्ञात कारण बताकर रिपोर्ट को ही अविश्वसनीय बना दिया गया है।
हादसे की सारी संभावनाएं सिरे से खारिज कर चुका है विद्युत सुरक्षा विभाग
अग्निशमन विभाग से पहले विद्युत सुरक्षा विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को सौंपी थी। इसमें विद्युत सुरक्षा अधिकारी एके चौधरी ने शॉर्ट सर्किट, ब्लोअर या हीटर से आग लगने की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने इस रिपोर्ट में कमरे में कोई अलाव या अंगीठी की मौजूदगी होने से भी साफ इन्कार किया था। अग्निशमन विभाग के बताए दो अज्ञात कारणों में एक बीड़ी-सिगरेट पीने का बताया गया था, जिसे मोहल्ले के लोगों और परिजनों ने यह कहकर नकार दिया था कि अजय बीड़ी-सिगरेट नहीं पीता था।
परिजनों का सवाल- क्यों नहीं सुरक्षित कराया विसरा
अजय के परिवार के लोग पोस्टमार्टम के दौरान पांचों में से किसी का विसरा सुरक्षित कराकर उसे जांच के लिए न भिजवाने पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आग लगने के बाद फेफड़ों में धुएं के कण फंसने की वजह से मृत्यु होना दर्शाया है। वे लोग शुरू से हत्या की आशंका जता रहे थे। बहुत संभावना इस बात की थी कि पांचों को कोई जहरीली चीज खिलाने के बाद कमरे में आग लगाई गई हो। इसके बावजूद विसरा सुरक्षित कराकर जांच के लिए नहीं भिजवाया गया।
दोबारा हाल पूछने नहीं आए व्यापारी संगठन
अजय और उनके पत्नी-बच्चों की मौत के बाद कई व्यापारी नेता मौके पर पहुंचे थे और चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस ने ठीक से जांच कर घटना का जल्द पर्दाफाश न किया तो वे फरीदपुर का बाजार बंद कराकर आंदोलन करेंगे। अजय के परिजनों का कहना है कि कोई व्यापारी नेता दोबारा हाल पूछने नहीं पहुंचा।
विवेचना के दौरान अब तक घटना से जुड़े लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके बाद अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी और उन्हीं के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी--- रामसेवक, इंस्पेक्टर फरीदपुर।
यह भी पढ़ें- बरेली: अधिकारियों की वर्दी पहनकर नौकरी लगवाने के नाम पर ठगा, पुलिस को मास्टर माइंड की तलाश
