Bareilly News: शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों की सूची के साथ बकाया किराये का ब्योरा तलब

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के मुख्य पर्ववेक्षक ब्रिगेडियर यशपाल सिंह (रिटायर्ड) ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार से जिले में शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों का विवरण के साथ नया लीव, लाइसेंस एग्रीमेंट का ब्योरा तलब किया है। मुख्य पर्यवेक्षक ने मानक ऑपरेटिंग प्रक्रिया के तहत सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है।

मुख्य पर्यवेक्षक ने 14 फरवरी को यह निर्देश पुराना शहर के रोहली टोला निवासी रईसा बेगम के प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेकर दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को रईसा बेगम को जिले भर में किराये पर आवंटित शत्रु संपत्तियों पर बकाया देय राशि और संपत्तियों के आवंटन पत्र की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है।

रईसा बेगम ने तीन शत्रु संपत्तियों का जिक्र कर मुख्य पर्यवेक्षक को लिखा पत्र
पुराना शहर के रोहली टोला निवासी रईसा बेगम ने अपने अधिवक्ता के जरिए भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के मुख्य पर्यवेक्षक को पत्र लिखा था। उसमें तीन शत्रु संपत्तियों का जिक्र किया। 

तीनों संपत्तियों में 25 जनवरी 1993 में आवंटित 250 वर्ग गज का प्लाट जो 50 रुपये प्रति माह किराये पर है। इसी तरह 27 फरवरी 1993 में 30 वर्ग गज का प्लाट जो 60 रुपये प्रति माह किराये पर और 17 जुलाई 1993 में 15 वर्ग गज का प्लाट जो 40 रुपये प्रति माह के किराये पर आवंटित किया गया था। उपरोक्त संपत्तियों पर वर्तमान में बकाया देयराशि का विवरण और संपत्तियों को (किराये पर) आवंटन पत्र की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की।

जनपद में हैं 243 शत्रु संपत्तियां
2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय से दिशा-निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने जिले में बंटवारे के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान गए लोगों की संपत्तियों का मूल्यांकन कई स्तर पर कराया। अभिलेख के साथ फोटोग्राफ, नजरी नक्शा तैयार किए गए। जिले में 243 शत्रु संपत्तियां हैं। संपत्तियों की वर्तमान में अरबों रुपये कीमत है। इसमें सर्वाधिक 151 संपत्तियां तहसील सदर क्षेत्र में हैं। 

तहसील सदर प्रशासन ने संपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट नए सिरे से तैयार की। शत्रु संपत्तियों में मकान, दुकानें व खाली प्लॉट और व्यावसायिक भवन भी शामिल हैं। पिछले साल शत्रु संपत्तियों को किराए पर देने के लिए शासन स्तर पर पहल हुई थी। इसके बाद तहसील प्रशासन ने प्रति गज के हिसाब से किराया तय किया था।

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