बाराबंकी: मत्स्य पालन के क्षेत्र में बुलंदियों को छू रहे संग्राम सिंह, मत्स्य बीज का प्लांट लगाकर दे रहे रोजगार
विकास पाठक/ बनीकोडर/ बाराबंकी, अमृत विचार। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले संग्राम सिंह को नौकरी के बजाय मत्स्य पालन रास आ गया। मत्स्य पालन विभाग और स्थानीय जानकारों से जानकारी लेकर खेत में तालाब खोदवाकर मत्स्य पालन शुरु कर दिया। कुछ महीनों की दिक्कत के बाद उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलने लगा। अब वह अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। संग्राम सिंह मछली पालन करके न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं बल्कि लाखों का आमदनी भी पैदा कर रहे हैं। एक पक्का टैंक से मछली पालन शुरु करने वाले संग्राम सिंह की मेहनत की वजह से आज 24 टैंक का निर्माण कर उसमें विभिन्न प्रजातियों के मत्स्य बीज डालकर मछली पालन कर रहे हैं। उन्हें यह व्यवसाय इस कदर भाया कि उन्हों ने इसके अलावा दो कच्चे तालाबों में भी मत्स्य पालन काम शुरु कर दिया। अपनी मेहनत, विभागीय अधिकारियों के मार्ग दर्शन के साथ सरकार की योजनाओं की मदद से मत्स्य पालन का यह व्यवसाय उन्हें कहां से कहां तक पहुंचा दिया। उनकी सफलता यहीं नहीं रुकी संग्राम सिंह ने इसके साथ ही मछली का दाना बनाने वाली फैक्ट्री भी लगवा लिया है।

ब्लाॅक बनीकोडर के दादूपुर गांव निवासी संग्राम सिंह के पिता सुरेश सिंह शुरु से खेती किसानी के कार्य से जुड़े हैं। सुरेश सिंह ने खेती किसानी कर अपने बेटे संग्राम सिंह को वर्ष 2018 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करवाया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नौकरी की तलाश में अपना समय गंवाने के बजाय मत्स्य विभाग पहुंचे।जहाँ से उन्होंने पैतृक भूमि पर 50 लाख का प्रोजेक्ट बनाकर बैंक से ऋण लिया और वर्ष 2019 में मछली पालन शुरु किया। संग्राम सिंह को एक सीजन में लगभग 20 लाख का फायदा हुआ। अब 5 वर्ष में 24 टैंक अपने का निर्माण कराकर अच्छी प्रजाति के मत्स्य बीज डालकर मछली तैयार कर उन्हें बाहर भेज रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। इसके साथ ही 30 लाख की लागत की एक मिनी फैक्ट्री लगवाई है। जहाँ पर मछली का दाना बनाया जाता है। यहां रोजगार के अवसर भी वह दे रहे हैं।
संग्राम सिंह बताते हैं कि उन्होंने बीटेक की पढ़ाई मात्र नौकरी के लिए नहीं किया था। नौकरी से अच्छी सरकार की अन्य तमाम योजनाएं हैं। जिससे जुड़कर बेरोजगार ब्यक्ति अपने आप को रोजगार से जोड़ सकता हैं।उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें पढ़ाया था । अब संग्राम सिंह ने कर्ज अदा कर दिया है इसके साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।नाबार्ड की टीम ने विजिट के बाद इस युवा की काफी तारीफ की। मंडल स्तर पर इन्हें पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
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