सुलतानपुर: 24 साल पूर्व हुए जानलेवा हमले में कोर्ट ने चार दोषियों को सुनाई 10 साल कैद की सजा, लगाया तगड़ा अर्थदंड!

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विधि संवाददाता, सुलतानपुर, अमृत विचार। पुरानी रंजिश में 24 साल पूर्व दलित को अपमानित कर गोली मार देने के चार दोषसिद्ध अभियुक्तों को एससी-एसटी कोर्ट के जज त्रिभुवन नाथ पासवान की अदालत ने गुरुवार को 10 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 30 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। 

सरकारी वकील गोरखनाथ शुक्ल ने बताया बल्दीराय थाना क्षेत्र के बिही निदुरा निवासी श्रीपाल पासी और मंसाराम अग्रहरि के बीच मुकदमेबाजी चल रही थी। तीस सितंबर वर्ष 2000 को मोटर साइकिल से मुकदमे की पैरवी करने निकले श्रीपाल पासी पर मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के गुलाम हैदर का पुरवा  के पास हमला किया गया था। जिसमें मंसाराम अग्रहरि, अनिरुद्ध अग्रहरि, कन्हैयालाल और रमाकांत मिश्र पर पुलिस ने चार्ज शीट दाखिल की थी।

अधिवक्ता आजाद हत्याकांड में नहीं तय हो सके आरोप

सुलतानपुर, अमृत विचार। अधिवक्ता आजाद अहमद हत्याकांड में गुरुवार को जेल से आरोपियों के न आने के कारण आरोप तय नहीं हो सके। वादी पक्ष के अधिवक्ता शेख नजर अहमद व रणजीत सिंह त्रिसुण्डी ने बताया सेशन कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए 18 मार्च की तारीख नियत की है। 

कोतवाली देहात थाना के भुलकी प्यारेपट्टी चौराहे पर बीते साल छह अगस्त को गोली मारकर दीवानी के अधिवक्ता आजाद अहमद की हत्या कर दी गई और भाई मुनव्वर घायल हो गया था। लखनऊ की जेल में बंद आरोपी इस्माइल उर्फ प्रिंस को न्यायिक अभिरक्षा में सेशन कोर्ट लाया गया। 

घटना में सोहराब, अख्तरुन, शहजाद, शमीम, मेराज, सलमान, इकराम समेत अन्य आरोपी हैं। जिन पर आरोप तय होने हैं। वहीं, मुख्य आरोपी सिराज अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।

साक्ष्य के अभाव में दो आरोपी हो गए बरी

सुलतानपुर, अमृत विचार। कूरेभार थानाक्षेत्र के पुरखीपुर के भोला का पुरवा से 12 साल पूर्व दो लाख रुपए की फिरौती के लिए बच्चे के अपहरण व हत्या की धभकी देने के आरोपी राहुल पांडेय व कौशल गौतम को साक्ष्य के अभाव में गुरुवार को न्यायाधीश अभय श्रीवास्तव ने बरी कर दिया। 

बचाव पक्ष के वकील विष्णुकांत पांडेय ने बताया 11 फरवरी 2012 को छह साल के भतीजे अभिषेक की गुमशुदगी की रिपोर्ट अभिजीत तिवारी ने दर्ज कराया था। दौरान विवेचना आरोपियों के खिलाफ दो लाख रुपए की फिरौती के लिए अपहरण व हत्या की धमकी के आरोप में चार्जशीट कोर्ट में पुलिस ने भेजा। 

कोर्ट में इस दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से पेश साक्ष्यों व जिरह के आधार पर आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य साबित न होने के चलते कोर्ट ने दोनो आरोपियों को बरी कर दिया।

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