बाराबंकी: कराह रहा संजय सेतु, नहीं उठा पा रहा वाहनों का बोझ, बढ़ते हादसों के बाद अब प्रशासन ने लिया यह नया निर्णय?
28 सौ करोड़ की लागत से होगा नए पुल का निर्माण
रीतेश श्रीवास्तव,बाराबंकी। जिले के लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाघरा नदी पर सन् 1984 में बना संजय सेतु बढ़ते वाहनों के बाेझ तले कराह रहा है। 40 वर्ष की उम्र में पहुंच चुका यह सेतु सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत नहीं रहा गया है। शुक्रवार को अचानक सेतु में चार जगह ज्वॉइंटर टूट गया। यह कोई पहला मामला नहीं हैं इसके पहले भी आधा दर्जन से अधिक ऐसी समस्याएं आ चुकी हैं।
इसके चलते लखनऊ समेत दर्जन भर जिलों के अलावा नेपाल देश के यातायात पर प्रभाव पड़ चुका है। बीेते 09 अप्रैल 1981 को इस सेतु की आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने रखी थी। उस समय बाराबंकी लखनऊ समेत आसपास के करीब दर्जन भर जिलों में बनने वाला इतना लंबा पहला सेतु था। यही वजह है कि जब यह सेतु बनकर तैयार हुआ तो दूर-दूर से लोग इस सेतु को देखने आते थे। घाघरा नदी की बहती धारा के ऊपर बने इस पुल से गुजरने का रोमांच कुछ और होता था।
लोक निर्माण विभाग के जानकारों की मानें तो इस सेतु पर बीते दो दशक में कई गुना यातायात बढ़ा है। 18 वर्ष पहले यानी 2006 में इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने के कारण इसे नेशनल हाईवे का दर्जा दे दिया गया था। राजधानी लखनऊ समेत दक्षिण यूपी को नेपाल और दर्जन भर जिलों को जोड़ने वाले इस राजमार्ग पर यातायात काफी बढ़ने से दो लेन सेतु पर अब फोर लेन राजमार्ग के यातायात का वजन यह सेतु झेल नहीं पा रहा है।
पिछले कई सालों से लगातार इसके ज्वॉइंटरों में दरार पड़ने से आवागमन ठप हो जा रहा है। लंबी-लंबी वाहनों की कतार लग जाती है। पुलिस प्रशासन को कड़ी मशक्कत कर यातायात बहाल करने में पसीना छूटता है। नेपाल राष्ट्र तक जोड़ने वाला क्षेत्र का यह सेतु कई मायनों पर अहम भूमिका निभाता है।
डीसीएम पलटने से गई थी 22 की जान
18 अगस्त 2018 को बहराइच से लखनऊ जा रही डीसीएम संजय सेतु पर अनियंत्रित होकर रेलिंग तोड़ते हुए नदी में गिरी थी। डीसीएम में सवार कुल 26 लोगों में से 22 डूब गए थे। डूबे लोग श्रावस्ती के सिरसिया तथा बहराइच के नानपारा के निवासी थे। डीसीएम बहराइच से उड़द दाल लादकर एक लखनऊ की ओर जा रही थी। डीसीएम में लखनऊ जाने के लिए मजदूर सवार थे। जांच में पता चला था कि डीसीएम संजय सेतु के ज्वॉइंटर में पड़ी दरार व गड्ढे के कारण अनियंत्रित होकर रेलिंग तोड़ती हुई नदी में गिरी थी। सूचना पर बाराबंकी व बहराइच के डीएम भी घटना स्थल पहुंचे थे।
2021 में तीन बार ज्वॉइंटरों में आई थी दरार
वर्ष 2021 में 22 जनवरी, 20 अप्रैल और 27 जून को भी छह महीनों के अंदर तीन बार संजय सेतु के ज्वॉइंटरों में दरार आई थी। एक बार तो लगातार 48 घंटों तक मरम्मत का कार्य पीएनसी कंपनी द्वारा किया गया था। इसके चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पुलिस प्रशासन के द्वारा धीरे-धीरे वाहनों को निकाला गया था। हर बार मरम्मत कार्य कराकर जिम्मेदार विभाग ने पल्ला झाड़ लिया। यह हाल तब था। जब इसके पूर्व एक डीसीएम के नदी में गिरने जैसी बड़ा घटना हो चुकी थी।
अब ली सुध, 300 करोड़ से बनेगा सेतु
बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 27 समेत सरयू नदी पर नए पुल की निर्माण 28 सौ करोड़ की लागत से एनएचएआई द्वारा कराया जाएगा। यह हाइवे बुढ़वल चौराहा के बाहर से बनाया जाएगा। हाइवे को ग्राम साधारणपुर के पास से मोड़कर बिछलखा, भरसवा मोड़ से ले जाकर नचना गांव के पास जोड़ा जाएगा।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस हाइवे को फोर लेन बनाने का निर्णय लिया है। 740 करोड़ रुपए की लागत में बाराबंकी से जरवल तक जहां फोरलेन बनने का काम प्रस्तावित किया गया है। वहीं जिसमें सरयू नदी पर करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से नए पुल का भी निर्माण पुराने संजय सेतु के बाई ओर कराया जाएगा।
