गोंडा: 22 करोड़ के भुगतान को लेकर बीएसए और बीईओ संघ आमने-सामने, जानिए क्या है मामला
बीएसए पर भुगतान का दबाव बनाने का आरोप, महानिदेशक को पत्र भेजकर खंड शिक्षा अधिकारियों ने मांगा सामूहिक तबादला
गोंडा, अमृत विचार। वर्ष 1999 में तैनात हुए 51 बीएड शिक्षकों के बकाया 22 करोड़ रुपये के वेतन भुगतान को लेकर बीएसए व बीईओ संघ आमने सामने आ गया है। खंड शिक्षा अधिकारियों ने बीएसए पर भुगतान के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है और स्कूली शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजकर सामूहिक तबादले की मांग की है। खंड शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत की प्रति जिला प्रशासन को भी भेजी है। अफसरों के बीच की यह लड़ाई शिक्षकों में चर्चा का विषय बनी है।
उत्तर प्रदेश विद्यालय निरीक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कोमल यादव के मुताबिक जिले में वर्ष 1999 में बीएड डिग्री धारी 51 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी थी। इनमें से 38 शिक्षक जिले के विभिन्न शिक्षा क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इन सभी की नियुक्ति व कार्यभार ग्रहण तिथि विवादित है। हाईकोर्ट के आदेश पर इन सभी को वर्ष 2019 से वेतन भुगतान किया जा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश मे यह भी लिखा गया है कि वित्तीय निहितार्थों के कारण अन्तिम निर्णय तक, बकाया का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।" इसके बावजूद इन सभी को वर्ष 2010 से वेतन भुगतान देने की साजिश रची जा रही है। यह धनराशि करीब 22 करोड़ रुपये है। बीएसए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों पर बकाया वेतन भुगतान करने के लिए दबाव बना रहे हैं। अनुचित भुगतान में सहयोग न करने के कारण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एमडीएम के अन्तर्गत आईवीआरएस काल से प्राप्त औसत लाभार्थी छात्र संख्या के आधार पर कम उपस्थिति प्रतिशत को आधार बना कर खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। बीईओ संघ का कहना है कि कटरा बाजार में छात्रों की उपस्थिति को 28.38 प्रतिशत बताया जा रहा है जबकि इसका वास्तविक प्रतिशत 53.97 है। इसी तरह रुपईडीह में 30.48 प्रतिशत उपस्थिति दिखाई गयी है जबकि वास्तविक उपस्थिति 51 प्रतिशत है। नगर क्षेत्र में 62 प्रतिशत है।इस मनमानी के खिलाफ बीईओ संघ ने स्कूली शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजा है और सामूहिक स्थानांतरण की मांग की है।
वर्जन-
इन अध्यापकों की नियुक्ति तिथि, कार्यभार ग्रहण तिथि एवं कार्य प्रमाणित नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में वेतन भुगतान को न्यायालय मे योजित रिट के अन्तिम निर्णय के अधीन भी बताया है। फिर भी लगभग 22 करोड़ का भुगतान कराये जाने का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि उच्च न्यायालय में अभी रिट याचिका लम्बित है। ऐसे में भुगतान किये जाने से न्यायालय के आदेश की अवहेलना हो रही है। यदि इस रिट याचिका में अन्तिम निर्णय नियुक्ति के विपरीत जाता है तो उसकी रिकवरी भी हो सकती है। जबकि इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी खण्ड शिक्षा अधिकारियों के ऊपर भुगतान कराने के लिए व्यक्तिगत दबाव बना रहे हैं।
कोमल यादव, जिलाघ्यक्ष- उत्तर प्रदेश विद्यालय निरीक्षक संघ
वर्जन-
वर्ष 1999 में 51 बीएड शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में वेतन भुगतान का आदेश दिया लेकिन किसी अधिकारी ने वेतन देने में रुचि नहीं दिखाई। शिक्षकों ने अवमानना याचिका दाखिल की तो वर्ष 2019 में तत्कालीन बीएसए मनीराम सिंह ने वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया लेकिन यह भुगतान वर्ष 2019 से ही किया गया। जबकि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में वेतन भुगतान 2010 से किया जाना था। इसी क्रम में वेतन भुगतान के लिए पत्र जारी किया गया है लेकिन बीईओ इस पत्र का जवाब नहीं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त निपुण अभियान, छात्र उपस्थिति व अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में भी रुचि नहीं ली जा रही है जिससे जिले की रैंकिंग पिछड़ रही है। इस लापरवाही को लेकर शासन को रिपोर्ट भेजी गयी है। भुगतान के लिए दबाव बनाने का आरोप निराधार है।
-प्रेमचंद यादव, बीएसए
ये भी पढ़ें -NIA की विशेष अदालत ने पाक जासूसी मामले में मोहम्मद राशिद को सुनाई सजा
