Kanpur News: रिश्तों का इम्तिहान ले रही बच्चों की परीक्षा...मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे इस तरह के मामले

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Edited By Amrit Vichar
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मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे छोटी-छोटी बात पर पति-पत्नी में कलह के मामले

कानपुर, अमृत विचार। बोर्ड परीक्षा के बीच घरों का बदला माहौल बच्चों के साथ अभिभावकों के बीच तनाव बढ़ा रहा है। दिनचर्या में अनुशासन, खानपान में बदलाव, बंद टीवी, मोबाइल पर सख्ती और समय की पाबंदी जैसे नियम तमाम घरों में परेशानी के साथ अभिभावकों के रिश्तों में  तल्खी का कारण बन रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक कड़ाई का पालन करने वाले घरों में कलह बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं। 

जिन घरों में बच्चे यूपी बोर्ड और सीबीएसई की परीक्षा दे रहे हैं, उनमें लगभग 50 फीसदी घर ऐसे हैं जहां पर बच्चों की पढ़ाई की वजह से रिश्तों में तल्खी के केस सामने आ रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों के पास दो दर्जन से ज्यादा ऐसे केस आ चुके हैं। 

मनोवैाज्ञिनक डॉ. एलके सिंह ने कहा कि उनके पास जो केस आ रहे हैं उनमें छोटे-छोटे विवाद बड़े रूप ले रहे हैं। किन्हीं केस में पति व पत्नी के बीच बातचीत बंद हो जाती है तो कहीं पर पसंद नापसंद को दरकिनार किया जाता है। सभी केस में एक बाद कॉमन होती है कि बच्चे के भविष्य के लिए दोनों के बीच तल्खी बहुत अधिक नहीं बढ़ती।

मनोवैज्ञनिकों के अनुसार उनके पास आने वाले 90 फीसदी केस ऐसे हैं जहां पर पहले से ही काउंसिलिंग की केस हिस्ट्री रही है। दो से तीन साल पहले तक काउंसिलिंग कराने वाले जोड़े इस समय अधिक आ रहे हैं। 

इनमें 42 से 45 साल उम्र के कामकाजी जोड़े अधिक हैं। पति-पत्नी दोनो के ऑफिस जाने की वजह से परीक्षाएं उनके लिए अधिक समय देने वाला इंवेंट बन गया है। समय की कमी और अधिक कार्य बोझ की वजह से यह स्थिति विवाद का कारण बनकर उभरी है।

दलिया व खिचड़ी बन गई वजह

तिलक नगर निवासी दंपत्ति के बीच विवाद की स्थिति इस वजह से बनी क्योंकि परीक्षा के दौरान खिचड़ी और दलिया घर में अधिक बनी। बच्चे को पढ़ाने में अधिक समय मिले इस वजह से रसोई में कम समय दिया गया। ऐसे में पति की ओर से तल्खी शुरू हुई जो काउंसिलिंग तक पहुंची।

केंद्र ले जाना भी मुसीबत

परीक्षा के दौरान हाई स्कूल की छात्रा को रोजाना केंद्र लाना व छोड़ना मुसीबत बन गा। शारदा नगर स्थित परिवार में इसे लेकर विवाद हुआ कि बच्ची को सिर्फ पति ही क्यों स्कूल छोड़ने जाए। दंपत्ति के बीच दो काउंसिलिंग के सेशन में मामला शांत हो गया। 

इंतजार करने से हो रही देरी

स्वरूप नगर के एक दंपत्ति के बच्चे का सेंटर काफी दूर पहुंचा है। ऐसे में पति को सेंटर के बाहर परीक्षा छूटने तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि तीन अभिभावकों ने एक साथ यह जिम्मेदारी संभाली है ऐसे में जब  उनका नंबर आता है तो उसे ऑफिस से हाफ टाइम लेना पड़ता है। 

बुजुर्ग न होने से बढ़ते विवाद

मनोवैज्ञानिक परीक्षण व परामर्श केंद्र के डॉ. एलके सिंह ने कहा कि इस तरह के केस बहुत ही नॉर्मल होते हैं। इनमें नाममात्र की ही काउंसिलिंग होती है। सिर्फ माहौल बदल देने भर से विवाद खत्म हो जाता है। इन केस में यदि परिवार में एक भी बुजुर्ग हो तो विवाद वहीं पर शांत हो जाएं।

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