एसएससी(जीडी) भर्ती में धांधली करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ. छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश एवं असम राज्य में आयोजित होने वाली एसएससी (जीडी) भर्ती में यूपी के अभ्यर्थियों को लाभ पहॅुचाने के उद्देश्य से उन राज्यों के फर्जी आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र, मार्कशीट एवं वोटर आईडी तैयार करने वाले गिरोह के तीन सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। एसटीएफ यूपी को छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश एवं असम में आयोजित होने वाली सएससी (जीडी) भर्ती परीक्षाओं मे उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियो को लाभ पहॅुचाने के उद्देश्य से इन राज्यों के फर्जी आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र, मार्कशीट एवं वोटर आईडी तैयार करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार करने में कामियाबी मिली है। एसटीएफ ने तरूण पुत्र, रॉबिन व सचिन को गिरफ्तार किया है। ये तीनों आरोपी बुलंदशहर के रहने वाले हैं। आरोपियों के पास के एक लैपटॉप, पांच मोबाइल, 12 फर्जी आधारकार्ड, मार्कशीट व रिजिस्ट्रेशन बरामद की गई है।
एसटीएफ उत्तर प्रदेश को पिछले कुछ समय से अन्य प्रदेशों के फर्जी आधार कार्ड एवं फर्जी निवास प्रमाण पत्र तैयार करने वाले गिरोह के बारे में जानकारी मिल रही थी। सूचनाओं के आधार पर एसटीएफ की एक टीम इन लोगों पर कार्रवाई के लिए एक्टिव थी। इस दौरान एसटीएफ को जानकारी मिली की कुछ लोग सफेद रंग की स्विफ्ट कार रिजिस्ट्रेशन नंबर DL 12 CN 0670 से गुलावठी क्षेत्र से बुलन्दशहर की ओर जाने वाले हैं। ये भिन्न राज्यों के फर्जी दस्तावेज बनाते है। जिसके बाद एसटीएफ टीम द्वारा स्थानीय पुलिस को साथ लेकर गुलावठी के पास स्विफ्ट कार को रोककर तलाशी ली गयी, तो उसमें बरामद दस्तावेज पाये गये, जिस पर कार सवार तीनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ पर बताया कि उनका एक गिरोह है, जो विभिन्न राज्यों के फर्जी कागजात जैसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, मार्कशीट, वोटर आईडी आदि बनाते है। छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश एवं असम में आयोजित होने वाली एसएससी (जीडी) भर्ती में उत्तर प्रदेश के युवको को लाभ पहुंचाने हेतु उन राज्यों का फर्जी दस्तावेज तैयार करते है। इन फर्जी दस्तावेजों के एवज में प्रति लड़के 05 लाख रूपये लेते हैं। जिनमें से 02 लाख रूपये मनोज व टिंकू को देते है। शेष पैसा आपस में बॉट लेते है। यह लोग छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश व असम आदि में आयोजित होने वाली एसएससी (जीडी) की भर्ती परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश के आरोपियो को उन राज्यों का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर फार्म भरवाकर परीक्षा दिलाते है, क्योंकि इन राज्यों में उत्तर प्रदेश की तुलना में कम अंकों पर मेरिट बनती है, जिससे इनको लाभ मिलता है।
